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Udhampur News: साइटिका गंभीर समस्या, समय पर जांच और उपचार जरूरी

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jammu kashmir news
उधमपुर। आजकल लंबे समय तक बैठकर काम करने और बदलती दिनचर्या के कारण कमर व पैरों से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। इन्हीं में साइटिका भी शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार कमर की नस पर दबाव पड़ने, स्लिप डिस्क और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से साइटिका की समस्या हो सकती है। शुरुआत में लोग इसे सामान्य कमर या पैर का दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन लगातार दर्द रहने पर जांच करवाना जरूरी है।
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साइटिका में कमर से पैर तक जाने वाली नस प्रभावित होती है। यह नस कमर के निचले हिस्से से निकलकर पैर के पीछे की तरफ जाती है। जब इस नस पर दबाव पड़ता है या उसमें सूजन आती है तो कमर से पैर तक दर्द महसूस हो सकता है। इसका एक सामान्य कारण स्लिप डिस्क है। इसके अलावा चोट या कमर से जुड़ी अन्य समस्याओं के कारण भी नस पर दबाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल मोबाइल, लैपटॉप और डेस्क पर लंबे समय तक काम करने की वजह से लोग घंटों एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं। इससे कमर की मांसपेशियों पर खिंचाव बढ़ सकता है और पहले से मौजूद समस्या भी बढ़ सकती है। हालांकि हर कमर दर्द को साइटिका नहीं माना जा सकता। इसके लिए सही जांच जरूरी है। यदि समय से जांच नहीं करवाई जाए तो आगे चलकर समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा अधिकांश मामलों में दवाइयों, फिजिकल थेरेपी और चिकित्सक की सलाह से की जाने वाली एक्सरसाइज से राहत मिल सकती है।
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साइटिका के लक्षण
साइटिका के लक्षणों में कमर से शुरू होकर एक पैर तक जाने वाला दर्द, झुनझुनी, सुन्नपन, पैर में भारीपन और कमजोरी शामिल हो सकती है। कुछ लोगों को बैठने, उठने या चलने के दौरान दर्द अधिक महसूस होता है। समस्या बढ़ने पर रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी हो सकती है।
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कोट

साइटिका से बचाव के लिए लंबे समय तक लगातार बैठने से बचना चाहिए। काम के बीच थोड़ी देर उठकर चलना, सही मुद्रा में बैठना और नियमित हल्की एक्सरसाइज करना फायदेमंद हो सकता है। किसी भी व्यक्ति को कमर से पैर तक लगातार दर्द, सुन्नपन या कमजोरी महसूस होने पर इसे नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सक से जांच करवानी चाहिए।
- डा. सैयद अहमद, हड्डी रोग विशेषज्ञ।
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