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Udhampur News: पीएमएफएमई योजना से पूनम बनीं आत्मनिर्भर, गांव में शुरू की आटा चक्की
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उधमपुर। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की ओर से संचालित योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। सुद्धमहादेव की रहने वाली पूनम शर्मा ने भी स्वरोजगार की राह अपनाकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि गांव के लोगों के लिए सुविधा उपलब्ध कराने के साथ दो अन्य लोगों को रोजगार का अवसर भी दिया है।
12वीं तक शिक्षित पूनम शर्मा ने अपने क्षेत्र की जरूरत को पहचानते हुए आटा-चक्की यूनिट स्थापित करने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (पीएमएफएमई) के तहत उन्होंने करीब तीन लाख रुपये का ऋण लेकर गांव में आटा-चक्की का कारोबार शुरू किया। इस कार्य में जिला बागवानी विभाग तथा योजना एवं विपणन विभाग की ओर से आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
वर्ष 2011 में शादी के बाद पूनम घरेलू जिम्मेदारियों में व्यस्त हो गई थीं लेकिन आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की इच्छा ने उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि गांव में आटा पिसवाने की सुविधा उपलब्ध नहीं थी और ग्रामीणों को इसके लिए करीब 12 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। ऐसे में उन्होंने लोगों की इस जरूरत को ही अपने लिए रोजगार का अवसर बनाने का फैसला किया।
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यूनिट शुरू होने के बाद ग्रामीणों को गांव में ही आटा पिसवाने की सुविधा मिलने लगी। इससे लोगों को दूर जाने की परेशानी से राहत मिली। वहीं, पूनम को आय का जरिया मिलने के साथ अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सहयोग करने का अवसर मिला।
पूनम की इस पहल से गांव के दो अन्य लोगों को भी रोजगार मिला है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी कदम बढ़ा सकती हैं। स्थानीय जरूरत को स्वरोजगार में बदलकर पूनम ने महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण रोजगार की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।
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12वीं तक शिक्षित पूनम शर्मा ने अपने क्षेत्र की जरूरत को पहचानते हुए आटा-चक्की यूनिट स्थापित करने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (पीएमएफएमई) के तहत उन्होंने करीब तीन लाख रुपये का ऋण लेकर गांव में आटा-चक्की का कारोबार शुरू किया। इस कार्य में जिला बागवानी विभाग तथा योजना एवं विपणन विभाग की ओर से आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
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वर्ष 2011 में शादी के बाद पूनम घरेलू जिम्मेदारियों में व्यस्त हो गई थीं लेकिन आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की इच्छा ने उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि गांव में आटा पिसवाने की सुविधा उपलब्ध नहीं थी और ग्रामीणों को इसके लिए करीब 12 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। ऐसे में उन्होंने लोगों की इस जरूरत को ही अपने लिए रोजगार का अवसर बनाने का फैसला किया।
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यूनिट शुरू होने के बाद ग्रामीणों को गांव में ही आटा पिसवाने की सुविधा मिलने लगी। इससे लोगों को दूर जाने की परेशानी से राहत मिली। वहीं, पूनम को आय का जरिया मिलने के साथ अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सहयोग करने का अवसर मिला।
पूनम की इस पहल से गांव के दो अन्य लोगों को भी रोजगार मिला है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी कदम बढ़ा सकती हैं। स्थानीय जरूरत को स्वरोजगार में बदलकर पूनम ने महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण रोजगार की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।