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Udhampur News: सफाई कर्मियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही, जगह-जगह गंदगी के लगे ढेर
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उधमपुर। रक्षा बंधन से ठीक पहले लंबित मांगों को लेकर नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों की शुरू हुई काम छोड़ हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शुक्रवार से नगर परिषद के स्थायी और अस्थायी सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं। शनिवार को भी शहर में कचरा उठाने का काम पूरी तरह बंद रहा। नतीजतन कई स्थानों पर कचरे के ढेर दिखाई दिए। त्योहार से पहले बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ती भीड़ के बीच सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
उधर, हड़ताल पर गए कर्मचारियों ने शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी नगर परिषद कार्यालय परिसर में धरना देकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए सरकार से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की।
सफाई कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में अस्थायी सफाई कर्मचारियों को स्थायी करना और पुरानी पेंशन योजना बहाल करना शामिल है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से इन मांगों को लेकर संघर्ष करते आ रहे हैं। करीब ढाई महीने पहले भी कर्मचारियों ने लगातार तीन सप्ताह तक काम छोड़ हड़ताल की थी। उस समय सरकार की ओर से जल्द मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था। आश्वासन को ढाई माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक पहल सामने नहीं आई। ऐसे में कर्मचारियों के पास दोबारा हड़ताल पर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है क्योंकि कर्मचारी आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि त्योहार से ठीक पहले हड़ताल करना कर्मचारियों की मंशा नहीं थी। यदि सरकार उनकी मांगों को तत्काल पूरा करने की दिशा में कदम उठाती है तो कर्मचारी उसी दिन काम पर लौटने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हड़ताल का उद्देश्य जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है। सरकार जितनी जल्दी उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला करेगी, उतनी ही जल्दी शहर की सफाई व्यवस्था भी सामान्य हो सकेगी।
वहीं, लगातार महत्वपूर्ण अवसरों से पहले सफाई कर्मचारियों की हड़ताल शुरू होने को लेकर शहर में सवाल भी उठने लगे हैं। शहरवासियों का कहना है कि कर्मचारियों की मांगें अपनी जगह जायज हो सकती हैं और सरकार को उन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, लेकिन हड़ताल के समय को लेकर भी विचार जरूरी है। धार्मिक पर्व के दौरान स्वच्छता और सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में बार-बार महत्वपूर्ण अवसरों के आसपास सफाई व्यवस्था ठप होना चिंता का विषय है। फिलहाल यह संयोग है या सरकार पर दबाव बनाने की कोई खास रणनीति, लेकिन इन बातों के बीच सरकार और कर्मचारियों, दोनों को जनता को पेश आने वाली परेशानियों का भी ध्यान रखना चाहिए।
कोट
नगर परिषद शहर की सफाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अपने प्रयास जारी रखे हुए है लेकिन अस्थायी कर्मचारियों के साथ ही स्थायी कर्मचारियों के भी हड़ताल पर चले जाने से शहर की सफाई व्यवस्था को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उम्मीद है, सरकार जल्द कोई समाधान निकालेगी।
-सद्दाम हुसैन, सीईओ नगर परिषद उधमपुर
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उधर, हड़ताल पर गए कर्मचारियों ने शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी नगर परिषद कार्यालय परिसर में धरना देकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए सरकार से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की।
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सफाई कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में अस्थायी सफाई कर्मचारियों को स्थायी करना और पुरानी पेंशन योजना बहाल करना शामिल है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से इन मांगों को लेकर संघर्ष करते आ रहे हैं। करीब ढाई महीने पहले भी कर्मचारियों ने लगातार तीन सप्ताह तक काम छोड़ हड़ताल की थी। उस समय सरकार की ओर से जल्द मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था। आश्वासन को ढाई माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक पहल सामने नहीं आई। ऐसे में कर्मचारियों के पास दोबारा हड़ताल पर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है क्योंकि कर्मचारी आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि त्योहार से ठीक पहले हड़ताल करना कर्मचारियों की मंशा नहीं थी। यदि सरकार उनकी मांगों को तत्काल पूरा करने की दिशा में कदम उठाती है तो कर्मचारी उसी दिन काम पर लौटने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हड़ताल का उद्देश्य जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है। सरकार जितनी जल्दी उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला करेगी, उतनी ही जल्दी शहर की सफाई व्यवस्था भी सामान्य हो सकेगी।
वहीं, लगातार महत्वपूर्ण अवसरों से पहले सफाई कर्मचारियों की हड़ताल शुरू होने को लेकर शहर में सवाल भी उठने लगे हैं। शहरवासियों का कहना है कि कर्मचारियों की मांगें अपनी जगह जायज हो सकती हैं और सरकार को उन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, लेकिन हड़ताल के समय को लेकर भी विचार जरूरी है। धार्मिक पर्व के दौरान स्वच्छता और सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में बार-बार महत्वपूर्ण अवसरों के आसपास सफाई व्यवस्था ठप होना चिंता का विषय है। फिलहाल यह संयोग है या सरकार पर दबाव बनाने की कोई खास रणनीति, लेकिन इन बातों के बीच सरकार और कर्मचारियों, दोनों को जनता को पेश आने वाली परेशानियों का भी ध्यान रखना चाहिए।
कोट
नगर परिषद शहर की सफाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अपने प्रयास जारी रखे हुए है लेकिन अस्थायी कर्मचारियों के साथ ही स्थायी कर्मचारियों के भी हड़ताल पर चले जाने से शहर की सफाई व्यवस्था को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उम्मीद है, सरकार जल्द कोई समाधान निकालेगी।
-सद्दाम हुसैन, सीईओ नगर परिषद उधमपुर