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Udhampur News: जमीन और दुकानों के कब्जे के विवाद में अदालत ने वादी के हक में सुनाया फैसला
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उधमपुर। चोपड़ा शॉप रेहंबल में 2 कनाल 12 मरला जमीन, दुकानों और मकान के कब्जे को लेकर चल रहे विवाद में उधमपुर की अदालत ने वादी कुंडन कौर के हक में फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रतिवादी कमल कुमार को वादी के कब्जे में हस्तक्षेप करने और उसे जबरन बेदखल करने से रोकते हुए स्थायी निषेधाज्ञा की डिक्री पारित की।
मामले के अनुसार कुंडन कौर का दावा था कि उसके ससुर सोहन सिंह ने वर्ष 1964 में संबंधित जमीन लीज पर ली थी। बाद में जमीन का 2 कनाल 12 मरला हिस्सा उसके पति अमरजीत सिंह के कब्जे में रहा। वर्ष 2007 में पति की मृत्यु के बाद कुंडन कौर ने अपने परिवार के साथ जमीन पर कब्जा जारी रहने का दावा किया।
वहीं प्रतिवादी कमल कुमार का कहना था कि उसकी भाभी दली रानी ने संजय कुमार से 20 सितंबर 2009 को 9 मरला जमीन खरीदी थी और उस पर बने चार दुकानों पर भी अपना अधिकार जताया था।
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अदालत ने राजस्व रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों की जांच के बाद पाया कि खसरा गिरदावरी में वादी के पति अमरजीत सिंह का कब्जा दर्ज था। अदालत ने यह भी पाया कि दली रानी के बिक्री विलेख में 9 मरला जमीन की बिक्री का उल्लेख है, लेकिन चार दुकानों की बिक्री स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं थी।
अदालत ने माना कि वादी ने 2 कनाल 12 मरला जमीन, दुकानों और मकान पर अपने कब्जे को साबित किया है। साथ ही प्रतिवादी द्वारा उसके कब्जे में हस्तक्षेप किए जाने की बात भी साबित हुई। इसके आधार पर अदालत ने दोनों मुद्दे वादी के पक्ष में तय करते हुए मुकदमा मंजूर कर लिया। फैसला 18 अगस्त 2026 को न्यायिक अधिकारी पूजा रैना, सब जज/स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट उधमपुर ने सुनाया। अदालत ने कमल कुमार को वादी के शांतिपूर्ण कब्जे में हस्तक्षेप करने अथवा उसे जबरन बेदखल करने से रोक दिया।
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मामले के अनुसार कुंडन कौर का दावा था कि उसके ससुर सोहन सिंह ने वर्ष 1964 में संबंधित जमीन लीज पर ली थी। बाद में जमीन का 2 कनाल 12 मरला हिस्सा उसके पति अमरजीत सिंह के कब्जे में रहा। वर्ष 2007 में पति की मृत्यु के बाद कुंडन कौर ने अपने परिवार के साथ जमीन पर कब्जा जारी रहने का दावा किया।
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वहीं प्रतिवादी कमल कुमार का कहना था कि उसकी भाभी दली रानी ने संजय कुमार से 20 सितंबर 2009 को 9 मरला जमीन खरीदी थी और उस पर बने चार दुकानों पर भी अपना अधिकार जताया था।
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अदालत ने राजस्व रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों की जांच के बाद पाया कि खसरा गिरदावरी में वादी के पति अमरजीत सिंह का कब्जा दर्ज था। अदालत ने यह भी पाया कि दली रानी के बिक्री विलेख में 9 मरला जमीन की बिक्री का उल्लेख है, लेकिन चार दुकानों की बिक्री स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं थी।
अदालत ने माना कि वादी ने 2 कनाल 12 मरला जमीन, दुकानों और मकान पर अपने कब्जे को साबित किया है। साथ ही प्रतिवादी द्वारा उसके कब्जे में हस्तक्षेप किए जाने की बात भी साबित हुई। इसके आधार पर अदालत ने दोनों मुद्दे वादी के पक्ष में तय करते हुए मुकदमा मंजूर कर लिया। फैसला 18 अगस्त 2026 को न्यायिक अधिकारी पूजा रैना, सब जज/स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट उधमपुर ने सुनाया। अदालत ने कमल कुमार को वादी के शांतिपूर्ण कब्जे में हस्तक्षेप करने अथवा उसे जबरन बेदखल करने से रोक दिया।