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मन की एकाग्रता जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक : सुभाष शास्त्री
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उधमपुर। शहर के समीप चक मोड़ शिव-रैंबल गांव स्थित अखण्ड परम धाम आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक सुभाष शास्त्री ने संगत को मानसिक तप, आत्मचिंतन और धर्ममार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मन की प्रसन्नता, शांत भाव, भगवत चिंतन, इंद्रिय निग्रह, अंतःकरण की पवित्रता तथा विचारों की शुद्धि ही वास्तविक मानसिक तप है।
संत सुभाष शास्त्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति सुखी रहना चाहता है लेकिन सुख प्राप्त करने के लिए आवश्यक आचरण नहीं अपनाता। वहीं, दुख से बचना चाहता है, परंतु ऐसे कर्म करता है जो अंततः उसे दुख की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि आज भौतिक सुविधाओं, संपन्नता और विकास के बावजूद मनुष्य मानसिक रूप से अशांत और दुखी है क्योंकि उसने नीति और धर्म के सिद्धांतों से दूरी बना ली है।
उन्होंने कहा कि यदि समाज ने समय रहते धर्म और नैतिक मूल्यों का पालन नहीं किया तो इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने लोगों से मानसिक तप के सिद्धांतों को जीवन में अपनाकर अपनी दिशा और दशा सुधारने का आह्वान किया।
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संत सुभाष शास्त्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति सुखी रहना चाहता है लेकिन सुख प्राप्त करने के लिए आवश्यक आचरण नहीं अपनाता। वहीं, दुख से बचना चाहता है, परंतु ऐसे कर्म करता है जो अंततः उसे दुख की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि आज भौतिक सुविधाओं, संपन्नता और विकास के बावजूद मनुष्य मानसिक रूप से अशांत और दुखी है क्योंकि उसने नीति और धर्म के सिद्धांतों से दूरी बना ली है।
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उन्होंने कहा कि यदि समाज ने समय रहते धर्म और नैतिक मूल्यों का पालन नहीं किया तो इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने लोगों से मानसिक तप के सिद्धांतों को जीवन में अपनाकर अपनी दिशा और दशा सुधारने का आह्वान किया।
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