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जीएमसी का हाल : अल्ट्रासाउंड के लिए 15 दिन का इंतजार
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जीएमसी में अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए आए लोग अपनी बारी का इंतजार करते हुए।
- फोटो : जीएमसी में अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए आए लोग अपनी बारी का इंतजार करते हुए।
उधमपुर। कहने को जिले का मुख्य अस्पताल जीएमसी है, लेकिन अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए आज भी लोगों को 15 दिन तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।
अस्पताल में एक ही रेडियोलाॅजिस्ट होने के चलते लोगों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वैसे तो अस्पताल प्रशासन की ओर से दो अल्ट्रासाउंड मशीनें लगाई गई हैं लेकिन उसके बावजूद लोगों को मिली तारीख का इंतजार करना पड़ रहा है। जीएमसी में दो अल्ट्रासाउंड मशीनें और लगाने की जरूरत है, वहीं खाली पड़े रेडियोलाॅस्टि के पद भरने भी जरूरी हैं ताकि लोगों को आ रही परेशानी से निजात मिल सके।
रोजाना 700 के करीब मरीज पहुंचते हैं ओपीडी में
अस्पताल में रोजाना करीब 700 की ओपीडी होती है। इनमें से डाॅक्टराें की ओर से करीब 25 से 30 मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए भेजा जाता है।
अस्पताल में 100 रुपये में होता है अल्ट्रासाउंड
मरीजों को जीएमसी में 100 रुपये में अपना अल्टासाउंड करवाना होता है। वहीं 15 दिन की डेट मिलने के चलते कई मरीज प्राइवेट क्लीनिकों में जाकर 500 से एक हजार रुपये तक खर्च कर अल्ट्रासाउंड करवा रहे हैं। हालांकि जीएमसी में रेडियोलाॅजिस्ट के दो पद हैं लेकिन एक ही मौजूदा समय में अस्पताल में तैनात है।
इमरजेंसी और अस्पताल में भर्ती मरीजों को दी जाती है प्राथमिकता
यहां इमरजेंसी में अगर कोई मरीज आता है और डाॅक्टर की ओर से उसे अल्ट्रासाउंड लिखकर दिया जाता है तो उसका प्राथमिकता के तौर पर उसी समय अल्ट्रासाउंड कर दिया जाता है। दूसरी तरफ अस्पताल में भर्ती मरीज को अगर इमरजेंसी में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़े तो उसका भी अल्ट्रासाउंड कर दिया जाता है। इसके चलते रोजाना करीब 100 के करीब अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं।
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इस संदर्भ में जीएमसी के सुपरिटेंडेंट डॉ. संजीव कुमार गुप्ता का कहना था कि उन्होंने अभी बीते दिन ही चार्ज संभाला है। जल्द ही इस समस्या का भी समाधान कर दिया जाएगा।
फोटो सहित
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अस्पताल में एक ही रेडियोलाॅजिस्ट होने के चलते लोगों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वैसे तो अस्पताल प्रशासन की ओर से दो अल्ट्रासाउंड मशीनें लगाई गई हैं लेकिन उसके बावजूद लोगों को मिली तारीख का इंतजार करना पड़ रहा है। जीएमसी में दो अल्ट्रासाउंड मशीनें और लगाने की जरूरत है, वहीं खाली पड़े रेडियोलाॅस्टि के पद भरने भी जरूरी हैं ताकि लोगों को आ रही परेशानी से निजात मिल सके।
रोजाना 700 के करीब मरीज पहुंचते हैं ओपीडी में
अस्पताल में रोजाना करीब 700 की ओपीडी होती है। इनमें से डाॅक्टराें की ओर से करीब 25 से 30 मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए भेजा जाता है।
अस्पताल में 100 रुपये में होता है अल्ट्रासाउंड
मरीजों को जीएमसी में 100 रुपये में अपना अल्टासाउंड करवाना होता है। वहीं 15 दिन की डेट मिलने के चलते कई मरीज प्राइवेट क्लीनिकों में जाकर 500 से एक हजार रुपये तक खर्च कर अल्ट्रासाउंड करवा रहे हैं। हालांकि जीएमसी में रेडियोलाॅजिस्ट के दो पद हैं लेकिन एक ही मौजूदा समय में अस्पताल में तैनात है।
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इमरजेंसी और अस्पताल में भर्ती मरीजों को दी जाती है प्राथमिकता
यहां इमरजेंसी में अगर कोई मरीज आता है और डाॅक्टर की ओर से उसे अल्ट्रासाउंड लिखकर दिया जाता है तो उसका प्राथमिकता के तौर पर उसी समय अल्ट्रासाउंड कर दिया जाता है। दूसरी तरफ अस्पताल में भर्ती मरीज को अगर इमरजेंसी में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़े तो उसका भी अल्ट्रासाउंड कर दिया जाता है। इसके चलते रोजाना करीब 100 के करीब अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं।
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इस संदर्भ में जीएमसी के सुपरिटेंडेंट डॉ. संजीव कुमार गुप्ता का कहना था कि उन्होंने अभी बीते दिन ही चार्ज संभाला है। जल्द ही इस समस्या का भी समाधान कर दिया जाएगा।
फोटो सहित