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मुख्य द्वार बंद करने से दो किलोमीटर दूर हुआ जिला अस्पताल
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उधमपुर। जिला अस्तपताल का मुख्य द्वार करीब तीन महीने से बंद रहने के कारण शहरवासियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। इमरजेंसी के हालात में शहरवासियों के लिए अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो गया है। शहर को 100 मीटर की दूरी पर मौजूद जिला अस्पताल तक जाने के लिए करीब दो किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। वार्ड नंबर 13 के पार्षद ने भी मुख्य द्वार नहीं खोलने पर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ रोष प्रकट किया है।
जिला अस्पताल के प्रशासन की तरफ से करीब तीन महीने पहले अचानक ही अस्पताल के मुख्य द्वार को बंद करने का आदेश जारी किया गया। अस्पताल के लिए केवल धार रोड के किनारे पर मौजूद द्वार से रास्ता रखा गया। गेट के बंद होते ही शहरवासियों की परेशानी बढ़ गई। वहीं गेट के बंद होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने द्वार के बाहर अपनी एंबुलेंस और निजी वाहनों के लिए पार्किंग स्थल तैयार कर दिया और बाहरी हिस्से में अस्पताल आने वाले लोगों ने अपने दो पहिया वाहनों को पार्क करना शुरू कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने केवल पैदल चलने के लिए ही एक रास्ता रखा। शहर में अगर कोई बीमार होता है तो उसके लिए अस्पताल तक पहुंचने का यही एक मुख्य रास्त था, लेकिन अब इसको बंद किए जाने पर करीब दो किलोमीटर का लंबर सफर कर पहले सैला तालाब या फिर सलाथिया चौक के रास्ते धार रोड से होकर अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है।
आपात स्थिति में किसी को तुरंत अस्पताल पहुंचना अब मुश्किल हो गया है। इसको लेकर शहरवासियों ने रोष प्रकट किया है। वार्ड नंबर 13 के पार्षद राकेश खजूरिया ने बताया कि अस्पताल उनके वार्ड के अंदर आता है। जब से मुख्य द्वार को बंद किया गया है, तब से पूरा शहर परेशान हो चुका है। हर रोज शहरवासी उनके साथ संपर्क कर मुख्य द्वार को खोलने की मांग करते हैं। लेकिन अस्पताल प्रशासन अपनी जिद पर अड़ा है और गेट खोलने से साफ इंकार कर रहा है। इसको लेकर डीसी के साथ भी संपर्क किया है। लेकिन उनकी तरफ से भी कुछ नहीं किया जा रहा है। आपात स्थिति में लोगों को द्वार बंद होने के कारण बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनकी मांग है कि इसको जल्द से जल्द खोल कर शहरवासियों को राहत प्रदान की जाए।
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जिला अस्पताल के प्रशासन की तरफ से करीब तीन महीने पहले अचानक ही अस्पताल के मुख्य द्वार को बंद करने का आदेश जारी किया गया। अस्पताल के लिए केवल धार रोड के किनारे पर मौजूद द्वार से रास्ता रखा गया। गेट के बंद होते ही शहरवासियों की परेशानी बढ़ गई। वहीं गेट के बंद होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने द्वार के बाहर अपनी एंबुलेंस और निजी वाहनों के लिए पार्किंग स्थल तैयार कर दिया और बाहरी हिस्से में अस्पताल आने वाले लोगों ने अपने दो पहिया वाहनों को पार्क करना शुरू कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने केवल पैदल चलने के लिए ही एक रास्ता रखा। शहर में अगर कोई बीमार होता है तो उसके लिए अस्पताल तक पहुंचने का यही एक मुख्य रास्त था, लेकिन अब इसको बंद किए जाने पर करीब दो किलोमीटर का लंबर सफर कर पहले सैला तालाब या फिर सलाथिया चौक के रास्ते धार रोड से होकर अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है।
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आपात स्थिति में किसी को तुरंत अस्पताल पहुंचना अब मुश्किल हो गया है। इसको लेकर शहरवासियों ने रोष प्रकट किया है। वार्ड नंबर 13 के पार्षद राकेश खजूरिया ने बताया कि अस्पताल उनके वार्ड के अंदर आता है। जब से मुख्य द्वार को बंद किया गया है, तब से पूरा शहर परेशान हो चुका है। हर रोज शहरवासी उनके साथ संपर्क कर मुख्य द्वार को खोलने की मांग करते हैं। लेकिन अस्पताल प्रशासन अपनी जिद पर अड़ा है और गेट खोलने से साफ इंकार कर रहा है। इसको लेकर डीसी के साथ भी संपर्क किया है। लेकिन उनकी तरफ से भी कुछ नहीं किया जा रहा है। आपात स्थिति में लोगों को द्वार बंद होने के कारण बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनकी मांग है कि इसको जल्द से जल्द खोल कर शहरवासियों को राहत प्रदान की जाए।
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