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पारंपरिक कुड नृत्य कर भक्तों ने की कोरोना के खात्मे की कामना
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किश्तवाड़। मां मचैल के दरबार में छड़ी पहुंचने के दूसरे दिन सोमवार को धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए गए। इस दौरान पूरा क्षेत्र मां चंडी के जयकारों से गूंजता रहा। वहीं, पारंपरिक कुड नृत्य पर श्रद्धालु दिनभर थिरकते रहे।
18 अगस्त को जम्मू से निकली मचैल माता की पवित्र छड़ी रविवार देर शाम माता रानी के दरबार पहुंचने पर पुष्प वर्षा के साथ जोरदार स्वागत किया गया था। वहीं, सोमवार को विशेष उत्सव का आयोजन किया गया। इसमें कोविड एसओपी का पालन करते हुए जम्मू, डोडा और किश्तवाड़ से आए भक्तों व स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।
माता रानी की विशेष पूजा के बाद हवन कर कोरोना के खात्मे सहित देश और दुनिया में अमन और शांति की कामना की गई। दोपहर के समय पारंपरिक कुड मेले का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालु व स्थानीय लोग पारंपरिक वाद्य यंत्रों थिरकते नजर आए। इसका आयोजन देवी देवताओं के सम्मान में किया जाता है। इसमें महिलाएं जहां विशेष चमकीले पहरावे और पुरुष चूड़ीदार कपड़ों में नजर आते हैं। शाम के समय रात्रि जागरण का आयोजन हुआ। मंगलवार सुबह पूजा के बाद पवित्र छड़ी यात्रा अठोली के लिए प्रस्थान करेगी और डोडा में पहुंच कर समापन होगा।
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18 अगस्त को जम्मू से निकली मचैल माता की पवित्र छड़ी रविवार देर शाम माता रानी के दरबार पहुंचने पर पुष्प वर्षा के साथ जोरदार स्वागत किया गया था। वहीं, सोमवार को विशेष उत्सव का आयोजन किया गया। इसमें कोविड एसओपी का पालन करते हुए जम्मू, डोडा और किश्तवाड़ से आए भक्तों व स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।
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माता रानी की विशेष पूजा के बाद हवन कर कोरोना के खात्मे सहित देश और दुनिया में अमन और शांति की कामना की गई। दोपहर के समय पारंपरिक कुड मेले का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालु व स्थानीय लोग पारंपरिक वाद्य यंत्रों थिरकते नजर आए। इसका आयोजन देवी देवताओं के सम्मान में किया जाता है। इसमें महिलाएं जहां विशेष चमकीले पहरावे और पुरुष चूड़ीदार कपड़ों में नजर आते हैं। शाम के समय रात्रि जागरण का आयोजन हुआ। मंगलवार सुबह पूजा के बाद पवित्र छड़ी यात्रा अठोली के लिए प्रस्थान करेगी और डोडा में पहुंच कर समापन होगा।
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