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छात्रावास के अभाव में छात्राएं बीच में ही छोड़ रहीं पढ़ाई
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उधमपुर के पंचैरी में रमसा के तहत तैयार किया गया गर्ल्स हास्टल
- फोटो : UDHAMPUR
उधमपुर। जिले में करोड़ों की लागत से तीन छात्रावास बन चुके हैं, और चौथे का काम चल रहा है। फिर भी छात्राएं छात्रावास की सुविधा के लिए तरस रही हैं। कई छात्राएं तो 10वीं के बाद आगे की शिक्षा जारी ही नहीं रख पाईं।
उच्चतम और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों की दूरी घर कई किलोमीटर होने के कारण अक्सर ग्रामीण बालिकाओं को शिक्षा के लिए बाहर नहीं भेजते हैं। छात्रावास की सुविधा न होने पर इसी मजबूरी में कई लड़कियों को शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ती है। इसको लेकर 2010 में केंद्र सरकार ने रमसा के तहत जिले में पांच छात्रावासों को मंजूरी दी थी।
मंजूर किए छात्रावासों के लिए ब्लॉक चिनैनी, रामनगर, पंचैरी, घोरडी और डुडू को चुना गया। इनका निर्माण कार्य 2010 में ही शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन शिक्षा विभाग ऐसा कर न सका। पांच में से चिनैनी, रामनगर ओर पंचैरी के छात्रावासों के लिए 2016 में जमीन खरीदी गई, और काम शुरू हुआ। वहीं, 2017 में गढ़ सामना बंज में काम शुरू किया गया। लेकिन, घोरडी ब्लॉक में आज तक न तो भूमि खरीदी गई, और न ही काम शुरू हो पाया।
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मौजूदा समय में चिनैनी में छात्रावास की इमारत तैयार है। लेकिन, इसमें दो वर्षों से डिग्री कॉलेज चलाया जा रहा है। पंचैरी में छात्रावास की इमारत दो वर्षों पहले बन चुकी है, लेकिन आज तक इसको शिक्षा विभाग को सौंपा नहीं गया। पैसे को लेकर निर्माण एजेंसी का ठेकेदार के साथ कुछ विवाद चल रहा है। रामनगर में भी छात्रावास की इमारत तैयार है, लेकिन इसमें भी कोरोना केंद्र बना दिया गया है। वहीं, गढ़ सामना बंज में ग्राउंड फ्लोर तैयार है, और पहली मंजिल का काम चल रहा है। तीन इमारतें बनने के बाद भी छात्राओं को आज तक छात्रावास की सुविधा नहीं मिली है।
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छात्रावास में मिलनी है सौ बेड की सुविधा
प्रत्येक छात्रावास की इमारत दो मंजिला होगी, और हर एक में सौ छात्राओं के रहने की सुविधा रखी गई है। छात्रावास में 25 कमरे बनाए गए हैं, जिनमें एक कमरे में चार छात्राओं को रखा जाएगा। इसके साथ ही स्टाफ के लिए अलग से कमरे तैयार किए जा रहे हैं। एक छात्रावास पर करीब 2.80 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
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शिक्षा विभाग ने तीन इमारतों का काम पूरा कर लिया है। बची हुई इमारतों का काम भी जल्द पूरा किया जाएगा। विभाग पूरा प्रयास कर रहा है कि छात्राओं को जल्द से जल्द छात्रावास की सुविधा मिले।
- रामकुमार गुप्ता, डिप्टी सीईओ, उधमपुर
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उच्चतम और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों की दूरी घर कई किलोमीटर होने के कारण अक्सर ग्रामीण बालिकाओं को शिक्षा के लिए बाहर नहीं भेजते हैं। छात्रावास की सुविधा न होने पर इसी मजबूरी में कई लड़कियों को शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ती है। इसको लेकर 2010 में केंद्र सरकार ने रमसा के तहत जिले में पांच छात्रावासों को मंजूरी दी थी।
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मंजूर किए छात्रावासों के लिए ब्लॉक चिनैनी, रामनगर, पंचैरी, घोरडी और डुडू को चुना गया। इनका निर्माण कार्य 2010 में ही शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन शिक्षा विभाग ऐसा कर न सका। पांच में से चिनैनी, रामनगर ओर पंचैरी के छात्रावासों के लिए 2016 में जमीन खरीदी गई, और काम शुरू हुआ। वहीं, 2017 में गढ़ सामना बंज में काम शुरू किया गया। लेकिन, घोरडी ब्लॉक में आज तक न तो भूमि खरीदी गई, और न ही काम शुरू हो पाया।
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मौजूदा समय में चिनैनी में छात्रावास की इमारत तैयार है। लेकिन, इसमें दो वर्षों से डिग्री कॉलेज चलाया जा रहा है। पंचैरी में छात्रावास की इमारत दो वर्षों पहले बन चुकी है, लेकिन आज तक इसको शिक्षा विभाग को सौंपा नहीं गया। पैसे को लेकर निर्माण एजेंसी का ठेकेदार के साथ कुछ विवाद चल रहा है। रामनगर में भी छात्रावास की इमारत तैयार है, लेकिन इसमें भी कोरोना केंद्र बना दिया गया है। वहीं, गढ़ सामना बंज में ग्राउंड फ्लोर तैयार है, और पहली मंजिल का काम चल रहा है। तीन इमारतें बनने के बाद भी छात्राओं को आज तक छात्रावास की सुविधा नहीं मिली है।
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छात्रावास में मिलनी है सौ बेड की सुविधा
प्रत्येक छात्रावास की इमारत दो मंजिला होगी, और हर एक में सौ छात्राओं के रहने की सुविधा रखी गई है। छात्रावास में 25 कमरे बनाए गए हैं, जिनमें एक कमरे में चार छात्राओं को रखा जाएगा। इसके साथ ही स्टाफ के लिए अलग से कमरे तैयार किए जा रहे हैं। एक छात्रावास पर करीब 2.80 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
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शिक्षा विभाग ने तीन इमारतों का काम पूरा कर लिया है। बची हुई इमारतों का काम भी जल्द पूरा किया जाएगा। विभाग पूरा प्रयास कर रहा है कि छात्राओं को जल्द से जल्द छात्रावास की सुविधा मिले।
- रामकुमार गुप्ता, डिप्टी सीईओ, उधमपुर