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भूमि विवाद में लटक गई बायो कंपोस्ट प्लांट की योजना
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उधमपुर। शहर में गीले कचरे के निस्तारण के लिए बायो कंपोस्ट प्लांट लगाने की योजना जमीनी विवाद के कारण अधर में लटक गई है। जिस जमीन पर प्लांट लगाया जाना था, वहां कुछ लोग मालिकाना हक जताकर ठेकेदार को काम नहीं करने दे रहे हैं।
सुई इलाके में दिसंबर 2019 में प्रदेश का पहला किल वेस्ट प्लांट लगा था। इसमें हर रोज करीब चार टन सूखे कूड़े का निस्तारण किया जाता है। इस प्लांट से शहर के अंदर सफाई व्यवस्था में सुधार करने में बहुत मिल रही है। यह प्लांट अब भी काम कर रहा है। इसकी कामयाबी के बाद 2021 में नगर परिषद ने गीले कचरे के निस्तारण के लिए बायो कंपोस्ट प्लांट लगाने की योजना तैयार की।
इसके लिए करीब आठ महीने पहले 10 कनाल जमीन चिह्नित की गई जिसको डायरेक्टर लोकल बाडी ने मंजूरी दे दी। परियोजना के लिए 85 लाख रुपये मंजूर किए गए। कुछ महीने पहले चारदीवारी के लिए टेंडर जारी किया गया। लेकिन, जैसे ही ठेकेदार ने काम शुरू किया तो अचानक कुछ लोग सामने आ गए और जमीन पर अपना हक जमाने लगे। उन्होंने काम बंद करा दिया। और, अब तक काम दोबारा शुरू नहीं हो सका है।
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बायो कंपोस्ट प्लांट में गीले कचरे से तैयार की जाएगी खाद
इस बायो कंपोस्ट प्लांट में गीले कचरे से खाद तैयार की जाएगी, जिसे किसान खेती में इस्तेमाल कर सकेंगे। योजनानुसार जमीन पर बड़े-बड़े गड्ढे बनाए जाएंगे, जिनमें कचरे के साथ केमिकल डाला जाएगा। जब इसका खाद बन जाएगा तो किसान इसे खेती में इस्तेमाल कर सकेगा।
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1947 में सरकार ने कुछ लोगों को निशुल्क जमीन दी थी। जिस स्थान पर बायो कंपोस्ट प्लांट लगाया जा रहा है, उस पर कुछ लोग अपना हक जता रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि 1947 से उनके पास जमीन का मालिकाना हक है। इस विवाद को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. जोगेश्वर गुप्ता, अध्यक्ष, नगर परिषद
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सुई इलाके में दिसंबर 2019 में प्रदेश का पहला किल वेस्ट प्लांट लगा था। इसमें हर रोज करीब चार टन सूखे कूड़े का निस्तारण किया जाता है। इस प्लांट से शहर के अंदर सफाई व्यवस्था में सुधार करने में बहुत मिल रही है। यह प्लांट अब भी काम कर रहा है। इसकी कामयाबी के बाद 2021 में नगर परिषद ने गीले कचरे के निस्तारण के लिए बायो कंपोस्ट प्लांट लगाने की योजना तैयार की।
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इसके लिए करीब आठ महीने पहले 10 कनाल जमीन चिह्नित की गई जिसको डायरेक्टर लोकल बाडी ने मंजूरी दे दी। परियोजना के लिए 85 लाख रुपये मंजूर किए गए। कुछ महीने पहले चारदीवारी के लिए टेंडर जारी किया गया। लेकिन, जैसे ही ठेकेदार ने काम शुरू किया तो अचानक कुछ लोग सामने आ गए और जमीन पर अपना हक जमाने लगे। उन्होंने काम बंद करा दिया। और, अब तक काम दोबारा शुरू नहीं हो सका है।
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बायो कंपोस्ट प्लांट में गीले कचरे से तैयार की जाएगी खाद
इस बायो कंपोस्ट प्लांट में गीले कचरे से खाद तैयार की जाएगी, जिसे किसान खेती में इस्तेमाल कर सकेंगे। योजनानुसार जमीन पर बड़े-बड़े गड्ढे बनाए जाएंगे, जिनमें कचरे के साथ केमिकल डाला जाएगा। जब इसका खाद बन जाएगा तो किसान इसे खेती में इस्तेमाल कर सकेगा।
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1947 में सरकार ने कुछ लोगों को निशुल्क जमीन दी थी। जिस स्थान पर बायो कंपोस्ट प्लांट लगाया जा रहा है, उस पर कुछ लोग अपना हक जता रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि 1947 से उनके पास जमीन का मालिकाना हक है। इस विवाद को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. जोगेश्वर गुप्ता, अध्यक्ष, नगर परिषद