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सेना द्वारा अधिग्रहित की गई जमीनों का पूरा मुआवजा देने की मांग को लेकर डीसी से मिला रैंबल गांव के लोगों का शिष्टमंडल
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उधमपुर में सेना की तरफ से अधिग्रहण की गई जमीन का मुआवजा देने की मांग लेकर डीसी कार्यालय पहुंचे लो?
- फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। सेना की अधिकृत जमीनों का किराया बढ़ाने या बाजार भाव के मुताबिक पूरा मुआवजा देने की मांग को लेकर सोमवार को रैंबल क्षेत्र के ग्रामीणों ने उपायुक्त इंदु कंवल चिब से मुलाकत की।
शिष्टमंडल के सदस्यों ने कहा कि रैंबल में 70 साल से सेना ने उनकी जमीनें लीज पर ली हैं। लेकिन, अन्य राज्यों के मुकाबले उन्हें उनकी जमीनों का किराया काफी कम मिल रहा है। जिसके समाधान के लिए उन्होंने जिला प्रशासन से गुहार लगाने के साथ ही शिकायत सेल में भी एक अर्जी डाली। जिसका निपटारा करने के लिए रेवन्यू विभाग ने जमीनों के दस्तावेज तैयार कर रक्षा संपदा अधिकारी को भेज दिए। इसके बाद रक्षा संपदा अधिकारी की ओर से इस संबंध में जिला विकास आयुक्त से कुछ जानकारियां मांगी गई। लेकिन, जिला प्रशासन ने उनका अब तक कोई जबाव नहीं दिया है।
उन्होंने कहा कि छह महीनों से जिला विकास आयुक्त कार्यालय से इस मामले के निपटारे को लेकर कोई भी कारवाई नहीं की गई है। जिसके बाद सोच विचार करने के बाद लोगों ने इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। अब कोर्ट ने सरकार को निर्देश जारी कर तीन महीनों के भीतर इस मामले का निपटारा करने को कहा है। इसी सिलसिले में आज रैंबल पंचायत के लोग डीसी से मिले हैं, और उन्हें कोर्ट के आदेश की प्रति देकर अपील की है कि इस मामले में तत्काल कार्रवाई कर लोगों को उनका हक दिलवाएं।
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उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने सैन्य क्षेत्र के निर्माण के दौरान उनकी जमीन को किराये पर लिया था। तब जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू था इसलिए सेना इन जमीनों को पूरी तरह से खरीद नहीं पाई। लेकिन, अब इस अनुच्छेद के हटने के बाद उन्हें अधिकृत जमीनों के किराए को प्राप्त करने के लिए भी कई औपचारिकताओं को पूरा करना पड़ रहा है। इसलिए, बेहतर है कि सेना इन जमीनों का पूरा मुआवजा दे।
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शिष्टमंडल के सदस्यों ने कहा कि रैंबल में 70 साल से सेना ने उनकी जमीनें लीज पर ली हैं। लेकिन, अन्य राज्यों के मुकाबले उन्हें उनकी जमीनों का किराया काफी कम मिल रहा है। जिसके समाधान के लिए उन्होंने जिला प्रशासन से गुहार लगाने के साथ ही शिकायत सेल में भी एक अर्जी डाली। जिसका निपटारा करने के लिए रेवन्यू विभाग ने जमीनों के दस्तावेज तैयार कर रक्षा संपदा अधिकारी को भेज दिए। इसके बाद रक्षा संपदा अधिकारी की ओर से इस संबंध में जिला विकास आयुक्त से कुछ जानकारियां मांगी गई। लेकिन, जिला प्रशासन ने उनका अब तक कोई जबाव नहीं दिया है।
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उन्होंने कहा कि छह महीनों से जिला विकास आयुक्त कार्यालय से इस मामले के निपटारे को लेकर कोई भी कारवाई नहीं की गई है। जिसके बाद सोच विचार करने के बाद लोगों ने इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। अब कोर्ट ने सरकार को निर्देश जारी कर तीन महीनों के भीतर इस मामले का निपटारा करने को कहा है। इसी सिलसिले में आज रैंबल पंचायत के लोग डीसी से मिले हैं, और उन्हें कोर्ट के आदेश की प्रति देकर अपील की है कि इस मामले में तत्काल कार्रवाई कर लोगों को उनका हक दिलवाएं।
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उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने सैन्य क्षेत्र के निर्माण के दौरान उनकी जमीन को किराये पर लिया था। तब जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू था इसलिए सेना इन जमीनों को पूरी तरह से खरीद नहीं पाई। लेकिन, अब इस अनुच्छेद के हटने के बाद उन्हें अधिकृत जमीनों के किराए को प्राप्त करने के लिए भी कई औपचारिकताओं को पूरा करना पड़ रहा है। इसलिए, बेहतर है कि सेना इन जमीनों का पूरा मुआवजा दे।