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मलबे में से निकाले गए भाई-बहन के शव

Fri, 31 Oct 2014 12:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उधमपुर/पंचैरी
ब्यूरो/अमर उजाला, उधमपुर/पंचैरी Updated Fri, 31 Oct 2014 12:42 AM IST
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dead bodies of brother and sister removed from Debris

पंचैरी सद्दल इलाके में कई दिन खुदाई करने के बाद वीरवार को दो शवों को बाहर निकालने में कामयाबी मिली है। दोनों मृतक भाई-बहन हैं।

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डाक्टरों की टीम ने मौके पर ही शवों का पोस्टमार्टम करके परिवार के हवाले कर दिया। वहीं मलबे के नीचे दबे हुए लोगों के परिवार के सदस्यों में खुदाई के कार्य को लेकर काफी रोष है। इनका कहना है कि प्रशासन कभी काम को शुरू करता है तो कभी बंद कर देता है, जबकि दिन ब दिन उनके परिवार के सदस्यों के शव मलबे के नीचे खराब हो रहे हैं।

गौरतलब है कि करीब एक महीने से सद्दल में मलबे के नीचे दबे शवों को बाहर निकालने का काम कछुआ चाल में जेसीबी से किया जा रहा है, लेकिन अभी तक सभी शवों को बाहर निकालने में कामयाबी नहीं मिल सकी है। वीरवार को करीब 12 दिन के बाद दो शवों को बाहर निकलने में कामयाबी मिली।
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दोनों शव सतपाल सिंह (22) और मनीषा देवी (18) के हैं, जो भाई बहन हैं। शव पूरी तरह से गल चुके थे। पुलिस ने मौके पर ही डाक्टरों की टीम बुलाकर शव का पोस्टमार्टम करवाया और परिवार को सौंप दिया। शाम के समय दोनों शवों को अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। इन दोनों शवों को मिलाकर निकाले गए शवों की संख्या 29 हो गई है। अभी 11 और शवाें के मलबे में दबे होने का अंदेशा है।
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वहीं मलबे के नीचे दबे हुए लोगों के परिवार में खुदाई के कार्य को लेकर काफी रोष है। कैलाश कुमार की पत्नी व दो बच्चे, गिरधारी लाल के तीन बच्चे व पत्नी के शव अभी तक मलबे में दबे हुए हैं। दोनों हर रोज शव मिलने की उम्मीद में मौके पर पहुंच कर बैठ जाते हैं और रोज इनको निराश होकर लौटना पड़ता है।


दोनों ने बताया कि खुदाई का कार्य दिन में कई बार बंद किया जाता है। कभी जेसीबी खराब हो जाती है तो कभी तेल खत्म हो जाता है। खुदाई के कार्य को देखकर लगता ही नहीं है कि प्रशासन इसको गंभीरता से लेकर काम कर रहा है। दिन व दिन उनके परिवार के सदस्यों शव मलबे के नीचे खराब हो रहे हैं और प्रशासन को इसकी कोई चिंता नहीं है।

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