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क्षणभंगुर है मानव जीवन - महात्मा अनुरोध बाई
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उधमपुर/रामनगर। मानव उत्थान सेवा समिति रामनगर की ओर से वार्ड नंबर 8 में सत्संग आयोजित किया गया। डीडीसी सदस्य मूलराज के निवास स्थान पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सद्गुरुदेव सतपाल महाराज की शिष्या महात्मा अनुरोध बाई ने प्रवचनों से संगत को निहाल किया। उन्होंने कहा कि मानव का जीवन क्षणभंगुर है।
उन्होंने कहा कि भारत के ऋषि मुनियों ने आदिकाल से ही संसार में आत्मज्ञान, भक्ति, सेवा, प्रेम, करुणा, परहित, सहिष्णुता, क्षमा, दया आदि का प्रचार किया, ताकि सुख-दुख में भी कहीं सर्वशक्तिमान ईश्वर को न भूल जाएं, जो सभी धर्मों, जाति-वर्गों अर्थात मानवमात्र का पालनहार है।
उन्होंने बताया कि संतों की बातें ज्ञान की रोशनी देती हैं। हम सबके भीतर परमपिता परमात्मा की दिव्य ज्योति विद्यमान है, जिसके निकलते ही शरीर ठंडा पड़ जाता है। उन्होंने समझाया कि अध्यात्म ज्ञान के बोध से ही मानव के अंदर परिवर्तन होगा। कार्यक्रम के अंत में भंडारे का आयोजन किया गया।
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उन्होंने कहा कि भारत के ऋषि मुनियों ने आदिकाल से ही संसार में आत्मज्ञान, भक्ति, सेवा, प्रेम, करुणा, परहित, सहिष्णुता, क्षमा, दया आदि का प्रचार किया, ताकि सुख-दुख में भी कहीं सर्वशक्तिमान ईश्वर को न भूल जाएं, जो सभी धर्मों, जाति-वर्गों अर्थात मानवमात्र का पालनहार है।
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उन्होंने बताया कि संतों की बातें ज्ञान की रोशनी देती हैं। हम सबके भीतर परमपिता परमात्मा की दिव्य ज्योति विद्यमान है, जिसके निकलते ही शरीर ठंडा पड़ जाता है। उन्होंने समझाया कि अध्यात्म ज्ञान के बोध से ही मानव के अंदर परिवर्तन होगा। कार्यक्रम के अंत में भंडारे का आयोजन किया गया।
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