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मंदिर के कपाट खुलते ही जयकारों से गूंजा मचेल माता का दरबार
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किश्तवाड़। किश्तवाड़ जिले की पाडर तहसील में स्थित मां मचेल का दरबार फिर कपाट खुलते ही जयकारों से गूंज उठा है। शनिवार को दरबार खुलते ही सामाजिक दूरी को रखते हुए माता के दरबार परिसर में हवन का आयोजन हुआ, जिसमें एसडीएम पाडर वरुण चाढ़क व सर्व शक्ति सेवक संस्था के प्रधान नेक राम मनहास शामिल हुए। वहीं, ग्रामीणों सहित मौजूद सुरक्षा बल व एसडीएम ने मां चंडी के दर्शन किए।
गौरतलब है कि सावन माह की पहली तारीख को मचैल माता के मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं ओर 10 दिन बाद फिर मंदिर खुलता है। कोविड-19 की वजह से यात्रा रद्द कर दी गई है।
गत तीन साल से यात्रा में पड़ रहा विघ्न
गत तीन साल से कोई न कोई घटना होने से मां की वार्षिक यात्रा में विघ्न पैदा हो रहा है। 2018 में मचैल में ही स्थानीय संस्था के कुछ कार्यकर्ताओं और जम्मू व भद्रवाह के लोगों के बीच मारपीट होने से माता की छड़ी वहीं रखी गई थी, जो वापस नहीं लाई गई। 2019 उसी झगड़े के बाद यात्रा के संस्थापक ठाकुर कुलवीर सिंह के मना करने पर छड़ी मुबारक जम्मू से रवाना हुई, वह भी तब जब किश्तवाड़ सहित पूरे प्रदेश में धारा 370 और 35 ए को हटए जाने के बाद कर्फ्यू लगा हुआ था। हालांकि पांच अगस्त को जब यात्रा पर रोक लगाई गई तब तक हजारों यात्री दर्शन कर चुके थे। छड़ी के साथ कुछ ही लोग दरबार तक गए थे। इस बार भी कोरोना महामारी के चलते यात्रा को रद्द कर दिया गया है।
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हवन कर कोरोना के खात्मे की मांगी दुआ
प्रशासन और संस्था की तरफ से मंदिर परिसर में सामाजिक दूरी रखते हुए एक तो हवन किया गया। इस दौरान कोरोना महामारी के खात्मे की महामाई से दुआ मांगी गई।
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गौरतलब है कि सावन माह की पहली तारीख को मचैल माता के मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं ओर 10 दिन बाद फिर मंदिर खुलता है। कोविड-19 की वजह से यात्रा रद्द कर दी गई है।
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गत तीन साल से यात्रा में पड़ रहा विघ्न
गत तीन साल से कोई न कोई घटना होने से मां की वार्षिक यात्रा में विघ्न पैदा हो रहा है। 2018 में मचैल में ही स्थानीय संस्था के कुछ कार्यकर्ताओं और जम्मू व भद्रवाह के लोगों के बीच मारपीट होने से माता की छड़ी वहीं रखी गई थी, जो वापस नहीं लाई गई। 2019 उसी झगड़े के बाद यात्रा के संस्थापक ठाकुर कुलवीर सिंह के मना करने पर छड़ी मुबारक जम्मू से रवाना हुई, वह भी तब जब किश्तवाड़ सहित पूरे प्रदेश में धारा 370 और 35 ए को हटए जाने के बाद कर्फ्यू लगा हुआ था। हालांकि पांच अगस्त को जब यात्रा पर रोक लगाई गई तब तक हजारों यात्री दर्शन कर चुके थे। छड़ी के साथ कुछ ही लोग दरबार तक गए थे। इस बार भी कोरोना महामारी के चलते यात्रा को रद्द कर दिया गया है।
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हवन कर कोरोना के खात्मे की मांगी दुआ
प्रशासन और संस्था की तरफ से मंदिर परिसर में सामाजिक दूरी रखते हुए एक तो हवन किया गया। इस दौरान कोरोना महामारी के खात्मे की महामाई से दुआ मांगी गई।