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मन की बात में पांडुलिपि राजतरंगिणी का जिक्र प्रदेश के लिए गौरव : अनिल पाबा
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उधमपुर। अमर संतोष संग्रहालय में संरक्षित कल्हण द्वारा रचित दुर्लभ पांडुलिपि राजतरंगिणी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम में प्रमुखता से जिक्र होने के बाद जम्मू और कश्मीर को अपार गौरव दिलाया है।
इससे पहले, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के ज्ञान भारतम के तत्वावधान में आयोजित इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भी इस पांडुलिपि को प्रदर्शित किया गया था। यह पांडुलिपि ज्ञान भारतम के निदेशक इंदरजीत सिंह और परियोजना निदेशक, प्रो. (डॉ.) अनिर्बन दाश के मार्गदर्शन में जम्मू और कश्मीर के क्षेत्रीय क्लस्टर केंद्र, जम्मू डिवीजन में स्थित शाश्वत आर्ट गैलरी, संग्रहालय और पांडुलिपि पुस्तकालय के माध्यम से प्रदर्शित की गई थी। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया था। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने सुश्रुत संहिता और कल्हण राजतरंगिणी सहित प्रदर्शित अन्य पांडुलिपियों का उल्लेख करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि प्राचीन पांडुलिपियों की छवि गुणवत्ता को बढ़ाने, पाठ को मशीन-पठनीय प्रारूपों में परिवर्तित करने और एआई-संचालित अवतार को सामग्री पढ़ने में सक्षम बनाने के लिए उन्नत डिजिटल प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कैसे किया गया।
उन्होंने आगे इस बात पर बल दिया कि आधुनिक तकनीकी हस्तक्षेपों के माध्यम से इन पांडुलिपियों में संरक्षित अमूल्य भारतीय ज्ञान प्रणाली का अब विभिन्न भारतीय और अंतर राष्ट्रीय भाषाओं में अनुवाद किया जा सकता है। इससे भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत वैश्विक दर्शकों के लिए सुलभ हो जाएगी। उधमपुर स्थित अमर संतोष संग्रहालय के निदेशक अनिल पाबा ने जम्मू और देश के अन्य हिस्सों की समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इतने प्रतिष्ठित मंच पर पांडुलिपि को मिली मान्यता इस क्षेत्र और भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए समर्पित सभी विरासत प्रेमियों के लिए अपार गर्व की बात है।
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इससे पहले, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के ज्ञान भारतम के तत्वावधान में आयोजित इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भी इस पांडुलिपि को प्रदर्शित किया गया था। यह पांडुलिपि ज्ञान भारतम के निदेशक इंदरजीत सिंह और परियोजना निदेशक, प्रो. (डॉ.) अनिर्बन दाश के मार्गदर्शन में जम्मू और कश्मीर के क्षेत्रीय क्लस्टर केंद्र, जम्मू डिवीजन में स्थित शाश्वत आर्ट गैलरी, संग्रहालय और पांडुलिपि पुस्तकालय के माध्यम से प्रदर्शित की गई थी। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया था। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने सुश्रुत संहिता और कल्हण राजतरंगिणी सहित प्रदर्शित अन्य पांडुलिपियों का उल्लेख करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि प्राचीन पांडुलिपियों की छवि गुणवत्ता को बढ़ाने, पाठ को मशीन-पठनीय प्रारूपों में परिवर्तित करने और एआई-संचालित अवतार को सामग्री पढ़ने में सक्षम बनाने के लिए उन्नत डिजिटल प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कैसे किया गया।
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उन्होंने आगे इस बात पर बल दिया कि आधुनिक तकनीकी हस्तक्षेपों के माध्यम से इन पांडुलिपियों में संरक्षित अमूल्य भारतीय ज्ञान प्रणाली का अब विभिन्न भारतीय और अंतर राष्ट्रीय भाषाओं में अनुवाद किया जा सकता है। इससे भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत वैश्विक दर्शकों के लिए सुलभ हो जाएगी। उधमपुर स्थित अमर संतोष संग्रहालय के निदेशक अनिल पाबा ने जम्मू और देश के अन्य हिस्सों की समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इतने प्रतिष्ठित मंच पर पांडुलिपि को मिली मान्यता इस क्षेत्र और भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए समर्पित सभी विरासत प्रेमियों के लिए अपार गर्व की बात है।
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