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स्वच्छता सर्वेक्षण : कचरे से लबालब उधमपुर शहर पहले से पांचवें रैंक पर लुढ़का
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- नगर पालिका कटड़ा को चौथा और नगर पालिका रियासी को छठा रैंक
उधमपुर। स्वच्छता सर्वेक्षण में लगभग एक लाख आबादी वाले नगर परिषद वर्ग में उधमपुर पांचवें रैंक पर लुढ़क गया है जबकि वर्ष 2021 में उधमपुर पहले स्थान पर था। शहर के मौजूदा हालात स्वच्छता के मामले में बद से बदतर हो चुके हैं। इसके दम पर पांचवां रैंक हासिल कर पाना उधमपुर के लिए ऐतिहासिक उपलब्ध है।
बता दें कि 19 दिनों से सफाई कर्मचारियों की हड़ताल चल रही है। जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है। आम जनता गंदगी से जूझ रही है। सफाई कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर सरकार भी कोई गंभीरता नहीं दिखा रही। हालांकि सामान्य दिनों में डंपिग साइटों को भी रोज साफ किया जाता है। इसके बावजूद इन साइटों पर कचरा पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया। जिससे यह कहना गलत नहीं होगा कि स्वच्छता के मामले में उधमपुर पांचवें रैंक से भी कई पड़ाव नीचे आ गिरा है। उधर नगर पालिका कटड़ा को चौथा और नगर पालिका रियासी को छठा रैंक मिला।
उधमपुर में सफाई व्यवस्था का हाल बहुत ज्यादा अच्छा नहीं है। शहर में घर-घर से कचरा उठाने की व्यवस्था तो है वो भी कभी पैसों के लेनदेन या फिर समय सीमा पूरी हाेने के कारण लगातार प्रभावित होती रही है। कूड़ेदानों से लेकर विभिन्न स्थानों पर कचरे के ढेर देखने को मिल जाते हैं। इस वजह से शहर की तस्वीर हर समय खराब ही नजर आती है। करीब एक लाख की आबादी वाले उधमपुर शहर में प्रतिदिन लगभग 30 टन तक कचरा निकलता है। नगर परिषद ने शहर के विभिन्न वार्डो से निकलने वाले कचरे को एकत्रित करने के लिए शहर में जम्मू-श्रीनगर हाईवे, धार रोड किनारे व शहर के अंदर प्रमुख जगहों पर कचरा एकत्रित करने के प्वाइंट बनाए हैं। दशकों से इन जगहों पर कचरा फेंकने के लिए कभी बड़े तो कभी छोटे कूड़ेदान लगाए गए, मगर यह जगहें आज तक कभी भी साफ नजर नहीं आए।
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17 से बढ़कर 21 हो वार्ड हो गए
जब नगर परिषद एक टाउन एरिया कमेटी के रूप में संचालित होता था, तब इसके दस वार्ड होते थे। इसके बाद जब नगर परिषद की स्थापना हुई तो वार्डों की संख्या 17 हो गई। अब इसमें चार वार्ड और बढ़ा दिए गए। मौजूदा समय में शहर में वार्डों की संख्या 21 है। संवाद
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उधमपुर। स्वच्छता सर्वेक्षण में लगभग एक लाख आबादी वाले नगर परिषद वर्ग में उधमपुर पांचवें रैंक पर लुढ़क गया है जबकि वर्ष 2021 में उधमपुर पहले स्थान पर था। शहर के मौजूदा हालात स्वच्छता के मामले में बद से बदतर हो चुके हैं। इसके दम पर पांचवां रैंक हासिल कर पाना उधमपुर के लिए ऐतिहासिक उपलब्ध है।
बता दें कि 19 दिनों से सफाई कर्मचारियों की हड़ताल चल रही है। जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है। आम जनता गंदगी से जूझ रही है। सफाई कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर सरकार भी कोई गंभीरता नहीं दिखा रही। हालांकि सामान्य दिनों में डंपिग साइटों को भी रोज साफ किया जाता है। इसके बावजूद इन साइटों पर कचरा पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया। जिससे यह कहना गलत नहीं होगा कि स्वच्छता के मामले में उधमपुर पांचवें रैंक से भी कई पड़ाव नीचे आ गिरा है। उधर नगर पालिका कटड़ा को चौथा और नगर पालिका रियासी को छठा रैंक मिला।
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उधमपुर में सफाई व्यवस्था का हाल बहुत ज्यादा अच्छा नहीं है। शहर में घर-घर से कचरा उठाने की व्यवस्था तो है वो भी कभी पैसों के लेनदेन या फिर समय सीमा पूरी हाेने के कारण लगातार प्रभावित होती रही है। कूड़ेदानों से लेकर विभिन्न स्थानों पर कचरे के ढेर देखने को मिल जाते हैं। इस वजह से शहर की तस्वीर हर समय खराब ही नजर आती है। करीब एक लाख की आबादी वाले उधमपुर शहर में प्रतिदिन लगभग 30 टन तक कचरा निकलता है। नगर परिषद ने शहर के विभिन्न वार्डो से निकलने वाले कचरे को एकत्रित करने के लिए शहर में जम्मू-श्रीनगर हाईवे, धार रोड किनारे व शहर के अंदर प्रमुख जगहों पर कचरा एकत्रित करने के प्वाइंट बनाए हैं। दशकों से इन जगहों पर कचरा फेंकने के लिए कभी बड़े तो कभी छोटे कूड़ेदान लगाए गए, मगर यह जगहें आज तक कभी भी साफ नजर नहीं आए।
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17 से बढ़कर 21 हो वार्ड हो गए
जब नगर परिषद एक टाउन एरिया कमेटी के रूप में संचालित होता था, तब इसके दस वार्ड होते थे। इसके बाद जब नगर परिषद की स्थापना हुई तो वार्डों की संख्या 17 हो गई। अब इसमें चार वार्ड और बढ़ा दिए गए। मौजूदा समय में शहर में वार्डों की संख्या 21 है। संवाद