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जांच पूरी होने तक काम नहीं करने का फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, रामबन
Updated Mon, 04 Jan 2016 12:49 AM IST
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टनल में काम करने वाले श्रमिकों की ढलवास में स्थित बैरक में 31 दिसंबर की देर रात को दस मजदूरों के जिंदा जल जाने के सदमे से मजदूर उबर नहीं पा रहे हैं। बैरक में रहने वाले श्रमिक मौत के उस तांडव को भूल नहीं पा रहे हैं।
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सभी ने इस हादसे की न्यायिक जांच पूरी होने तक काम नहीं करने का फैसला किया है। दूसरी ओर मृतकों के परिवार वाले शवों की शिनाख्त के लिए रामबन का चक्कर लगा रहे हैं।
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बैरक में रहने वाले मजदूर तेजराम, सरफराज अहमद, शराफत अली आदि ने रविवार को कहा कि अब भी मौत का वह तांडव आंखों के सामने कौंध जाता है। अब भी बैरक में रहने वाले सभी मजदूर शोक में डूबे हुए हैं।
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इस हादसे के सदमे से इतनी जल्दी उबर पाना संभव नहीं है। अभी तक शवों की शिनाख्त नहीं हो पाई है। शवों की शिनाख्त के सिलसिले में रामबन जिले और जिले से बाहर के मृतकों के परिवार वाले यहां चक्कर कार रहे हैं।
मृतकों के परिवार वालों की हालत का अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। लिहाजा जब तक इस हादसे की न्यायिक जांच नहीं हो जाती तब तक टनल का काम शुरू नहीं किया जा सकता है।
इन लोगों ने एक बार फिर प्रबंधन की व्यवस्था को नाकाफी बताते हुए कहा कि यदि बैरक के अंदर आपात स्थिति से निपटने के पर्याप्त इंतजाम होते तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता। इस मामले की जांच बेहद जरूरी है।
बता दें कि हादसे में जिंदा जले दस मजदूरों के शवों को रामबन के कहोबाग में शुक्रवार की देर शाम को ही दफना दिया गया था। डीएनए टेस्ट के लिए शवों के सैंपल लिए जा चुके हैं।
मृतकों के परिवार वालों से उसका मिलान कर रिपोर्ट आने में करीब एक महीने का वख्त लग सकता है। ऐसे हालत में टनल का काम जल्द दोबारा शुरू होना संभव नहीं दिख रहा है।