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Udhampur News: केवल पीएम की कुर्सी को बचाने के लिए देश पर थोपा गया था आपातकाल
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भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष सोमराज खजूरिया।
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की ओर से 25 जून 1975 को जब देश पर आपातकाल थोपा गया था तो उस समय हर वर्ग के लोगों द्वारा जबरदस्त विरोध किया गया था।उधमपुर में भी विभिन्न संगठनों से जुड़े नागरिकों को जेल डाला गया था।
यह कहना है जिला भाजपा के उन नेताओं का जिन्हें आपातकाल के समय जेल में डाल दिया गया था। बुधवार को भाजपा की तरफ से आयोजित ब्लैक डे के अवसर पर आपातकाल का दंश झेलने वाले कुछ वयोवृद्ध नेताओं ने अपने विचार और अनुभव साझा किए।
कोट..
इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री की कुर्सी बचाने के लिए तथा जयप्रकाश नारायण द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन को कुचलने के लिए आपातकाल लागू किया था, जिससे लोगों के सभी मौलिक अधिकार समाप्त कर दिए गए तथा पूरे देश में दहशत का वातावरण तैयार हो गया था। लंबे समय के उपरांत देश में चुनाव कराए गए, जिसमें इंदिरा गांधी तथा उनके पार्टी को पराजय का मुंह देखना पड़ा। मैं भी आपातकाल में जेल में रहा।
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-सोमराज खजूरिया, पूर्व प्रदेश प्रदेश उपाध्यक्ष
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जब आपातकाल लगाया गया था तो प्रदेश में शेख अब्दुल्ला की सरकार थी। प्रदेश में सैकड़ो लोगों को हिरासत में ले लिया गया। उधमपुर से भी एक दर्जन से ज्यादा लोग हिरासत में रहे, इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, न्यून वेतन कर्मचारी संघ, जमात-ए-इस्लामी के सदस्य प्रमुख थे। इनमें से अधिकांश का निधन हो चुका है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की योजना के अनुसार मैंने आपातकाल का विरोध करने के लिए नगर में जुलूस निकाला था। मुझे भी हिरासत में ले लिया गया। कई महीनों तक जेल में रखा गया। इनमें लोगों में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के डॉ. हरिराम, राजेंद्र कुमार साइकिल वाले, सत्यव्रत गुप्ता, रमेश कुमार, अनिल गुप्ता आदि प्रमुख थे।
-- राकेश गुप्ता, पूर्व भाजपा जिला प्रधान
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मैं उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सक्रिय सदस्य था। आपातकाल घोषित होते ही मुझे अन्य साथियों के सहित पुलिस हिरासत में ले लिया गया। 18 महीने बाद जब आपातकाल समाप्त करने की घोषणा हुई, तो मुझे छोड़ा गया। जेल में कई साथियों के साथ पुलिस का व्यवहार ठीक नहीं था। उन्हें काफी यातनाएं दी गईं। इसका खामियाजा कांग्रेस सरकार को उस समय उठाना पड़ा और पार्टी को चुनाव में करारी हार झेलनी पड़ी थी।
-सत्यव्रत गुप्ता, पदाधिकारी, आरएसएस
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उधमपुर। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की ओर से 25 जून 1975 को जब देश पर आपातकाल थोपा गया था तो उस समय हर वर्ग के लोगों द्वारा जबरदस्त विरोध किया गया था।उधमपुर में भी विभिन्न संगठनों से जुड़े नागरिकों को जेल डाला गया था।
यह कहना है जिला भाजपा के उन नेताओं का जिन्हें आपातकाल के समय जेल में डाल दिया गया था। बुधवार को भाजपा की तरफ से आयोजित ब्लैक डे के अवसर पर आपातकाल का दंश झेलने वाले कुछ वयोवृद्ध नेताओं ने अपने विचार और अनुभव साझा किए।
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कोट..
इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री की कुर्सी बचाने के लिए तथा जयप्रकाश नारायण द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन को कुचलने के लिए आपातकाल लागू किया था, जिससे लोगों के सभी मौलिक अधिकार समाप्त कर दिए गए तथा पूरे देश में दहशत का वातावरण तैयार हो गया था। लंबे समय के उपरांत देश में चुनाव कराए गए, जिसमें इंदिरा गांधी तथा उनके पार्टी को पराजय का मुंह देखना पड़ा। मैं भी आपातकाल में जेल में रहा।
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-सोमराज खजूरिया, पूर्व प्रदेश प्रदेश उपाध्यक्ष
जब आपातकाल लगाया गया था तो प्रदेश में शेख अब्दुल्ला की सरकार थी। प्रदेश में सैकड़ो लोगों को हिरासत में ले लिया गया। उधमपुर से भी एक दर्जन से ज्यादा लोग हिरासत में रहे, इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, न्यून वेतन कर्मचारी संघ, जमात-ए-इस्लामी के सदस्य प्रमुख थे। इनमें से अधिकांश का निधन हो चुका है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की योजना के अनुसार मैंने आपातकाल का विरोध करने के लिए नगर में जुलूस निकाला था। मुझे भी हिरासत में ले लिया गया। कई महीनों तक जेल में रखा गया। इनमें लोगों में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के डॉ. हरिराम, राजेंद्र कुमार साइकिल वाले, सत्यव्रत गुप्ता, रमेश कुमार, अनिल गुप्ता आदि प्रमुख थे।
मैं उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सक्रिय सदस्य था। आपातकाल घोषित होते ही मुझे अन्य साथियों के सहित पुलिस हिरासत में ले लिया गया। 18 महीने बाद जब आपातकाल समाप्त करने की घोषणा हुई, तो मुझे छोड़ा गया। जेल में कई साथियों के साथ पुलिस का व्यवहार ठीक नहीं था। उन्हें काफी यातनाएं दी गईं। इसका खामियाजा कांग्रेस सरकार को उस समय उठाना पड़ा और पार्टी को चुनाव में करारी हार झेलनी पड़ी थी।
-सत्यव्रत गुप्ता, पदाधिकारी, आरएसएस