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भद्रवाह में जगरू मेला के तहत हुई भजन संध्या
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भद्रवाह। जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी की ओर से भद्रवाह के प्राचीन वासुकी नाग मंदिर गाठा में एक भजन संध्या हुई। इसका आयोजन आजादी का अमृत महोत्सव और भद्रवाह की नाग संस्कृति पर आधारित जागरू मेला के तहत किया गया। इसका उद्देश्य भद्रवाह की प्राचीन नाग संस्कृति से जुड़ी समृद्ध परंपराओं, इतिहास और पारंपरिक अनुष्ठानों को बढ़ावा देना था। इसमें दर्जनों नाग भक्तों के अलावा भद्रवाही कवियों, गायकों और इतिहासकारों ने भाग लिया।
इस मौके पर एडीसी भद्रवाह राकेश कुमार मुख्य अतिथि, जबकि प्रसिद्ध कवि और जेकेएएसीएल के प्रतिनिधि गुलाब सैफी ने समारोह की अध्यक्षता की। प्रसिद्ध भद्रवाही कवि और नाग इतिहासकार चंद्रकांत ने बताया कि भद्रवाह की प्रसिद्ध कैलाश यात्रा, जगरू, जात्रा और मेला पट्ट जैसे नाग त्योहारों से संबंधित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी और बाहरी दुनिया के बीच भद्रवाही नाग संस्कृति की विशिष्टता को बढ़ावा देना और इसके प्रति जागरूक करना था। जेकेएएसीएल के अतिरिक्त सचिव संजीव राणा ने कहा कि वासुकी नाग जगरू मेला की प्राचीन नाग संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पहला प्रयास है। अब से इस मेला को हर साल आयोजित किया जाएगा। इस उपलक्ष्य में कला अकादमी 13 तारीख को मेला पट्ट के दौरान एक कार्यक्रम भी आयोजित करेगी।
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इस मौके पर एडीसी भद्रवाह राकेश कुमार मुख्य अतिथि, जबकि प्रसिद्ध कवि और जेकेएएसीएल के प्रतिनिधि गुलाब सैफी ने समारोह की अध्यक्षता की। प्रसिद्ध भद्रवाही कवि और नाग इतिहासकार चंद्रकांत ने बताया कि भद्रवाह की प्रसिद्ध कैलाश यात्रा, जगरू, जात्रा और मेला पट्ट जैसे नाग त्योहारों से संबंधित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी और बाहरी दुनिया के बीच भद्रवाही नाग संस्कृति की विशिष्टता को बढ़ावा देना और इसके प्रति जागरूक करना था। जेकेएएसीएल के अतिरिक्त सचिव संजीव राणा ने कहा कि वासुकी नाग जगरू मेला की प्राचीन नाग संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पहला प्रयास है। अब से इस मेला को हर साल आयोजित किया जाएगा। इस उपलक्ष्य में कला अकादमी 13 तारीख को मेला पट्ट के दौरान एक कार्यक्रम भी आयोजित करेगी।
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