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क्या हमने भगवान कृष्ण के सिद्धांतों जीवन में धारण किया : साध्वी भारती
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डीएन पैलेस में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मौजूद श्रद्धालु।
उधमपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से डीएन पैलेस में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास साध्वी भाग्यश्री भारती ने कहा कि भगवान कृष्ण ने अपने जीवन काल में हमें कई शिक्षाएं दीं। आज हम श्रीकृष्ण के भक्त तो कहलाते हैं, लेकिन क्या उनके सिद्धांतों व शिक्षाओं को अपने जीवन में धारण किया?
भाग्यश्री भारती ने कहा कि यदि उनके सिद्धांतों को हमने धारण किया होता तो आज हमारे देश में गोमाता की स्थिति बहुत ही अच्छी होती। भारत में आज गाय की इतनी अवहेलना क्यों ? इसके पीछे एक ही कारण है कि हम गोमाता की महानता को अभी तक जान ही नहीं पाए। इसलिए आवश्यकता है अपनी गो संस्कृति को जानने की क्योंकि हमारी गो संस्कृति दुनिया की श्रेष्ठ और सबसे महान संस्कृति है। उन्होंने बताया कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से देसी गाय के संवर्धन व संरक्षण के लिए सराहनीय कदम उठाएं जा रहे हैं। कामधेनु नाम से सामाजिक प्रकल्प चलाया जा रहा है।
कंस वध प्रसंग सुनाते साध्वी ने बताया कि द्वापर युग में तो एक कंस था, जिसका वध भगवान कृष्ण ने किया। किंतु आज मन के पीछे लगे अधिकतर मानव कंस की भूमिका बड़ी सहजता से निभा रहे हैं। इस घोर कलिकाल में आज प्रत्येक व्यक्ति का मन काम, क्रोध, लोभ, मोह रूपी विकारों की आग में झुलस रहा है। इसलिए आवश्यकता है श्रीकृष्ण जैसे गुरु की, जो हमारे बुरे मन रूपी कंस को मार कर हमारे जीवन में धर्म की स्थापना कर सकें। इस दौरान स्वामी सुचेतानंद स्वामी महेश्वरानंद, स्वामी हरिदास आनंद अविनाश, विशेष तौर पर मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन श्री आरती के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने लंगर का प्रसाद ग्रहण किया।
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भाग्यश्री भारती ने कहा कि यदि उनके सिद्धांतों को हमने धारण किया होता तो आज हमारे देश में गोमाता की स्थिति बहुत ही अच्छी होती। भारत में आज गाय की इतनी अवहेलना क्यों ? इसके पीछे एक ही कारण है कि हम गोमाता की महानता को अभी तक जान ही नहीं पाए। इसलिए आवश्यकता है अपनी गो संस्कृति को जानने की क्योंकि हमारी गो संस्कृति दुनिया की श्रेष्ठ और सबसे महान संस्कृति है। उन्होंने बताया कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से देसी गाय के संवर्धन व संरक्षण के लिए सराहनीय कदम उठाएं जा रहे हैं। कामधेनु नाम से सामाजिक प्रकल्प चलाया जा रहा है।
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कंस वध प्रसंग सुनाते साध्वी ने बताया कि द्वापर युग में तो एक कंस था, जिसका वध भगवान कृष्ण ने किया। किंतु आज मन के पीछे लगे अधिकतर मानव कंस की भूमिका बड़ी सहजता से निभा रहे हैं। इस घोर कलिकाल में आज प्रत्येक व्यक्ति का मन काम, क्रोध, लोभ, मोह रूपी विकारों की आग में झुलस रहा है। इसलिए आवश्यकता है श्रीकृष्ण जैसे गुरु की, जो हमारे बुरे मन रूपी कंस को मार कर हमारे जीवन में धर्म की स्थापना कर सकें। इस दौरान स्वामी सुचेतानंद स्वामी महेश्वरानंद, स्वामी हरिदास आनंद अविनाश, विशेष तौर पर मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन श्री आरती के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने लंगर का प्रसाद ग्रहण किया।
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