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Udhampur News: बसंतगढ़ की सुनीता देवी ने कलाड़ी से लिखी आत्मनिर्भरता की गाथा
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- बेरोजगारी से लेकर कई महिलाओं को रोजगार देने का सफर किया तय
उधमपुर। तहसील बसंतगढ़ के गांव रसली ठकराई की सुनीता देवी (23) ने पारंपरिक घरेलू उत्पाद कलाड़ी को स्वरोजगार का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। उन्होंने न केवल खुद को रोजगार दिया बल्कि कई महिलाओं को भी इस काम से जोड़कर खुद के पैरों पर खड़े होने का का अवसर दिया है।
इंटरमीडिएट (12वीं) के बाद सुनीता भी अन्य युवाओं की तरह सरकारी नौकरी की तलाश में थीं। उन्होंने कई जगह आवेदन किए लेकिन सफलता नहीं मिली। ऐसे में निराश होने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुना। इसी दौरान महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ीं और सरकार की उम्मीद योजना के बारे में जानकारी मिली। इससे प्रेरित होकर उन्होंने कलाड़ी को व्यवसाय के रूप में अपनाने का निर्णय लिया।
पारंपरिक उत्पाद को बनाया कमाई का जरिया
किसान परिवार से संबंध रखने वाली सुनीता परिवार में सबसे छोटी हैं और बाकी सभी भाई-बहनों की शादी हो चुकी है। वह बताती हैं कि उनके घर में वर्षों से कलाड़ी बनाई जाती थी लेकिन बाजार और मांग की कमी के कारण केवल घर के उपयोग के लिए ही बनाया जाता था। उम्मीद योजना की मदद से उन्होंने व्यवसाय शुरू किया और आसपास की महिलाओं को भी काम से जोड़ा। धीरे-धीरे काम बढ़ता गया और आज कई महिलाएं आय अर्जित कर रही हैं।
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उम्मीद हाट से बाजार तक पहुंच
सुनीता बताती हैं कि कलाड़ी को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिल चुका है, फिर भी दूरदराज के गांवों में विपणन की समस्या बनी रहती है। सरकार द्वारा स्थापित उम्मीद हाट ने मार्केटिंग को काफी हद तक दूर कर दिया। अब उनकी बनाई कलाड़ी की मांग उधमपुर, जम्मू सहित पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों तक है।
2019 में शुरुआत
सुनीता ने 2019 में घरेलू स्वरोजगार की शुरुआत की थी। आज वह जिला स्तर से लेकर विभिन्न राज्यों में आयोजित सरकारी कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों में उत्पाद का प्रदर्शन कर चुकी हैं। उनकी मेहनत और सफलता के कारण अब उन्हें सरकारी कार्यक्रमों में सफल उद्यमी के रूप में आमंत्रित किया जाता है। उनका कहना है कि सरकार स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। यदि युवा और महिलाएं योजनाओं का सही लाभ उठाएं तो वे भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं और दूसरों को भी रोजगार दे सकते हैं।
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उधमपुर। तहसील बसंतगढ़ के गांव रसली ठकराई की सुनीता देवी (23) ने पारंपरिक घरेलू उत्पाद कलाड़ी को स्वरोजगार का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। उन्होंने न केवल खुद को रोजगार दिया बल्कि कई महिलाओं को भी इस काम से जोड़कर खुद के पैरों पर खड़े होने का का अवसर दिया है।
इंटरमीडिएट (12वीं) के बाद सुनीता भी अन्य युवाओं की तरह सरकारी नौकरी की तलाश में थीं। उन्होंने कई जगह आवेदन किए लेकिन सफलता नहीं मिली। ऐसे में निराश होने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुना। इसी दौरान महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ीं और सरकार की उम्मीद योजना के बारे में जानकारी मिली। इससे प्रेरित होकर उन्होंने कलाड़ी को व्यवसाय के रूप में अपनाने का निर्णय लिया।
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पारंपरिक उत्पाद को बनाया कमाई का जरिया
किसान परिवार से संबंध रखने वाली सुनीता परिवार में सबसे छोटी हैं और बाकी सभी भाई-बहनों की शादी हो चुकी है। वह बताती हैं कि उनके घर में वर्षों से कलाड़ी बनाई जाती थी लेकिन बाजार और मांग की कमी के कारण केवल घर के उपयोग के लिए ही बनाया जाता था। उम्मीद योजना की मदद से उन्होंने व्यवसाय शुरू किया और आसपास की महिलाओं को भी काम से जोड़ा। धीरे-धीरे काम बढ़ता गया और आज कई महिलाएं आय अर्जित कर रही हैं।
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उम्मीद हाट से बाजार तक पहुंच
सुनीता बताती हैं कि कलाड़ी को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिल चुका है, फिर भी दूरदराज के गांवों में विपणन की समस्या बनी रहती है। सरकार द्वारा स्थापित उम्मीद हाट ने मार्केटिंग को काफी हद तक दूर कर दिया। अब उनकी बनाई कलाड़ी की मांग उधमपुर, जम्मू सहित पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों तक है।
2019 में शुरुआत
सुनीता ने 2019 में घरेलू स्वरोजगार की शुरुआत की थी। आज वह जिला स्तर से लेकर विभिन्न राज्यों में आयोजित सरकारी कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों में उत्पाद का प्रदर्शन कर चुकी हैं। उनकी मेहनत और सफलता के कारण अब उन्हें सरकारी कार्यक्रमों में सफल उद्यमी के रूप में आमंत्रित किया जाता है। उनका कहना है कि सरकार स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। यदि युवा और महिलाएं योजनाओं का सही लाभ उठाएं तो वे भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं और दूसरों को भी रोजगार दे सकते हैं।