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जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य लिए जन्म में रखें अंतर
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उधमपुर। ‘इंजेक्टेबल कांट्रासेप्टिव’ विषय पर शनिवार को जिला अस्पताल में एमओ, पैरामेडिकल, एलएचवी, स्टाफ नर्सों तथा एएनएम के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें प्रतिभागियों को इंजेक्शन गर्भनिरोधक के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्घाटन सीएमओ डॉ. केसी डोगरा ने जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय रैना, डीएचओ डॉ. मोहम्मद यासीन और डीटीओ डॉ. कवि राज की उपस्थिति में किया। सीएमओ ने कहा कि इंजेक्शन के जरिए किए जाने वाले गर्भनिरोधक उपायों व तरीकों के बारे में चिकित्सा कर्मियों को बारीक जानकारी देने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया था।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का मुख्य उद्देश्य जच्चा बच्चा की मृत्यु दर कम करना है। विभाग गर्भनिरोधक के नवीनतम उपायों के प्रति लोगों को जागरूक कर है। विभाग के पास दो तरह के गर्भनिरोधक हैं। इनमें एक अस्थायी गर्भनिरोधक है और दूसरा स्थायी। उन्होंने कहा कि गर्भनिरोधक का मुख्य उद्देश्य दो बच्चों के जन्म के बीच में तीन से पांच वर्ष का अंतर रखना है, ताकि जच्चा और बच्चा स्वास्थ्य रहें।
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कार्यक्रम का उद्घाटन सीएमओ डॉ. केसी डोगरा ने जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय रैना, डीएचओ डॉ. मोहम्मद यासीन और डीटीओ डॉ. कवि राज की उपस्थिति में किया। सीएमओ ने कहा कि इंजेक्शन के जरिए किए जाने वाले गर्भनिरोधक उपायों व तरीकों के बारे में चिकित्सा कर्मियों को बारीक जानकारी देने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया था।
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उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का मुख्य उद्देश्य जच्चा बच्चा की मृत्यु दर कम करना है। विभाग गर्भनिरोधक के नवीनतम उपायों के प्रति लोगों को जागरूक कर है। विभाग के पास दो तरह के गर्भनिरोधक हैं। इनमें एक अस्थायी गर्भनिरोधक है और दूसरा स्थायी। उन्होंने कहा कि गर्भनिरोधक का मुख्य उद्देश्य दो बच्चों के जन्म के बीच में तीन से पांच वर्ष का अंतर रखना है, ताकि जच्चा और बच्चा स्वास्थ्य रहें।
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