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जल संरक्षण में उधमपुर को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
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उधमपुर। जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली जीविका परियोजना के लिए बुधवार को उपराष्ट्रपति वैंकेेया नायडू ने जिला उधमपुर को राष्ट्रीय पुरस्कार के साथ सम्मानित किया। जीविका परियोजना से छोटे और सीमांत किसानों के लिए आजीविका को बढ़ाने के लिए कृषि भूमि और पानी के संरक्षण की सुनिश्चित सिंचाई के लिए जिला उधमपुर ने एक अनूठी पहल की। किसानों को छोटे कृत्रिम तालाब तैयार करके दिए गए और इससे सिंचाई आसान हो गई।
जीविका परियोजना का काम जिला विकास आयुक्त डा. पीयूष सिंगला ने किया। इसी को लेकर डा. पीयूष सिंगला को ही यह पुरस्कार उपराष्ट्रपति की तरफ से वर्चुयल तरीके से दिया गया। सम्मान समारोह जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन विभाग की तरफ से आयोजित किया यह दूसरा राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह था। डीडीसी ने उपराष्ट्रपति को बताया कि जिला उधमपुर मुख्य रूप से कृषि प्रधान जिला है, जहां 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। जिले में एक कनाल पर किसान की आय करीब पांच हजार रुपये प्रतिवर्ष है। सिंचाई की सुविधा न होने के कारण किसानों को हर वर्ष खेती करने को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इसी को लेकर जीविका परियोजना तैयार की गई। इस परियोजना के तहत किसानों की जमीन पर एक कृत्रिम तालाब तैयार किया जाता है। इसमें बारिश के पानी को संरक्षित किया जाता है और फिर समय आने पर इस पानी को सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है। एक तालाब से कई कि सानों को सिंचाई की सुविधा मिल सकती है। डीडीसी ने जल शक्ति मंत्रालय को जिला उधमपुर को सर्वश्रेष्ठ जल संरक्षण पुरस्कार प्रदान करने पर धन्यवाद दिया और कहा कि यह पुरस्कार जिले में विकास गतिविधियों को मजबूत करने में बहुत ज्यादा मदद करेगा। जिले में काफी संख्या में तालाब तैयार कर दिए गए हैं और कुछ तालाब तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने को लेकर कृषि विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिल कर सर्वे किया जा रहा है। आने वाले इसको लेकर तेजी से काम किया जाएगा। इस मौके पर एडीडीसी अशोक कुमार, सीपीओ राजीव भूषण, डीएफओ शविता जंडियाल, एसीडी मुश्ताक चौधरी व अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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जीविका परियोजना का काम जिला विकास आयुक्त डा. पीयूष सिंगला ने किया। इसी को लेकर डा. पीयूष सिंगला को ही यह पुरस्कार उपराष्ट्रपति की तरफ से वर्चुयल तरीके से दिया गया। सम्मान समारोह जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन विभाग की तरफ से आयोजित किया यह दूसरा राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह था। डीडीसी ने उपराष्ट्रपति को बताया कि जिला उधमपुर मुख्य रूप से कृषि प्रधान जिला है, जहां 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। जिले में एक कनाल पर किसान की आय करीब पांच हजार रुपये प्रतिवर्ष है। सिंचाई की सुविधा न होने के कारण किसानों को हर वर्ष खेती करने को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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इसी को लेकर जीविका परियोजना तैयार की गई। इस परियोजना के तहत किसानों की जमीन पर एक कृत्रिम तालाब तैयार किया जाता है। इसमें बारिश के पानी को संरक्षित किया जाता है और फिर समय आने पर इस पानी को सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है। एक तालाब से कई कि सानों को सिंचाई की सुविधा मिल सकती है। डीडीसी ने जल शक्ति मंत्रालय को जिला उधमपुर को सर्वश्रेष्ठ जल संरक्षण पुरस्कार प्रदान करने पर धन्यवाद दिया और कहा कि यह पुरस्कार जिले में विकास गतिविधियों को मजबूत करने में बहुत ज्यादा मदद करेगा। जिले में काफी संख्या में तालाब तैयार कर दिए गए हैं और कुछ तालाब तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने को लेकर कृषि विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिल कर सर्वे किया जा रहा है। आने वाले इसको लेकर तेजी से काम किया जाएगा। इस मौके पर एडीडीसी अशोक कुमार, सीपीओ राजीव भूषण, डीएफओ शविता जंडियाल, एसीडी मुश्ताक चौधरी व अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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