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लंबित मांगें पूरी नहीं होने पर फूटा गुस्सा
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उधमपुर। स्थायी करने, छह वर्ष से रोका गया वेतन जारी करने व अन्य लंबित मांगें पूरी नहीं होने पर पूरा करने की मांग पूरी नहीं होने पर अस्थायी कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट गया। वीरवार को जलशक्ति विभाग के कर्मचारियों ने कार्यालय परिसर में सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
कर्मचारियों ने बताया कि मांगें पूरी नहीं होने पर आर्थिक परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। कर्मचारियों के प्रति सरकार का रवैया ठीक नहीं हैं। सरकार लगातार उनकी मांगों की उपेक्षा करती आ रही है। स्थायी कर्मचारियों को भी कई तरह की सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। अगर ऐसा ही रहा तो वह काम छोड़ हड़ताल के लिए मजबूर हो जाएंगे।
प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए जलशक्ति इंप्लाइज एंड वर्कर एसोसिएशन के जिला प्रधान एवं पैंथर्स ट्रेड यूनियन के उप प्रधान सोमनाथ ने कहा कि सरकार ने अस्थायी कर्मचारियों को छह वर्ष का वेतन का जारी नहीं किया है। इस कारण वह आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। स्थायी करने के लिए कोई योजना तैयार नहीं की जा रही है। इस उम्मीद में 15 वर्ष से अधिक समय गुजर गया है। जलशक्ति विभाग को अपनी जमीन पर प्रोजेक्ट तैयार करने की अनुमति देने वाले कर्मचारियों को भी स्थायी कर्मचारी नहीं बनाया जा रहा है। जबकि नियम अनुसार इनको सात वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद स्थायी कर्मचारी बनाया जाना था। उन्होंने बताया सरकार की तरफ से मिनिमम वेज एक्ट को भी लागू नहीं किया जा रहा है। जबकि इसको जल्द लागू किया जाना था। एसआरओ 43 के मामलों की फाइलें चीफ कार्यालय में कई वर्षों से पड़ी हैं। स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए भी कोई योजना तैयार नहीं गई है। कर्मचारियों पर दोगुना बोझ डाला गया है। अगर ऐसा ही रहा तो वह उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। इस मौके पर विजय कुमार, सूरज प्रकाश, दिनेश केसर, अमित दूबे, मक्खन चंद व जगदीश मगोत्रा आदि मौजूद रहे।
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कर्मचारियों ने बताया कि मांगें पूरी नहीं होने पर आर्थिक परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। कर्मचारियों के प्रति सरकार का रवैया ठीक नहीं हैं। सरकार लगातार उनकी मांगों की उपेक्षा करती आ रही है। स्थायी कर्मचारियों को भी कई तरह की सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। अगर ऐसा ही रहा तो वह काम छोड़ हड़ताल के लिए मजबूर हो जाएंगे।
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प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए जलशक्ति इंप्लाइज एंड वर्कर एसोसिएशन के जिला प्रधान एवं पैंथर्स ट्रेड यूनियन के उप प्रधान सोमनाथ ने कहा कि सरकार ने अस्थायी कर्मचारियों को छह वर्ष का वेतन का जारी नहीं किया है। इस कारण वह आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। स्थायी करने के लिए कोई योजना तैयार नहीं की जा रही है। इस उम्मीद में 15 वर्ष से अधिक समय गुजर गया है। जलशक्ति विभाग को अपनी जमीन पर प्रोजेक्ट तैयार करने की अनुमति देने वाले कर्मचारियों को भी स्थायी कर्मचारी नहीं बनाया जा रहा है। जबकि नियम अनुसार इनको सात वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद स्थायी कर्मचारी बनाया जाना था। उन्होंने बताया सरकार की तरफ से मिनिमम वेज एक्ट को भी लागू नहीं किया जा रहा है। जबकि इसको जल्द लागू किया जाना था। एसआरओ 43 के मामलों की फाइलें चीफ कार्यालय में कई वर्षों से पड़ी हैं। स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए भी कोई योजना तैयार नहीं गई है। कर्मचारियों पर दोगुना बोझ डाला गया है। अगर ऐसा ही रहा तो वह उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। इस मौके पर विजय कुमार, सूरज प्रकाश, दिनेश केसर, अमित दूबे, मक्खन चंद व जगदीश मगोत्रा आदि मौजूद रहे।
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