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Udhampur News: अमेरिकन अखरोट, नीदरलैंड के सेब बदलेंगे तस्वीर, चमकेगी किसानों की तकदीर

Tue, 11 Mar 2025 12:23 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर Updated Tue, 11 Mar 2025 12:23 AM IST
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American walnuts and apples from the Netherlands will change the picture and farmers' fortunes will shine
सेब के बाग का मुआयना करते अ​धिकारी। संवाद - फोटो : udhampur
जिले में चार गुना होगी अखरोट, सेब और ड्रैगन फ्रूट की पैदावार; एचडी प्रणाली से 255 कनाल भूमि पर अब तक लगाए गए 18470 पौधे
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उधमपुर। हाई डेनसिटी अमेरिकन अखरोट, नीदरलैंड का सेब और स्वदेशी ड्रैगन फ्रूट से जिले के बागवान प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान स्थापित करने जा रहे हैं।
इसका नींव पत्थर रखते हुए आगवानी विभाग के सहयोग से किसानों ने अब तक 255 कनाल पर 18470 पौधे लगाने का काम लगभग पूरा कर लिया है और इसका दायरा बढ़ाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। हाई डेनसिटी प्रणाली से तैयार होने वाले यह फल पहले के मुकाबले कम समय में अधिक पैदावार और गुणवत्ता के माध्यम से किसानों को आर्थिक रूप से काफी लाभ प्रदान करेंगे।
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बागवानी विभाग की ओर से एचडी प्रणाली के माध्यम से सेब, अखरोट और ड्रैगन फ्रूट की पैदावार को बढ़ावा दिया जा रहा है और लगातार जिले के विभिन्न किसानों को इसके साथ जोड़ा जा रहा है। हालांकि अब तक जिले में 50 से अधिक किसान जुड़ चुके हैं और आगे भी इनकी संख्या में बढ़ोतरी की संभावना है। इनमें पंचैरी, मोंगरी, बसंतगढ़, लाटी, चिनैनी, रामनगर और मजालता में किसानाें ने अपने बाग तैयार किए हैं। संवाद
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80 प्रतिशत होगी ए ग्रेड की पैदावार
सेब की बात करें 50 कनाल पर अब तक 166 प्रति कनाल के हिसाब से 8300 पौधे लगाए जा चुके हैं। वहीं सामान्य रूप से एक कनाल पर मात्र 13 से 15 पौधे लग पाते थे और उसे फलने-फूलने में 4 से 5 साल लग जाते थे, लेकिन हाई डेनसिटी पौधे एक साल में ही फल देना शुरू कर देंगे। उसमें भी ए ग्रेड फल की पैदावार 80 प्रतिशत दर्ज की जा सकेगी। जबकि सामान्य रूप से 10 प्रतिशत ए ग्रेड पैदावार हो पाती है।
सामान्य से चार गुणा अधिक पैदावार

अमेरिका के चिल्ली से इंपोर्ट किए गए अखरोट के 2450 पौधे 170 कनाल भूमि पर लगाए गए हैं। इनमें एचडी प्रणाली के माध्यम से दो साल बाद ही फल निकलना शुरू हो जाएगा, जबकि सामान्य रूप से अखरोट का एक पेड़ लगभग 5 से 10 साल बाद फल देना शुरू करता है। सेब की तरह अखरोट की भी हाई डेनसिटी प्रणाली से पैदावार में सामान्य पेड़ के मुकाबले चार गुणा पैदावार अधिक होगी।
ड्रैगन फ्रूट के 7700 पौधे लगाए
सेब और अखरोट की तरह जिले में हाई डेनसिटी ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत अब 10 किसानों को जोड़ा गया है और उधमपुर सहित मजालता में इसकी बागवानी शुरू कर दी गई। ड्रैगन फ्रूट के 35 कनाल पर 7700 पौधे लगाए गए हैं और अगले वर्ष से फल तैयार होने पर किसान इन्हें बाजार में उतार सकेंगे।
सरकार दे रही 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ
सेब के बाग के लिए एक कनाल पर 166 पौधे लगाने पर 1,9600 रुपये खर्च आता है। इसके लिए 50 प्रतिशत सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है। जबकि अखरोट के बाग क लिए एक कनाल पर 14 पौधे लगाने के लिए 20705 रुपये का खर्च आता है और ड्रैगन फ्रूट के लिए 1,8400 रुपये का खर्च आता है। दोनों के लिए सरकार की ओर से 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रधान की जाती है। इतना ही नहीं अगर कोई किसान शुरू में पूरा पूरा पैसा नहीं लगा सकता है, तो उसे विभाग की ओर से 40 प्रतिशत ऋण के रूप में आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है।
अगले वर्ष से मार्केट में बेचेंगे किसान
हाई डेनसिटी फलों के तैयार होने से जहां अखरोट, सेब और ड्रैगन फल की पैदावार में कम समय ही अधिक पैदावार से जहां किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा तो वहीं उच्च गुणवत्ता के कारण किसानों को इनके बेहतर दाम भी मिल पाएंगे। हालांकि अगले वर्ष से तीनों फलों को किसान मार्केट में उतार देंगे और प्रदेश की मंडी सहित बाहरी राज्यों में भी बेच अपनी आमदनी में इजाफा कर पाएंगे।

नहीं करना पड़ेगा लंबा इंतजार, आमदनी में होगा सुधार
एचडी फल उत्पादन का उद्देश्य फलों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के साथ किसानों की आय में बढ़ोतरी करना है। जिससे किसानों का लंबा इंतजार भी खत्म होगा और अधिक पैदावार एवं गुणवत्ता के साथ फल व्यवसाय में बेहतर पहचान स्थापित कर पाएंगे।

- बृज वल्लभ गुप्ता गुप्ता, मुख्य बागवानी अधिकारी
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