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ट्रायल के बाद शाम को बिरमा वैली पुल बहाल
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उधमपुर। करीब सप्ताह के बाद वैकल्पिक बिरमा वैली पुल का निर्माण कर वाहनों की आवाजाही को शुरू कर दिया गया। पुल के बनने के बाद शहर व ग्रामीण इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों ने राहत की सांस ली है। पुल के बनने के बाद सबसे पहले सेना ने पहले पुल पर ट्रायल के लिए वाहन चलाए और फिर शाम के समय वाहनों को चलने की अनुमति दे दी गई। पुल पर कई बड़े वाहनों की आवाजाही को बंद रखा गया है।
गौरतलब है कि करीब सप्ताह पहले तेज बारिश के दौरान पुल का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। पुल की हालत को देख कर बीआरओ ने इसको असुरक्षित घोषित कर दिया था और फिर नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। पुल के बंद होने के बाद हजारों की आबादी प्रभावित हो गई और लोगों को बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। कई वाहन तो बिरमा नाले के अंदर से होकर ही चलने लगे थे। इसी के चलते रविवार को एक बस भी बिरमा नाले के अंदर फंस गई थी। लेकिन यात्रियों के समय रहते बाहर निकलने के कारण बड़ा हादसा टल गया था। जिला प्रशासन ने वैली पुल के निर्माण के लिए सेना से मदद मांगी और सेना ने चार दिन पहले इसका काम शुरू कर दिया। सेना ने 72 घंटे में पुल को तैयार कर लिया है। सोमवार शाम को पुल को पूरी तरह से तैयार करने में कामयाबी मिली। पुल के बनने के बाद मंगलवार सुबह सेना ने ट्रायल शुरू किया। सबसे पहले सेना ने अपने बड़े वाहनों को पुल पर चलाया। कई बार ट्रायल करने के बाद शाम के समय पुल को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया।
दोपहिया, कार, मेटाडोर और सैन्य वाहन कर सकेंगे पुल का इस्तेमाल
वैकल्पिक बिरमा वैली पुल पर ट्रक, बस, जेसीबी मशीन के चलने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस पर केवल दोपहिया वाहन, कार, मेटाडोर और सैन्य वाहन ही चल सकते हैं। इसके लिए सड़क पर बोर्ड भी लगाया गया है। बिना इजाजत के बस या फिर लौड कैरियर के चलने पर कार्रवाई की जा सकती है। वैली पुल के शुरू होने पर शहरवासियों के साथ ग्रामीणों को भी राहत मिली है।
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गौरतलब है कि करीब सप्ताह पहले तेज बारिश के दौरान पुल का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। पुल की हालत को देख कर बीआरओ ने इसको असुरक्षित घोषित कर दिया था और फिर नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। पुल के बंद होने के बाद हजारों की आबादी प्रभावित हो गई और लोगों को बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। कई वाहन तो बिरमा नाले के अंदर से होकर ही चलने लगे थे। इसी के चलते रविवार को एक बस भी बिरमा नाले के अंदर फंस गई थी। लेकिन यात्रियों के समय रहते बाहर निकलने के कारण बड़ा हादसा टल गया था। जिला प्रशासन ने वैली पुल के निर्माण के लिए सेना से मदद मांगी और सेना ने चार दिन पहले इसका काम शुरू कर दिया। सेना ने 72 घंटे में पुल को तैयार कर लिया है। सोमवार शाम को पुल को पूरी तरह से तैयार करने में कामयाबी मिली। पुल के बनने के बाद मंगलवार सुबह सेना ने ट्रायल शुरू किया। सबसे पहले सेना ने अपने बड़े वाहनों को पुल पर चलाया। कई बार ट्रायल करने के बाद शाम के समय पुल को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया।
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दोपहिया, कार, मेटाडोर और सैन्य वाहन कर सकेंगे पुल का इस्तेमाल
वैकल्पिक बिरमा वैली पुल पर ट्रक, बस, जेसीबी मशीन के चलने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस पर केवल दोपहिया वाहन, कार, मेटाडोर और सैन्य वाहन ही चल सकते हैं। इसके लिए सड़क पर बोर्ड भी लगाया गया है। बिना इजाजत के बस या फिर लौड कैरियर के चलने पर कार्रवाई की जा सकती है। वैली पुल के शुरू होने पर शहरवासियों के साथ ग्रामीणों को भी राहत मिली है।
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