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मीरपुर बलिदान दिवस पर हवन
Udhampur
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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उधमपुर। उधमपुर में रहने वाले मीरपुर बिरादरी की ओर से शनिवार को 66वां बलिदान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर जगन्नाथ नगर आदर्श कालोनी स्थित वेद मंदिर में आचार्य यादवेंद्र महाराज के निर्देशन में शांति हवन यज्ञ किया गया और शहीदी स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की गई।
बता दें कि देश और धर्म की रक्षा के लिए जिला मीरपुर के लोगों ने 66 वर्ष पूर्व 24 नवंबर 1947 को हजारों की संख्या में अपने प्राणों का बलिदान दिया था। इस हवन यज्ञ व श्रद्धांजलि सभा में डा. जितेंद्र गुप्ता, डा. केसी शर्मा, धर्मवीर गुप्ता, सुरेश गुप्ता, अशोक गुप्ता, सतीश गुप्ता, सत्यव्रत गुप्ता, राकेश गुप्ता, भारत भूषण खन्ना, बलराज गुप्ता, मधु गुप्ता, सुषमा गुप्ता, प्रेमलता, रमा देवी, चंचल रानी, शोभारानी गुप्ता आदि भारी संख्या में महिलाएं और पुरुष उपस्थित रहे। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि उस दिन की यादों पर ताजा किया और शहादत पर विस्तार से जानकारी दी। बताया कि पाकिस्तान द्वारा करवाए गए कबाइली हमले का मीरपुर के लोग कई दिनों तक डटकर विरोध करते रहे। वहीं सेना आने तक कबायलियों को प्रवेश के लिए रोका गया, लेकिन सीज फायर और सरकार की गलत नीतियों के कारण उन्हें अपनी मातृभूमि मीरपुर कोटली आदि क्षेत्र को छोड़ना पड़ा। वहीं कबायलियों के हमले में हजारों लोगों ने अपना बलिदान करना पड़ा। वहीं वक्ताओं ने भारतीय संसद में पाक अधिकृत कश्मीर को वापस लेने के लिए बिल भी पास किया गया, लेकिन सरकार की ओर से कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए और न ही 66 साल बाद आज भी कोई मुआवजा देने का सेटलमेंट किया गया। इसके लिए मीरपुर के लोग संघर्ष जारी रखें हैं।
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बता दें कि देश और धर्म की रक्षा के लिए जिला मीरपुर के लोगों ने 66 वर्ष पूर्व 24 नवंबर 1947 को हजारों की संख्या में अपने प्राणों का बलिदान दिया था। इस हवन यज्ञ व श्रद्धांजलि सभा में डा. जितेंद्र गुप्ता, डा. केसी शर्मा, धर्मवीर गुप्ता, सुरेश गुप्ता, अशोक गुप्ता, सतीश गुप्ता, सत्यव्रत गुप्ता, राकेश गुप्ता, भारत भूषण खन्ना, बलराज गुप्ता, मधु गुप्ता, सुषमा गुप्ता, प्रेमलता, रमा देवी, चंचल रानी, शोभारानी गुप्ता आदि भारी संख्या में महिलाएं और पुरुष उपस्थित रहे। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि उस दिन की यादों पर ताजा किया और शहादत पर विस्तार से जानकारी दी। बताया कि पाकिस्तान द्वारा करवाए गए कबाइली हमले का मीरपुर के लोग कई दिनों तक डटकर विरोध करते रहे। वहीं सेना आने तक कबायलियों को प्रवेश के लिए रोका गया, लेकिन सीज फायर और सरकार की गलत नीतियों के कारण उन्हें अपनी मातृभूमि मीरपुर कोटली आदि क्षेत्र को छोड़ना पड़ा। वहीं कबायलियों के हमले में हजारों लोगों ने अपना बलिदान करना पड़ा। वहीं वक्ताओं ने भारतीय संसद में पाक अधिकृत कश्मीर को वापस लेने के लिए बिल भी पास किया गया, लेकिन सरकार की ओर से कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए और न ही 66 साल बाद आज भी कोई मुआवजा देने का सेटलमेंट किया गया। इसके लिए मीरपुर के लोग संघर्ष जारी रखें हैं।
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