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सात वार्षीय किशोर अपराधी नहीं
Udhampur
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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उधमपुर। तहसील लीगल सर्विस कमेटी के चेयरमैन व सब जज जतिंदर सिंह जम्वाल की देखरेख में ब्वायज सिटी हाईस्कूल लंबी गली में कानूनी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें महिलाओं व बच्चों के अधिकारों को लेकर कानूनी जानकारी दी गई।
कमेटी के तत्वावधान में आयोजित शिविर में स्टाफ और स्कूली बच्चे उपस्थित हुए। संजीत कुमार बवोरिया एवं स्वतंत्र देव कोतवाल ने बतौर मुख्यातिथि के रुप में विस्तार से जानकारी मुहैया करवाई। वहीं इस कैंप में कमेटी की ऋतु शर्मा भी उपस्थित रहीं। बच्चों को जानकारी देते हुए आरपीसी (रणवीर पैनल कोड) धारा को लेकर कहा गया कि आरपीसी की धारा 82 के तहत अगर कोई सात साल तक से कम उम्र का बच्चा कोई भी अपराध करता है तो उस बच्चे के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती है। इसी प्रकार अगर कोई भी बच्चा, जिसकी उम्र सात साल से ऊपर व बारह साल से नीचे हो और उसमें पर्याप्त समझने की शक्ति न हो तो ऐसे बच्चों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई धारा 83 आरपीसी के तहत नहीं हो सकती। वहीं भारत के सर्वोच्च न्यायालय के हुक्म के मुताबिक बताया गया कि महिला या 15 साल से छोटे बच्चों को तहकीकात के लिए थाने में नहीं बुलाया जा सकता है। पुलिस महिलाओं को बिना महिला कांस्टेबल के अरेस्ट नहीं कर सकती। धारा 294 के तहत अगर कोई भी लड़का रास्ते या पब्लिक प्लेस में लड़की को गाने गाकर या अपशब्द बोलकर तंग करता है तो उसे तीन माह तक सजा होगी।
या जुर्माना यो दोनों संभव है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर बताया गया कि कोई भी इंसान जहां महिलाएं नौकरी करती हो तो वहां पर लिंगभेद के आधार पर कोई उसे ह्रास नहीं कर सकता। अगर ऐसी शिकायत आती है तो संबंधित महिला संबंधित संस्थान या प्रतिष्ठान से तबादला भी करवा सकती है।
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कमेटी के तत्वावधान में आयोजित शिविर में स्टाफ और स्कूली बच्चे उपस्थित हुए। संजीत कुमार बवोरिया एवं स्वतंत्र देव कोतवाल ने बतौर मुख्यातिथि के रुप में विस्तार से जानकारी मुहैया करवाई। वहीं इस कैंप में कमेटी की ऋतु शर्मा भी उपस्थित रहीं। बच्चों को जानकारी देते हुए आरपीसी (रणवीर पैनल कोड) धारा को लेकर कहा गया कि आरपीसी की धारा 82 के तहत अगर कोई सात साल तक से कम उम्र का बच्चा कोई भी अपराध करता है तो उस बच्चे के खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती है। इसी प्रकार अगर कोई भी बच्चा, जिसकी उम्र सात साल से ऊपर व बारह साल से नीचे हो और उसमें पर्याप्त समझने की शक्ति न हो तो ऐसे बच्चों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई धारा 83 आरपीसी के तहत नहीं हो सकती। वहीं भारत के सर्वोच्च न्यायालय के हुक्म के मुताबिक बताया गया कि महिला या 15 साल से छोटे बच्चों को तहकीकात के लिए थाने में नहीं बुलाया जा सकता है। पुलिस महिलाओं को बिना महिला कांस्टेबल के अरेस्ट नहीं कर सकती। धारा 294 के तहत अगर कोई भी लड़का रास्ते या पब्लिक प्लेस में लड़की को गाने गाकर या अपशब्द बोलकर तंग करता है तो उसे तीन माह तक सजा होगी।
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या जुर्माना यो दोनों संभव है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर बताया गया कि कोई भी इंसान जहां महिलाएं नौकरी करती हो तो वहां पर लिंगभेद के आधार पर कोई उसे ह्रास नहीं कर सकता। अगर ऐसी शिकायत आती है तो संबंधित महिला संबंधित संस्थान या प्रतिष्ठान से तबादला भी करवा सकती है।
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