बारिश बनी बीमारी की वजह: मौसम ने बढ़ाई मुश्किले... श्रीनगर में बढ़े डायरिया और बुखार के मरीज; बरतें सावधानी
श्रीनगर में लगातार हो रही बारिश के चलते डायरिया, बुखार, टायफाइड और चर्म रोग जैसे मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। डॉक्टरों ने लोगों को स्वच्छता बनाए रखने, गीले कपड़े तुरंत बदलने और उबला हुआ पानी पीने जैसी सावधानियां बरतने की सलाह दी है।
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कश्मीर में बारिश के साथ ही मौसमी बीमारियां भी बढ़ी हैं। डायरिया, बुखार, टायफाइड और चर्म रोग के मरीज डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। श्रीनगर के मेडिकल कॉलेज में भी मौसमी बीमारियों के मरीज दोगुने हुए हैं।
पिछले एक सप्ताह से घाटी में बारिश का सिलसिला जारी है। श्रीनगर भी इससे अछूता नहीं है। यहां करीब हर रोज बारिश हो रही है। कभी दिन में तो कभी रात में। ऐसे में वर्षाजनित रोग भी बढ़े हैं। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के चिकित्साधिकारी ने बताया कि पिछले तीन दिन से डायरिया, बुखार, टायफाइड और चर्म रोग के मरीज बढ़े हैं। पहले रोज 20 से 25 मरीज आते थे, सोमवार को करीब 50 मरीज वर्षाजनित रोग के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। किसी को बुखार था तो कोई स्किन की एलर्जी परेशान था, जोकि ज्यादा समय तक भीगे कपड़े पहनने से हो जाती है।
चिकित्सकों की सलाहचिकित्सक दवा के साथ मरीजों को वर्षाजनित परेशानियों से बचने के लिए एहतियात बरतने की भी सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि व्यक्तिगत स्वच्छता रखें और कपड़े सूखे पहनें। कपड़े गीले होने पर जितनी जल्दी हो बदल लें। गीले कपड़ों और जूतों को तुरंत सुखा लें, क्योंकि गीलेपन से फंगल इन्फेक्शन और अन्य संक्रमण हो सकते हैं।
हाथों की सफाई रखें, अपने हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोएं, खासकर शौचालय का उपयोग करने के बाद और खाना खाने से पहले।केवल उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं और बाहर ठंडे पेय पदार्थों से बचें, क्योंकि बर्फ दूषित हो सकती है।
बाहर के स्ट्रीट फूड और खुले फल या सब्जियों से बचें। सुनिश्चित करें कि आप जो कुछ भी खाते हैं वह अच्छी तरह से पका हो। मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली बनाए रखने के लिए संतुलित आहार लें। तुलसी, अदरक, हल्दी और आंवला जैसे खाद्य पदार्थ इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं।
बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट का इस्तेमाल करें और कपड़े पहनें जो त्वचा को ढंकते हों। अपने घर और आस-पास के वातावरण को साफ-सुथरा रखें, खासकर पानी जमा होने वाली जगहों को, क्योंकि यह मच्छरों को पनपने देता है।