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J&K: कश्मीर में आतंक की कमर टूटी, खोई कमान को बहाल करने के लिए पाक ने बदली रणनीति
Sun, 06 Nov 2022 09:58 AM IST
विमल शर्मा
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Published by: विमल शर्मा
Updated Sun, 06 Nov 2022 09:58 AM IST
सार
आतंकी संगठनों की लीडरशिप के खात्मे के बाद लोकल कैडर नहीं मिलने पर पाकिस्तान ने रणनीति बदल दी है। इसके तहत ज्यादा से ज्यादा पाकिस्तानी आतंकियों को इस पार धकेलने की कोशिश की जा रही है।
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सुरक्षाबल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में अमन शांति को भंग करने के लिए पाकिस्तान दशकों से अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। इस वर्ष आतंकवादी विरोधी ऑपरेशनों में आतंकी संगठनों की लीडरशिप के खात्मे के बाद लोकल कैडर नहीं मिलने पर पाकिस्तान ने रणनीति बदल दी है। इसके तहत ज्यादा से ज्यादा पाकिस्तानी आतंकियों को इस पार धकेलने की कोशिश की जा रही है। इसका मकसद लीडरलेस आतंकी संगठनों की कमान एक बार फिर अपने हाथों में लेना चाहता है। लेकिन जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों विफल करने के लिए तैयार है।
कश्मीर जोन पुलिस के अनुसार वर्ष 2022 में अभी तक 165 से अधिक आतंकियों को ढेर किया गया है, जिनमें 40 से अधिक पाकिस्तानी आतंकवादी थे। आतंकियों की अधिकतर लीडरशिप का खात्मा कर दिया है। इस कारण उनके पास कमान संभालने के लिए अधिक विकल्प नहीं हैं। अब पाकिस्तान में बैठे आतंकी आका लीडरलेस ग्रुप पर दोबारा से पकड़ बनाने की फिराक में हैं। इतना ही नहीं, उनके पास स्थानीय कैडर की भी कमी है। जो स्थानीय युवा आतंकवाद में शामिल हो रहे हैं, ट्रेनिंग के अभाव में उनकी ‘शेल्फ लाइफ’ बहुत कम है।
डीजीपी बोले, नौजवानों को गुमराह करने वालों पर फोकस
डीजीपी दिलबाग सिंह के अनुसार ज्यादातर आतंकी तंजीमें जो कश्मीर में ऑपरेट कर रही थीं, उनका स्ट्रक्चर काफी हद तक नष्ट हो चुका है। लीडरशिप बहुत हद तक खत्म हो चुकी है। पाकिस्तानी एजेंसियों खासकर लश्कर और जैश की कोशिश है कि आतंकियों की कमांड उनके ही हाथों में रहे ताकि वह उनके इशारों पर दहशत फैला सकें। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि विदेशी दहशतगर्द जो यहां के नौजवानों को बरगलाते हैं और अमन-शांति में खलल डालते हैं उनपर फोकस करें।
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कश्मीर जोन पुलिस के अनुसार वर्ष 2022 में अभी तक 165 से अधिक आतंकियों को ढेर किया गया है, जिनमें 40 से अधिक पाकिस्तानी आतंकवादी थे। आतंकियों की अधिकतर लीडरशिप का खात्मा कर दिया है। इस कारण उनके पास कमान संभालने के लिए अधिक विकल्प नहीं हैं। अब पाकिस्तान में बैठे आतंकी आका लीडरलेस ग्रुप पर दोबारा से पकड़ बनाने की फिराक में हैं। इतना ही नहीं, उनके पास स्थानीय कैडर की भी कमी है। जो स्थानीय युवा आतंकवाद में शामिल हो रहे हैं, ट्रेनिंग के अभाव में उनकी ‘शेल्फ लाइफ’ बहुत कम है।
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डीजीपी बोले, नौजवानों को गुमराह करने वालों पर फोकस
डीजीपी दिलबाग सिंह के अनुसार ज्यादातर आतंकी तंजीमें जो कश्मीर में ऑपरेट कर रही थीं, उनका स्ट्रक्चर काफी हद तक नष्ट हो चुका है। लीडरशिप बहुत हद तक खत्म हो चुकी है। पाकिस्तानी एजेंसियों खासकर लश्कर और जैश की कोशिश है कि आतंकियों की कमांड उनके ही हाथों में रहे ताकि वह उनके इशारों पर दहशत फैला सकें। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि विदेशी दहशतगर्द जो यहां के नौजवानों को बरगलाते हैं और अमन-शांति में खलल डालते हैं उनपर फोकस करें।
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