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Srinagar News: स्कॉस्ट ने स्क्रीन को बनाया कॉपी, कराएगा डिजिटल हस्तलिखित परीक्षा
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-आंखों की बायोमेट्रिक आईडी से खुलेगा प्रश्नपत्र, एआई संचालित हस्तलिखित मूल्यांकन पद्धति से मिलेंगे नंबर
अजीम यूसुफ
श्रीनगर। शालीमार स्थित शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी ऑफ कश्मीर (स्कॉस्ट-के) ने पर्यावरण की रक्षा करते हुए परीक्षाओं के आधुनिकीकरण की पहल की है। 19 फरवरी से होने वाली स्कॉस्ट-के की परीक्षाएं डिजिटल बोर्ड पर होंगी। इसमें स्क्रीन का इस्तेमाल कॉपी की तरह किया गया है। आंखों की बायोमैट्रिक आईडी से प्रश्नपत्र खुलेगा। स्क्रीन पर ही विशेष पैन से परीक्षार्थी उत्तर लिखेंगे। एआई संचालित हस्तलिखित मूल्यांकन पद्धति से नंबर दिए जाएंगे।
इस नवाचार के विचार पर स्कॉस्ट-के के वाइस चांसलर प्रो. नजीर अहमद गनई ने अमर उजाला को बताया कि एक परीक्षा में करीब 40 पेज का उपयोग होता है। वह 10 परीक्षाएं देता है। ऐसे में हर परीक्षार्थी पर करीब 400 पेज खर्च होते हैं। पूरी परीक्षा में सैकड़ों परीक्षार्थियों के लिए हजारों पेज खर्च होते थे। इनके लिए सैकड़ों पेड़ों काटे जाते थे। लकड़ी से कागज बनाने की प्रक्रिया में भी मशीनों और केमिकल का प्रयोग होता था। बच्चों की परीक्षाएं पर्यावरण के लिए इतनी भारी न पड़ें, इसलिए परीक्षा को डिजिटल बनाया गया।
डिजिटल का मतलब अब सिर्फ ऑनलाइन फॉर्म फिलिंग नहीं है। यहां डिजिटल तकनीक का उपयोग हस्तलेख को लिखने और समझने के लिए किया गया है। एआई की मदद से सॉफ्टवेयर हस्तलेखन को समझेगा और मूल्यांकन करेगा। 19 फरवरी को होने वाली स्कॉस्ट-के की परीक्षाओं से पहले इसका सफल ट्रायल पूरा हो चुका है।
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पेपर लीक होने पर लगाम
यह डिजिटल परीक्षा पर्यावरण की सुरक्षा के साथ पेपर लीक पर भी लगाम लगाएगी। वीसी ने बताया कि छपने वाला पेपर प्रिंटिंग प्रेस के अलावा कई हाथों से होकर गुजरता है। ऐसे में पेपर लीक की आशंका बढ़ जाती है। डिजिटल प्रश्नपत्र में इसकी आशंका न के बराबर है। प्रश्नपत्र शिक्षकों की टीम मशीन पर सेट करती है और यह सिर्फ परीक्षार्थी की आंखों की बायोमैट्रिक आईडी से खुलता है। कोई और इसे नहीं खोल सकता। सभी विद्यार्थियों का बायोमैट्रिक डाटा पहले ही जमा कर लिया गया है।
तेज और सटीक परीक्षा फल
परीक्षा के बाद एआई-संचालित हस्तलिखित मूल्यांकन पद्धति से नंबर दिए जाएंगे। इसे परीक्षक भी जांचेंगे। खराब हैंडराइटिंग के कारण उत्तर न समझ आने की समस्या भी नहीं आएगी। डिजिटल होने के कारण दो से तीन दिन में ही परीक्षा फल घोषित किया जा सकेगा। किसी विवाद की दशा में डिजिटल होने के कारण उसे तुरंत जांचा जा सकेगा। परीक्षा में पूरी तरह पारदर्शिता आएगी।
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अजीम यूसुफ
श्रीनगर। शालीमार स्थित शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी ऑफ कश्मीर (स्कॉस्ट-के) ने पर्यावरण की रक्षा करते हुए परीक्षाओं के आधुनिकीकरण की पहल की है। 19 फरवरी से होने वाली स्कॉस्ट-के की परीक्षाएं डिजिटल बोर्ड पर होंगी। इसमें स्क्रीन का इस्तेमाल कॉपी की तरह किया गया है। आंखों की बायोमैट्रिक आईडी से प्रश्नपत्र खुलेगा। स्क्रीन पर ही विशेष पैन से परीक्षार्थी उत्तर लिखेंगे। एआई संचालित हस्तलिखित मूल्यांकन पद्धति से नंबर दिए जाएंगे।
इस नवाचार के विचार पर स्कॉस्ट-के के वाइस चांसलर प्रो. नजीर अहमद गनई ने अमर उजाला को बताया कि एक परीक्षा में करीब 40 पेज का उपयोग होता है। वह 10 परीक्षाएं देता है। ऐसे में हर परीक्षार्थी पर करीब 400 पेज खर्च होते हैं। पूरी परीक्षा में सैकड़ों परीक्षार्थियों के लिए हजारों पेज खर्च होते थे। इनके लिए सैकड़ों पेड़ों काटे जाते थे। लकड़ी से कागज बनाने की प्रक्रिया में भी मशीनों और केमिकल का प्रयोग होता था। बच्चों की परीक्षाएं पर्यावरण के लिए इतनी भारी न पड़ें, इसलिए परीक्षा को डिजिटल बनाया गया।
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डिजिटल का मतलब अब सिर्फ ऑनलाइन फॉर्म फिलिंग नहीं है। यहां डिजिटल तकनीक का उपयोग हस्तलेख को लिखने और समझने के लिए किया गया है। एआई की मदद से सॉफ्टवेयर हस्तलेखन को समझेगा और मूल्यांकन करेगा। 19 फरवरी को होने वाली स्कॉस्ट-के की परीक्षाओं से पहले इसका सफल ट्रायल पूरा हो चुका है।
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पेपर लीक होने पर लगाम
यह डिजिटल परीक्षा पर्यावरण की सुरक्षा के साथ पेपर लीक पर भी लगाम लगाएगी। वीसी ने बताया कि छपने वाला पेपर प्रिंटिंग प्रेस के अलावा कई हाथों से होकर गुजरता है। ऐसे में पेपर लीक की आशंका बढ़ जाती है। डिजिटल प्रश्नपत्र में इसकी आशंका न के बराबर है। प्रश्नपत्र शिक्षकों की टीम मशीन पर सेट करती है और यह सिर्फ परीक्षार्थी की आंखों की बायोमैट्रिक आईडी से खुलता है। कोई और इसे नहीं खोल सकता। सभी विद्यार्थियों का बायोमैट्रिक डाटा पहले ही जमा कर लिया गया है।
तेज और सटीक परीक्षा फल
परीक्षा के बाद एआई-संचालित हस्तलिखित मूल्यांकन पद्धति से नंबर दिए जाएंगे। इसे परीक्षक भी जांचेंगे। खराब हैंडराइटिंग के कारण उत्तर न समझ आने की समस्या भी नहीं आएगी। डिजिटल होने के कारण दो से तीन दिन में ही परीक्षा फल घोषित किया जा सकेगा। किसी विवाद की दशा में डिजिटल होने के कारण उसे तुरंत जांचा जा सकेगा। परीक्षा में पूरी तरह पारदर्शिता आएगी।