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Srinagar News: जर्जर बिजली व्यवस्था में क्यों थोपे जा रहे स्मार्ट मीटर
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- शाेपियां के वाची इलाके के लोगों ने उठाए सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
शोपियां। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के वाची इलाके के लोगों ने स्मार्ट बिजली मीटर लगाने के काम पर कड़ा एतराज जताया है। उनका कहना है कि दशकों पुराना और जानलेवा बिजली ढांचा सुधारने में सरकार नाकाम रही है, फिर भी महंगे स्मार्ट मीटर जबरन थोपे जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी पूरे इलाके में मीटर लगाने की जल्दबाजी दिखा रहे हैं लेकिन लकड़ी के खंभे, पुराने तार और जर्जर ट्रांसमिशन लाइनें आज भी वैसी की वैसी हैं। एक स्थानीय निवासी गुलाम रसूल ने कहा कि हमें स्मार्ट मीटर से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन जब यहां लकड़ी के खंभे हैं और तार कभी भी टूट सकते हैं तो महंगे मीटर लगाने का क्या तुक है। पहले ढांचा मजबूत करो, फिर मीटर की बात करो।
एक अन्य निवासी अब्दुल मजीद ने अपने घर के बाहर झुके हुए लकड़ी के खंभे की ओर इशारा करते हुए कहा, यह खंभा सालों से इसी हाल में है। हर सर्दी में डर लगता है कि कहीं गिर न जाए। सरकार के पास स्मार्ट मीटर के लिए पैसे हैं तो मजबूत खंभे और अच्छे तारों के लिए क्यों नहीं।
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लोगों ने बताया कि खराब मौसम में घटिया ट्रांसमिशन लाइनें बार-बार खराब हो जाती हैं और गांव अंधेरे में डूब जाता है। स्थानीय महिला मिसरा बानो ने कहा, स्मार्ट मीटर से बिजली ट्रिप होना तो बंद नहीं हो जाएगा। हमें पहले स्थिर बिजली चाहिए फिर मीटर जो ज्यादा सटीक बिल बनाए।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने बिजली विकास विभाग (पीडीडी) से बार-बार लकड़ी के खंभे बदलने और खराब तारों की मरम्मत की गुहार लगाई लेकिन उनकी एक न सुनी गई। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि मीटर लगाने से पहले बुनियादी ढांचे की खामियों को दूर किया जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शोपियां। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के वाची इलाके के लोगों ने स्मार्ट बिजली मीटर लगाने के काम पर कड़ा एतराज जताया है। उनका कहना है कि दशकों पुराना और जानलेवा बिजली ढांचा सुधारने में सरकार नाकाम रही है, फिर भी महंगे स्मार्ट मीटर जबरन थोपे जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी पूरे इलाके में मीटर लगाने की जल्दबाजी दिखा रहे हैं लेकिन लकड़ी के खंभे, पुराने तार और जर्जर ट्रांसमिशन लाइनें आज भी वैसी की वैसी हैं। एक स्थानीय निवासी गुलाम रसूल ने कहा कि हमें स्मार्ट मीटर से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन जब यहां लकड़ी के खंभे हैं और तार कभी भी टूट सकते हैं तो महंगे मीटर लगाने का क्या तुक है। पहले ढांचा मजबूत करो, फिर मीटर की बात करो।
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एक अन्य निवासी अब्दुल मजीद ने अपने घर के बाहर झुके हुए लकड़ी के खंभे की ओर इशारा करते हुए कहा, यह खंभा सालों से इसी हाल में है। हर सर्दी में डर लगता है कि कहीं गिर न जाए। सरकार के पास स्मार्ट मीटर के लिए पैसे हैं तो मजबूत खंभे और अच्छे तारों के लिए क्यों नहीं।
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लोगों ने बताया कि खराब मौसम में घटिया ट्रांसमिशन लाइनें बार-बार खराब हो जाती हैं और गांव अंधेरे में डूब जाता है। स्थानीय महिला मिसरा बानो ने कहा, स्मार्ट मीटर से बिजली ट्रिप होना तो बंद नहीं हो जाएगा। हमें पहले स्थिर बिजली चाहिए फिर मीटर जो ज्यादा सटीक बिल बनाए।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने बिजली विकास विभाग (पीडीडी) से बार-बार लकड़ी के खंभे बदलने और खराब तारों की मरम्मत की गुहार लगाई लेकिन उनकी एक न सुनी गई। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि मीटर लगाने से पहले बुनियादी ढांचे की खामियों को दूर किया जाए।