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Srinagar: हजरतबल में राष्ट्रीय प्रतीक तोड़ने पर सियासी उबाल... FIR, यहां पढ़िए क्यों हो रहा है राजनीतिक बवाल

Sun, 07 Sep 2025 03:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 07 Sep 2025 03:42 AM IST
सार

जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में हजरतबल दरगाह में शिलापट्ट पर अंकित राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक चिह्न) को नष्ट करने के मामले में पुलिस ने शनिवार को एफआईआर दर्ज कर ली।

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Srinagar: Political uproar over breaking of national symbol in Hazratbal... FIR
शिलापट्ट में टूटा अशोक स्तंभ (घेरे में)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में हजरतबल दरगाह में शिलापट्ट पर अंकित राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक चिह्न) को नष्ट करने के मामले में पुलिस ने शनिवार को एफआईआर दर्ज कर ली। इसके बाद पूरे कश्मीर सियासत उबाल पर पहुंच गई। 

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 मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दरगाह में इस शिलापट्ट पर ही सवाल खड़े कर दिए और कहा कि प्रतीक चिह्न सरकारी कार्यालयों में लगाए जाने चाहिए न कि धार्मिक स्थलों पर। पीडीपी समेत अन्य कश्मीर केंद्रित दल खुलकर तोड़ने वालों के समर्थन में खड़े हो गए। इस बीच, भाजपा ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि वह राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी।
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जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक हजरतबल में शुक्रवार को राष्ट्रीय प्रतीक को नुकसान पहुंचाया गया था। इस संबंध में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान, शांति भंग करने, दंगा और आपराधिक साजिश रचने के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर संख्या 76/2025 दर्ज की गई है। 
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इसलिए शुरू हुआ विवाद
तीन सितंबर को हजरतबल दरगाह परिसर का सौंदर्यीकरण पूरा होने के बाद यहां एक शिलापट्ट लगाया गया था। इसके एक कोने की ओर राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न अंकित था। इसका उद्घाटन जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष दरख्शां अंद्राबी ने किया था। पांच सितंबर को जुमे की नमाज के लिए बड़ी संख्या में लोग दरगाह में इकट्ठा हुए थे। कुछ लोगों ने प्रतीक चिह्न पर पत्थरों से हमला करना शुरू कर दिया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ है। वीडियो में लोगों की भीड़ नारे तकबीर अल्लाहु अकबर के नारे लगाती नजर आती है। यहां क्या चलेगा निजामे मुस्तफा के भी नारे भी लगे। इसके बाद सियासी माहौल गरमा गया।

आखिर इसे लगाने की मजबूरी क्या थी : उमर
सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल सिर्फ सरकारी आयोजनों में होता है। मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारों में इस तरह से प्रतीक का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। मैंने कभी किसी भी मजहबी परिसर या समारोह में इस तरह के प्रतीक का इस्तेमाल होते नहीं देखा है। आखिर इसे लगाने की मजबूरी क्या थी? काम करके दिखाना जरूरी नहीं, अच्छे काम खुद लोगों की नजर में आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि हजरतबल दरगाह के लिए मेरे दादा शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने भी खूब काम किए लेकिन उन्होंने कभी कोई पत्थर नहीं लगवाया। डा. अंद्राबी की पीएसए लगाने की बात पर उमर ने कहा कि लोगों के जज्बातों से खिलवाड़ करने वाले माफी मांगें।

सख्त कार्रवाई होगी
दरख्शां...वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने कहा कि राष्ट्रविरोधी तत्व फिर से सिर उठा रहे हैं। तोड़फोड़ करने वाले नेशनल कॉन्फ्रेंस के गुंडे थे और आज भी हैं। सख्त कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में नेकां के विधायक तनवीर सादिक और उनके समर्थक शामिल हैं। इन्हीं लोगों ने राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को क्षतिग्रस्त किया है। उसे हटाया है। इन लोगों पर कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है।


महबूबा ने वक्फ बोर्ड को तुरंत भंग करने की मांग की
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह लगाने को ईशनिंदा का कृत्य बताया। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड को तुरंत भंग करें। मुख्यमंत्री को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
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