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Srinagar News: कस्टोडियल टॉर्चर मामले में पुलिस को बड़ी राहत
Tue, 09 Dec 2025 01:31 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर
Updated Tue, 09 Dec 2025 01:31 AM IST
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने शहर की एक अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें जुलाई 2022 में 25 साल के एक युवक की कथित हिरासत में मौत के मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआई दर्ज कर ईओडब्ल्यू से जांच करने का निर्देश दिया गया था।
जस्टिस संजय धर की एकल पीठ ने ईओडब्ल्यू कश्मीर के सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस की याचिका मंजूर करते हुए निचली अदालत के आदेश निरस्त कर दिया और मामले को ताजा आदेश पारित करने के लिए मजिस्ट्रेट के पास वापस भेज दिया।
एसएसपी ने याचिका में तर्क दिया था कि आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को मृतक की मां के उस आरोप की जांच करने का कोई क्षेत्राधिकार नहीं है जिसमें उनके बेटे को पुलिस स्टेशन नौगाम में टॉर्चर करके मार डाला गया। उनका कहना था कि ऐसे अपराध उस नियम के दायरे से बाहर हैं, जो ईओडब्ल्यू की शक्तियों को केवल विशिष्ट आर्थिक अपराधों तक सीमित करता है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि नोटिफिकेशन एसओ 232 के तहत ईओडब्ल्यू श्रीनगर को पुलिस स्टेशन का दर्जा दिया गया है और वहां तैनात एसपी को एसएचओ के अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन इस नोटिफिकेशन के परिशिष्ट में केवल कुछ खास आर्थिक अपराधों की सूची दी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया, हिरासत में यातना और हत्या से जुड़ा अपराध उस सूची में कहीं नहीं है। इसलिए कस्टोडियल टॉर्चर का मामला ईओडब्ल्यू श्रीनगर के पंजीकरण और जांच के दायरे में नहीं आता।
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अदालत ने कहा कि मृतक की मां की शिकायत में पुलिस द्वारा हिरासत में यातना देकर हत्या करने का गंभीर आरोप है। ट्रायल मजिस्ट्रेट को ईओडब्ल्यू को एफआईआर दर्ज कर जांच करने का निर्देश देने का कोई अधिकार नहीं था। हाईकोर्ट ने सिटी जज (ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी) श्रीनगर के आदेश को रद्द कर दिया।
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जस्टिस संजय धर की एकल पीठ ने ईओडब्ल्यू कश्मीर के सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस की याचिका मंजूर करते हुए निचली अदालत के आदेश निरस्त कर दिया और मामले को ताजा आदेश पारित करने के लिए मजिस्ट्रेट के पास वापस भेज दिया।
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एसएसपी ने याचिका में तर्क दिया था कि आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को मृतक की मां के उस आरोप की जांच करने का कोई क्षेत्राधिकार नहीं है जिसमें उनके बेटे को पुलिस स्टेशन नौगाम में टॉर्चर करके मार डाला गया। उनका कहना था कि ऐसे अपराध उस नियम के दायरे से बाहर हैं, जो ईओडब्ल्यू की शक्तियों को केवल विशिष्ट आर्थिक अपराधों तक सीमित करता है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि नोटिफिकेशन एसओ 232 के तहत ईओडब्ल्यू श्रीनगर को पुलिस स्टेशन का दर्जा दिया गया है और वहां तैनात एसपी को एसएचओ के अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन इस नोटिफिकेशन के परिशिष्ट में केवल कुछ खास आर्थिक अपराधों की सूची दी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया, हिरासत में यातना और हत्या से जुड़ा अपराध उस सूची में कहीं नहीं है। इसलिए कस्टोडियल टॉर्चर का मामला ईओडब्ल्यू श्रीनगर के पंजीकरण और जांच के दायरे में नहीं आता।
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अदालत ने कहा कि मृतक की मां की शिकायत में पुलिस द्वारा हिरासत में यातना देकर हत्या करने का गंभीर आरोप है। ट्रायल मजिस्ट्रेट को ईओडब्ल्यू को एफआईआर दर्ज कर जांच करने का निर्देश देने का कोई अधिकार नहीं था। हाईकोर्ट ने सिटी जज (ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी) श्रीनगर के आदेश को रद्द कर दिया।