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Srinagar News: नई भर्ती अधिसूचनाओं से ओपन मेरिट छात्रों में चिंता बढ़ी, छात्र संगठन एलजी से मिलेंगे

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Srinagar, New Recruitment, Open Merit, Students Will Meet LG
अनंतनाग और बारामुला के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 10 सहायक प्रोफेसर पदों के हालिया विज्ञापन की हुई आलोचना
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अमृतपाल सिंह बाली
श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक बहस का केंद्र बन गया हैजिससे ओपन मेरिट छात्रों, उम्मीदवारों और पेशेवर समूहों में चिंता बढ़ गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) नेतृत्व वाली सरकार का कहना है कि उसने आरक्षण संशोधन में अपना काम पूरा कर लिया है और मंत्रिपरिषद ने प्रस्ताव को मंजूरी देकर अंतिम स्वीकृति के लिए उपराज्यपाल को भेज दिया है।

जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग (जेकेपीएससी) और जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड (जेकेएसएसबी) द्वारा जारी कई नई भर्ती अधिसूचनाओं के बाद यह विवाद और गहरा गया है। विशेष रूप से जेकेपीएससी द्वारा अनंतनाग और बारामुला के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 10 सहायक प्रोफेसर पदों के हालिया विज्ञापन की आलोचना हुई है, क्योंकि ओपन मेरिट उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने के बावजूद इस श्रेणी के तहत केवल दो पद आवंटित किए गए हैं।
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ओपन मेरिट छात्र समूहों का तर्क है कि इन भर्तियों के समय ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है क्योंकि आरक्षण नीति के युक्तिकरण से संबंधित किए गए वादे का अभी भी इंतजार है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद से ओपन मेरिट छात्रों, पेशेवर निकायों और विपक्षी पार्टियों ने बार-बार चिंता जताई है कि कोई भी नीतिगत सुधार लागू होने से पहले चल रही भर्तियों से उपलब्ध पद समाप्त हो रहे हैं।
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ओपन मेरिट विद्वानों के प्रतिनिधि मीर मुजीब ने सवाल किया कि क्या विचाराधीन फाइल वास्तव में मुख्यमंत्री और कैबिनेट उप-समिति के अध्यक्ष के साथ हुई कई बैठकों के दौरान छात्रों द्वारा उठाई गई मांगों को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है कि प्रस्तावित युक्तिकरण इन चिंताओं को दूर करता है या नहीं। उन्होंने बताया कि छात्रों ने अब तक सरकार के औपचारिक बयानों के बजाय केवल बिना पुष्टि वाली मीडिया रिपोर्टें देखी हैं।

हालिया जेकेपीएससी अधिसूचना का जिक्र करते हुए मुजीब ने कहा कि दस में से सिर्फ दो ओपन मेरिट पद आवंटित करना, जबकि बाकी अधिकांश सीटें आरक्षित श्रेणियों के तहत हैं, गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने बताया कि कश्मीर में कई आरक्षित श्रेणियों की जनसंख्या नगण्य है और चेतावनी दी कि ऐसे फैसले स्थानीय उम्मीदवारों को अवसरों से वंचित कर सकते हैं तथा योग्यता को नजरअंदाज कर सकते हैं।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांस्टेबल चयन, वित्त लेखा सहायक पदों और अन्य बड़े पैमाने पर अभियानों सहित लगातार भर्तियां जल्दबाजी में की जा रही हैं, जिससे आरक्षण युक्तिकरण से भविष्य में किसी भी लाभ की गुंजाइश बहुत कम बचती है। उनके अनुसार, ओपन मेरिट छात्रों का मानना है कि यह देरी अब प्रक्रियात्मक नहीं बल्कि नीतिगत है। उन्होंने कहा, सरकार ने खुद इस काम को पूरा करने के लिए छह महीने का समय मांगा था। वह समय बीत चुका है और फिर भी भर्तियां बिना किसी रोक-टोक के जारी हैं। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि जब तक युक्तिकरण पूरा नहीं हो जाता, तब तक चल रही भर्तियों को रोक दिया जाए।

मुजीब ने आगे कहा कि ओपन मेरिट समूह अब सीधे उपराज्यपाल से संपर्क करने पर विचार कर रहे हैं क्योंकि फाइल कथित तौर पर उनके कार्यालय में है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया को रोकने के लिए जानबूझकर गलतफहमियां पैदा की जा रही हैं और जम्मू-कश्मीर की बहुसंख्यक आबादी के लिए राहत सुनिश्चित करने के लिए तत्काल बातचीत की मांग की।

जम्मू-कश्मीर छात्र संघ के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुहेमी ने भी लंबे समय से चली आ रही इस देरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आरक्षण का मुद्दा युवा उम्मीदवारों के लिए गंभीर मानसिक तनाव का कारण बन गया है और चेतावनी दी कि इसे तुरंत हल करने में विफलता से मामला और भी जटिल हो जाएगा। नासिर ने इस मुद्दे को हजारों युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ बताया। उन्होंने कहा कि हालांकि जम्मू-कश्मीर में ओपन मेरिट उम्मीदवार आबादी का बहुमत बनाते हैं, लेकिन वे वर्तमान में अन्याय का सामना कर रहे हैं।


एनसी के मुख्य प्रवक्ता और जड़ीबल के विधायक तनवीर सादिक ने कहा कि चुनी हुई सरकार ने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी है। उन्होंने कहा कि कानूनी राय लेने के बाद मामला कैबिनेट के सामने रखा गया और बाद में राजभवन को भेज दिया गया। सादिक ने कहा कि जो कुछ भी सरकार के अधिकार क्षेत्र में था, वह पूरा हो चुका है और रिपोर्ट जल्द से जल्द वापस मिल जाए, इसके लिए प्रयास जारी हैं। उन्होंने छात्रों से धैर्य रखने की अपील की और विपक्षी नेताओं से भी राजभवन स्तर पर इस मुद्दे को उठाने का आग्रह किया। सादिक ने इस बात पर जोर दिया कि इस मामले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए और कहा कि सरकार आरक्षण युक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है तथा उसने सद्भावना से काम किया है।
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