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सरकार की पहलों ने जम्मू-कश्मीर को बनाया ट्राउट उत्पादन में अग्रणी : उपराज्यपाल
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श्रीनगर के एसकेआईसीसी में कोल्ड वाटर फिशरीज की कार्यशाला में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा। संवाद
- बोले-जम्मू-कश्मीर में एकीकृत मत्स्य पालन विकास के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल बनने की अपार संभावनाएं
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को श्रीनगर में भारत सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा आयोजित शीत जल मत्स्य पालन पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की एकीकृत पहलों ने जम्मू-कश्मीर को ट्राउट उत्पादन में अग्रणी बना दिया है।
उपराज्यपाल ने केंद्र शासित प्रदेश में 2020 के बाद से मछली उत्पादन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि और बुनियादी ढांचे में हुए सुधारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, जम्मू-कश्मीर में एकीकृत मत्स्य पालन विकास के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल बनने की अपार संभावनाएं हैं। मूल्य-शृंखला दृष्टिकोण से रोजगार के अवसर पैदा होंगे, कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी और मछली पालकों की आय में वृद्धि होगी।
हमारी रणनीतिक पहलों ने जम्मू-कश्मीर को सभी शीत-जल राज्यों के बीच ट्राउट उत्पादन में अग्रणी स्थान पर पहुंचा दिया है। 2022 में शुरू किए गए समग्र कृषि विकास कार्यक्रम के तहत, मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए 233 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इससे पिछले कुछ वर्षों में, मछली उत्पादन और उससे संबंधित बुनियादी ढांचे में काफी वृद्धि देखने को मिली है।
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वित्तीय वर्ष 2021-22 में ट्राउट का उत्पादन 1,663 टन था, जो बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 2,650 टन तक पहुंच गया। निजी क्षेत्र की ट्राउट इकाइयों की संख्या 936 से बढ़कर 1,649 हो गई; हैचरी की संख्या 1 से बढ़कर 9 हो गई, 2024 तक ट्राउट फीड मिलों की संख्या शून्य से बढ़कर 6 हो गई, आरएएस इकाइयों की संख्या 2 से बढ़कर 9 हो गई और बायोफ्लॉक इकाइयों की संख्या 10 से बढ़कर 59 हो गई।
विकास के केंद्र में हमारा जीवंत किसान समुदाय है, जो न केवल उत्पादक हैं, बल्कि हमारी पहचान और अर्थव्यवस्था की नींव भी हैं। अब समय आ गया है कि हम उनकी भूमिका का उचित सम्मान, निवेश और तकनीक के साथ सम्मान करें। हमारे नागरिक, श्रमिक, उद्यमी, किसान और कलाकार नवाचार के प्रतीक हैं और एक आत्मनिर्भर कल के निर्माण के लिए तैयार हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को श्रीनगर में भारत सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा आयोजित शीत जल मत्स्य पालन पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की एकीकृत पहलों ने जम्मू-कश्मीर को ट्राउट उत्पादन में अग्रणी बना दिया है।
उपराज्यपाल ने केंद्र शासित प्रदेश में 2020 के बाद से मछली उत्पादन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि और बुनियादी ढांचे में हुए सुधारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, जम्मू-कश्मीर में एकीकृत मत्स्य पालन विकास के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल बनने की अपार संभावनाएं हैं। मूल्य-शृंखला दृष्टिकोण से रोजगार के अवसर पैदा होंगे, कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी और मछली पालकों की आय में वृद्धि होगी।
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हमारी रणनीतिक पहलों ने जम्मू-कश्मीर को सभी शीत-जल राज्यों के बीच ट्राउट उत्पादन में अग्रणी स्थान पर पहुंचा दिया है। 2022 में शुरू किए गए समग्र कृषि विकास कार्यक्रम के तहत, मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए 233 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इससे पिछले कुछ वर्षों में, मछली उत्पादन और उससे संबंधित बुनियादी ढांचे में काफी वृद्धि देखने को मिली है।
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वित्तीय वर्ष 2021-22 में ट्राउट का उत्पादन 1,663 टन था, जो बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 2,650 टन तक पहुंच गया। निजी क्षेत्र की ट्राउट इकाइयों की संख्या 936 से बढ़कर 1,649 हो गई
विकास के केंद्र में हमारा जीवंत किसान समुदाय है, जो न केवल उत्पादक हैं, बल्कि हमारी पहचान और अर्थव्यवस्था की नींव भी हैं। अब समय आ गया है कि हम उनकी भूमिका का उचित सम्मान, निवेश और तकनीक के साथ सम्मान करें। हमारे नागरिक, श्रमिक, उद्यमी, किसान और कलाकार नवाचार के प्रतीक हैं और एक आत्मनिर्भर कल के निर्माण के लिए तैयार हैं।