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Srinagar News: प्रदेश सरकार ने घाटी में जमात-ए-इस्लामी से जुड़े 58 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लिया
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कुपवाड़ा के लंगेट में जमात ए इस्लामी से संबद्ध स्कूल। संवाद
- फोटो : Samvad
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार ने शनिवार को घाटी में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) से जुड़े 58 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया। अधिकारियों ने बताया कि ये स्कूल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जेईआई के फलाह-ए-आम ट्रस्ट (एफएटी) से जुड़े थे।
अधिकारियों ने कहा कि सरकार ने शनिवार को घाटी के अलग-अलग हिस्सों में एफएटी के 58 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने बताया कि ये संस्थान उन 215 स्कूलों के अलावा हैं जिनका प्रबंधन सरकार द्वारा पिछले साल अपने हाथ में लिया गया था। सरकार ने पिछले साल अगस्त में घाटी के सभी दस जिलों में प्रतिबंधित संगठन जेईआई से जुड़े 215 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया था। इनमें से सबसे ज्यादा बारामुला में 53, अनंतनाग में 37, कुपवाड़ा में 36, पुलवामा में 22, बड़गाम में 20, कुलगाम में 16, शोपिया में 15, गांदरबल में 6, बांदीपोरा में 6 और श्रीनगर में 4 स्कूल थे।
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राजनीतिक दलों ने दी थी तीखी प्रतिक्रिया ...
श्रीनगर। कश्मीर में राजनीतिक दलों ने जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) से संबद्ध 215 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने पर उस समय तीखी प्रतिक्रिया दी थी। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा था - जेईआई से जुड़े स्कूलों पर सरकार द्वारा प्रबंधन अपने हाथों में लेने को जम्मू-कश्मीर के संस्थानों पर एक और हमला बताया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सत्तारूढ़ पार्टी अपने ही लोगों के खिलाफ जा रही है और भाजपा का एजेंडा लागू कर रही है।
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अपनी पार्टी के प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने कहा था - इन स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के संदर्भ में प्रतिबंध लागू करना न तो आवश्यक था और न ही उचित था। उन्होंने कहा था कि जमात-ए-इस्लामी के साथ राजनीतिक और वैचारिक मतभेद हो सकते हैं लेकिन यह निर्विवाद है कि एफएटी स्कूलों ने दशकों से शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक और सराहनीय भूमिका निभाई है। इन स्कूलों पर प्रतिबंध लगाकर सरकार ने शिक्षा क्षेत्र और जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ अन्याय किया है।
पीडीपी की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने उस समय कहा था - सत्ता में रहते हुए जमात हमेशा नेकां का पहला निशाना रही है। कश्मीर के इतिहास में जब भी नेशनल कॉन्फ्रेंस को भारी बहुमत मिला है उनका पहला निशाना हमेशा जमात ही रही है। चाहे वह 1977 हो या आज भी, जहां उन्होंने हज़ारों छात्रों के भविष्य को खतरे में डालकर उन्हें संकट में डालकर हद पार कर दी है।
2022 में इन स्कूलों को बंद करने के दिए थे निर्देश ...
जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी से जुड़े ‘फलाह-ए-आम’ (एफएटी) की ओर से चलाए जा रहे 300 से अधिक संस्थानों में जून 2022 में पढ़ाई बंद करने का आदेश दिया था। इन्हें 15 दिनों के भीतर सील करने को कहा गया था। सभी छात्रों को मौजूदा सत्र के लिए नजदीकी सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया गया था। अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि जमात-ए-इस्लामी ज्यादातर एफएटी स्कूलों, मदरसों, अनाथालयों, मस्जिदों और अन्य परोपकारी कार्यों से अपना काम चलाता है और कहा था कि इस तरह के संस्थानों ने 2008, 2010 और 2016 में बड़े पैमाने पर अशांति फैलाई। आदेश में कहा गया था कि इन प्रतिबंधित संस्थानों में पढ़ने वाले सभी छात्र मौजूदा सत्र के लिए नजदीकी सरकारी स्कूलों में दाखिला ले सकेंगे। आदेश में मुख्य शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्यों और क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारियों को इन छात्रों के दाखिले में मदद करने को भी कहा गया था।
बड़े पैमाने पर अशांति फैलाने का था आरोप ...
अधिकारियों ने बताया कि जमात-ए-इस्लामी ज्यादातर एफएटी स्कूलों, मदरसों, अनाथालयों, मस्जिदों और अन्य परोपकारी कार्यों से अपना काम चलाता रहा है। इस तरह के संस्थानों ने 2008, 2010 और 2016 में बड़े पैमाने पर अशांति फैलाने में नकारात्मक भूमिका निभाई जिससे आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
बंदूक की नोक पर जमीन कब्जा करके बनाए थे स्कूल ...
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 300 से अधिक संख्या वाले लगभग सभी एफएटी स्कूल अवैध रूप से अधिग्रहित सरकारी और सामुदायिक भूमि पर मौजूद पाए गए हैं। इन जमीन पर जबरदस्ती, बंदूक की नोक पर कब्जा किया गया था। साथ ही राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर धोखाधड़ी और जालसाजी करके गलत ढंग से संस्थाएं बनाईं गई। उन्होंने बताया कि कि एसआईए पहले ही इस तरह के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है और एजेंसी जांच के दायरे को बढ़ा रही है ताकि उन सभी धोखाधड़ी, अनधिकृत संस्थाओं और जालसाजी का पता लगाया जा सके जो पिछले 30 वर्षों में आतंकवादियों के इशारे पर की गई हैं।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार ने शनिवार को घाटी में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) से जुड़े 58 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया। अधिकारियों ने बताया कि ये स्कूल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जेईआई के फलाह-ए-आम ट्रस्ट (एफएटी) से जुड़े थे।
अधिकारियों ने कहा कि सरकार ने शनिवार को घाटी के अलग-अलग हिस्सों में एफएटी के 58 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने बताया कि ये संस्थान उन 215 स्कूलों के अलावा हैं जिनका प्रबंधन सरकार द्वारा पिछले साल अपने हाथ में लिया गया था। सरकार ने पिछले साल अगस्त में घाटी के सभी दस जिलों में प्रतिबंधित संगठन जेईआई से जुड़े 215 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया था। इनमें से सबसे ज्यादा बारामुला में 53, अनंतनाग में 37, कुपवाड़ा में 36, पुलवामा में 22, बड़गाम में 20, कुलगाम में 16, शोपिया में 15, गांदरबल में 6, बांदीपोरा में 6 और श्रीनगर में 4 स्कूल थे।
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राजनीतिक दलों ने दी थी तीखी प्रतिक्रिया ...
श्रीनगर। कश्मीर में राजनीतिक दलों ने जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) से संबद्ध 215 स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने पर उस समय तीखी प्रतिक्रिया दी थी। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा था - जेईआई से जुड़े स्कूलों पर सरकार द्वारा प्रबंधन अपने हाथों में लेने को जम्मू-कश्मीर के संस्थानों पर एक और हमला बताया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सत्तारूढ़ पार्टी अपने ही लोगों के खिलाफ जा रही है और भाजपा का एजेंडा लागू कर रही है।
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अपनी पार्टी के प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने कहा था - इन स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के संदर्भ में प्रतिबंध लागू करना न तो आवश्यक था और न ही उचित था। उन्होंने कहा था कि जमात-ए-इस्लामी के साथ राजनीतिक और वैचारिक मतभेद हो सकते हैं लेकिन यह निर्विवाद है कि एफएटी स्कूलों ने दशकों से शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक और सराहनीय भूमिका निभाई है। इन स्कूलों पर प्रतिबंध लगाकर सरकार ने शिक्षा क्षेत्र और जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ अन्याय किया है।
पीडीपी की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने उस समय कहा था - सत्ता में रहते हुए जमात हमेशा नेकां का पहला निशाना रही है। कश्मीर के इतिहास में जब भी नेशनल कॉन्फ्रेंस को भारी बहुमत मिला है उनका पहला निशाना हमेशा जमात ही रही है। चाहे वह 1977 हो या आज भी, जहां उन्होंने हज़ारों छात्रों के भविष्य को खतरे में डालकर उन्हें संकट में डालकर हद पार कर दी है।
2022 में इन स्कूलों को बंद करने के दिए थे निर्देश ...
जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी से जुड़े ‘फलाह-ए-आम’ (एफएटी) की ओर से चलाए जा रहे 300 से अधिक संस्थानों में जून 2022 में पढ़ाई बंद करने का आदेश दिया था। इन्हें 15 दिनों के भीतर सील करने को कहा गया था। सभी छात्रों को मौजूदा सत्र के लिए नजदीकी सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया गया था। अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि जमात-ए-इस्लामी ज्यादातर एफएटी स्कूलों, मदरसों, अनाथालयों, मस्जिदों और अन्य परोपकारी कार्यों से अपना काम चलाता है और कहा था कि इस तरह के संस्थानों ने 2008, 2010 और 2016 में बड़े पैमाने पर अशांति फैलाई। आदेश में कहा गया था कि इन प्रतिबंधित संस्थानों में पढ़ने वाले सभी छात्र मौजूदा सत्र के लिए नजदीकी सरकारी स्कूलों में दाखिला ले सकेंगे। आदेश में मुख्य शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्यों और क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारियों को इन छात्रों के दाखिले में मदद करने को भी कहा गया था।
बड़े पैमाने पर अशांति फैलाने का था आरोप ...
अधिकारियों ने बताया कि जमात-ए-इस्लामी ज्यादातर एफएटी स्कूलों, मदरसों, अनाथालयों, मस्जिदों और अन्य परोपकारी कार्यों से अपना काम चलाता रहा है। इस तरह के संस्थानों ने 2008, 2010 और 2016 में बड़े पैमाने पर अशांति फैलाने में नकारात्मक भूमिका निभाई जिससे आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
बंदूक की नोक पर जमीन कब्जा करके बनाए थे स्कूल ...
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 300 से अधिक संख्या वाले लगभग सभी एफएटी स्कूल अवैध रूप से अधिग्रहित सरकारी और सामुदायिक भूमि पर मौजूद पाए गए हैं। इन जमीन पर जबरदस्ती, बंदूक की नोक पर कब्जा किया गया था। साथ ही राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर धोखाधड़ी और जालसाजी करके गलत ढंग से संस्थाएं बनाईं गई। उन्होंने बताया कि कि एसआईए पहले ही इस तरह के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है और एजेंसी जांच के दायरे को बढ़ा रही है ताकि उन सभी धोखाधड़ी, अनधिकृत संस्थाओं और जालसाजी का पता लगाया जा सके जो पिछले 30 वर्षों में आतंकवादियों के इशारे पर की गई हैं।