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Srinagar News: आईएचपीएल के दो आयोजकों की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज

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Srinagar, Indian Heaven Premier League, Court Cancel Anticipatory Bail, Two Organisers
- स्थानीय अदालत ने करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में आरोपियों से आत्मसमर्पण के लिए कहा
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। अदालत ने इंडियन हेवन प्रीमियर लीग (आईएचपीएल) से जुड़े करोड़ों के धोखाधड़ी मामले में दो आरोपियों की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिकाओं को शनिवार को खारिज कर दिया। श्रीनगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फारूख अहमद भट ने लीग कमिश्नर सुरेंद्र खन्ना और निर्मल सिद्धू की याचिकाओं को ठुकरा दिया। साथ ही आरोपियों से आत्मसमर्पण के लिए कहा है।
अभियोजन के अनुसार आयोजकों ने खिलाड़ियों, सहायक कर्मचारियों, होटल प्रबंधन और दर्शकों को ठग कर बड़ी राशि वसूली। जैसे ही इवेंट शुरू हुआ उसे छोड़ दिया। यह मैच श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में आयोजित किए गए थे जिसे जम्मू-कश्मीर स्पोर्ट्स काउंसिल से किराये पर लिया गया था। अदालत के समक्ष प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में पुलिस ने कहा कि आरोपी खिलाड़ियों और अधिकारियों को रैडिसन कलेक्शन होटल में 1 व 2 नवंबर 2025 की मध्यरात्रि में बिना होटल प्रबंधन व खिलाड़ियों को जानकारी दिए और बिना लंबित होटल बिल या खिलाड़ियों और खेल स्टाफ की मैच फीस चुकाए भाग गए।
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दर्शकों से टिकट राशि वसूली गई थी लेकिन नियोजित मैच कभी नहीं खेले गए। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने श्रीनगर, किश्तवाड़ और जम्मू में उभरते युवा क्रिकेटरों के ट्रायल आयोजित किए और प्रत्येक खिलाड़ी से 1,600 रुपये ट्रायल फीस के रूप में लिए।
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जांच के दौरान प्राप्त बैंक स्टेटमेंट्स में 4 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन दर्ज थे। अपने निवेदन में, दक्षिण पश्चिम नई दिल्ली के निवासी खन्ना ने दावा किया कि उन्हें केवल लीग का चेहरा बनने के लिए आमंत्रित किया गया था और वित्तीय लेनदेन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने कहा कि उन्हें नोटिस मिलने पर जांच में शामिल किया गया।
चंडीगढ़ के निवासी सिद्धू ने तर्क दिया कि उनका नाम एफआईआर में नहीं है और उनके खिलाफ कोई विशिष्ट भूमिका नहीं बताई गई है। जमानत आवेदन का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोप एक पूर्व-योजना बनाए गए आर्थिक अपराध को दर्शाते हैं जिसमें महत्वपूर्ण सार्वजनिक धन और कई पीड़ित शामिल हैं। जांच एजेंसी ने यह कहा कि पैसे का पता लगाने और बड़ी साजिश को उजागर करने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
अपील खारिज करते हुए अदालत ने माना कि आर्थिक अपराध अपने व्यापक सामाजिक प्रभाव के कारण अलग आधार पर खड़े होते हैं। जांच के दौरान एकत्रित सामग्री गंभीर अपराधों को दर्शाती है। एक सह-आरोपी को पहले ही गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि अन्य कथित रूप से गिरफ्तारी से बच रहे हैं।

गिरफ्तारी से सुरक्षा देने के लिए कोई असाधारण कारण न पाते हुए अदालत ने दोनों याचिकाकर्ताओं को कानून के अनुसार जांच एजेंसी या सक्षम अदालत के समक्ष हिरासत में पूछताछ के लिए आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। पुलिस ने संकेत दिया कि गिरफ्तारियों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के बाद पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
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