{"_id":"692f48837a475db6c80f8a65","slug":"srinagar-highcourt-petition-reject-penality-of-one-lakh-rupee-srinagar-news-c-264-1-sr31001-108020-2025-12-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Srinagar News: हाईकोर्ट ने सरफेसी एक्ट के तहत याचिका की खारिज, याचिकाकर्ता को एक लाख जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Srinagar News: हाईकोर्ट ने सरफेसी एक्ट के तहत याचिका की खारिज, याचिकाकर्ता को एक लाख जुर्माना
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने सोमवार को सरफेसी कार्यवाही को चुनौती देने वाली एक याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने बार-बार कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के लिए याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की डिवीजन बेंच ने कुपवाड़ा के गुलाम हसन शाह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की। शाह ने दावा किया था कि उनका एकमंजिला मकान कुर्क किया गया है जबकि वह गिरवी रखी गई सुरक्षित संपत्ति नहीं है। कोर्ट ने पाया कि शाह बैंक लोन डिफॉल्टर होने के बाद वसूली कार्यवाही को रोकने के लिए बार-बार याचिकाएं दायर करते रहे हैं। इससे पहले नवंबर 2024 में सरफेसी एक्ट की धारा 14 के तहत बैंक की कार्रवाई को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज हो चुकी थी।
इसके बाद दायर पुनर्विचार याचिका को भी जुलाई 2025 में खारिज कर दिया गया था और उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था जिसे शाह ने अब तक जमा नहीं किया है।कोर्ट को बार-बार धोखा देने के प्रयासों को देखते हुए बेंच ने कहा कि शाह अब सुरक्षित संपत्ति की गलत पहचान का झूठा दावा पेश कर रहे हैं।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने याचिका एक लाख रुपये जुर्माने के साथ खारिज कर दी और निर्देश दिया कि यह राशि दो हफ्तों के अंदर जमा की जाए। ऐसा नहीं होने पर रजिस्ट्री को अवमानना की कार्यवाही के लिए रोबकर (कंटेम्प्ट रिपोर्ट) तैयार करने को कहा गया है।
विज्ञापन
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने सोमवार को सरफेसी कार्यवाही को चुनौती देने वाली एक याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने बार-बार कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के लिए याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की डिवीजन बेंच ने कुपवाड़ा के गुलाम हसन शाह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की। शाह ने दावा किया था कि उनका एकमंजिला मकान कुर्क किया गया है जबकि वह गिरवी रखी गई सुरक्षित संपत्ति नहीं है। कोर्ट ने पाया कि शाह बैंक लोन डिफॉल्टर होने के बाद वसूली कार्यवाही को रोकने के लिए बार-बार याचिकाएं दायर करते रहे हैं। इससे पहले नवंबर 2024 में सरफेसी एक्ट की धारा 14 के तहत बैंक की कार्रवाई को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज हो चुकी थी।
विज्ञापन
इसके बाद दायर पुनर्विचार याचिका को भी जुलाई 2025 में खारिज कर दिया गया था और उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था जिसे शाह ने अब तक जमा नहीं किया है।कोर्ट को बार-बार धोखा देने के प्रयासों को देखते हुए बेंच ने कहा कि शाह अब सुरक्षित संपत्ति की गलत पहचान का झूठा दावा पेश कर रहे हैं।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने याचिका एक लाख रुपये जुर्माने के साथ खारिज कर दी और निर्देश दिया कि यह राशि दो हफ्तों के अंदर जमा की जाए। ऐसा नहीं होने पर रजिस्ट्री को अवमानना की कार्यवाही के लिए रोबकर (कंटेम्प्ट रिपोर्ट) तैयार करने को कहा गया है।