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Srinagar News: हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी को 14 साल जेल में रहने के बाद दी जमानत

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Srinagar, Highcourt Gave Bail, Murder Case, After 14 Year Imprisonment
संवाद न्यूज एजेंसी
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने वीरवार को हत्या के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत दे दी। उच्च न्यायालय ने कहा कि बिना ट्रायल पूरा हुए लगभग 14 साल तक जेल में रहना, तेजीर से ट्रायल के उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
जस्टिस संजय धर की बेंच ने मुनीर अजीज वार की जमानत अर्ज़ी मंजूर करते हुए यह आदेश दिया। वार पर बटमालू पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला वली मोहम्मद हजम की हत्या से जुड़ा है जो 13 मई 2012 को लापता हो गए थे। जांच के दौरान याचिकाकर्ता जो उस समय बटमालू के फिरदौस आबाद की एक मस्जिद में इमाम थे, को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उन्होंने एक महिला के साथ प्रेम संबंध के कारण मृतक की हत्या करने की बात कबूल की थी। उस महिला के साथ याचिकाकर्ता के कथित तौर पर संबंध थे।
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पुलिस का दावा है कि आरोपी ने एक सह-आरोपी की मदद से हत्या के बाद शव को ठिकाने लगा दिया था। अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खुलासे के बाद शव और अपराध में इस्तेमाल कथित हथियार की बरामदगी का भी हवाला दिया।
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वार ने लंबे समय तक जेल में रहने और ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत मांगी थी। उन्होंने कहा कि वह 9 जून 2012 से हिरासत में हैं, जबकि अभियोजन पक्ष लगभग 14 साल बीतने के बाद भी ट्रायल पूरा करने में नाकाम रहा है। ट्रायल रिकॉर्ड की जांच के बाद, कोर्ट ने पाया कि हालांकि सितंबर 2012 में आरोप तय किए गए थे और अभियोजन पक्ष ने 23 गवाहों का जिक्र किया था लेकिन 13 साल से ज़्यादा समय में केवल 20 गवाहों से ही पूछताछ हो पाई थी। जांच अधिकारी और एक डॉक्टर सहित मुख्य गवाहों की गवाही अभी बाकी थी। कोर्ट ने कहा कि जमानत पर कानूनी रोक भी तब बेअसर हो जाती है जब अभियोजन पक्ष की वजह से हुई देरी के कारण लगातार हिरासत में रखना ज्यादती बन जाता है।


कोर्ट ने कहा, मुकदमे के नतीजे में देरी के लिए मुख्य रूप से अभियोजन पक्ष जिम्मेदार है और. निकट भविष्य में मुकदमे के नतीजे की कोई संभावना नहीं है। जमानत अर्जी मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने एक लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही राशि की दो स्थानीय जमानत भरने पर रिहा करने का आदेश दिया।
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