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Srinagar News: गंडबल नाव हादसे के एक पीड़ित का शव दो साल से ज्यादा समय बाद मिला
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। गंडबल नाव हादसे के दो साल से ज्यादा समय बाद लापता पीड़ितों में से एक शौकत अहमद शेख का शव सोमवार को झेलम नदी से बरामद किया गया। इससे लंबे और दर्दनाक खोज अभियान का अंत हुआ। लोगों ने दुर्घटनास्थल के पास नदी में शव देखा और तुरंत अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद शव को नदी से निकाला गया।
गंडबल में नाव पलटने के दिन से ही शौकत अहमद शेख का पता नहीं चल पाया था। इस घटना से पूरे श्रीनगर में सदमे की लहर दौड़ गई थी। कई परिवार टूट गए थे। हादसे के बाद बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान शुरू किया गया जिसमें मार्कोस के एलीट मरीन कमांडो और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की क्विक रिस्पांस टीम शामिल थी। झेलम नदी के किनारे अलग-अलग जगहों पर पानी के अंदर कई खोज अभियान चलाए गए लेकिन लगातार कोशिशों के बावजूद उस समय शव नहीं मिल पाया था।
गौरतलब है कि गंडबल नाव हादसे में बच्चों सहित आठ लोगों की जान चली गई थी। इसे श्रीनगर के हाल के इतिहास में सबसे दुखद और घातक नदी दुर्घटनाओं में से एक के रूप में याद किया जाता है। शेख का शव मिलने के साथ ही लंबा और भावनात्मक रूप से थका देने वाला खोज अभियान आखिरकार खत्म हो गया है जिससे सालों की अनिश्चितता के बाद शोक संतप्त परिवार को कुछ राहत मिली है।
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श्रीनगर। गंडबल नाव हादसे के दो साल से ज्यादा समय बाद लापता पीड़ितों में से एक शौकत अहमद शेख का शव सोमवार को झेलम नदी से बरामद किया गया। इससे लंबे और दर्दनाक खोज अभियान का अंत हुआ। लोगों ने दुर्घटनास्थल के पास नदी में शव देखा और तुरंत अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद शव को नदी से निकाला गया।
गंडबल में नाव पलटने के दिन से ही शौकत अहमद शेख का पता नहीं चल पाया था। इस घटना से पूरे श्रीनगर में सदमे की लहर दौड़ गई थी। कई परिवार टूट गए थे। हादसे के बाद बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान शुरू किया गया जिसमें मार्कोस के एलीट मरीन कमांडो और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की क्विक रिस्पांस टीम शामिल थी। झेलम नदी के किनारे अलग-अलग जगहों पर पानी के अंदर कई खोज अभियान चलाए गए लेकिन लगातार कोशिशों के बावजूद उस समय शव नहीं मिल पाया था।
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गौरतलब है कि गंडबल नाव हादसे में बच्चों सहित आठ लोगों की जान चली गई थी। इसे श्रीनगर के हाल के इतिहास में सबसे दुखद और घातक नदी दुर्घटनाओं में से एक के रूप में याद किया जाता है। शेख का शव मिलने के साथ ही लंबा और भावनात्मक रूप से थका देने वाला खोज अभियान आखिरकार खत्म हो गया है जिससे सालों की अनिश्चितता के बाद शोक संतप्त परिवार को कुछ राहत मिली है।
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