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Srinagar News: डेलिना-कनिस्पोरा फ्लाईओवर के काम में देरी यात्रियों पर भारी
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बारामुला में अधूरा पड़ा डेलीना कनिस्पोरा फ्लाईओवर। संवाद
- अधिकारियों ने जताई साल के अंत तक प्रोजेक्ट पूरा होने की संभावना
साकिब नबी
बारामुला। उत्तरी कश्मीर के बारामुला में 1.7 किलोमीटर लंबा डेलिना-कनिस्पोरा फ्लाईओवर का काम बार-बार हो रही देरी के कारण रुका हुआ है। इससे हजारों यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में देरी के कारण अक्सर ट्रैफिक जाम लग जाता है। यात्रा का समय भी बढ़ गया है जिससे रोजमर्रा की आवाजाही में रुकावट आ रही है। इलाके के स्थानीय व्यवसायों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि पिछले दो सालों में कई चुनौतियों के कारण इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना का काम धीमा हो गया है।
एक अधिकारी ने बताया, हमें कई कारणों से देरी का सामना करना पड़ा जिनमें पहलगाम हमले के बाद मजदूरों का घाटी छोड़कर चले जाना, कड़ाके की ठंड, जमीन मालिकों को मुआवजा देने में देरी और डीपीएस स्कूल के पास ऊंचाई में बदलाव शामिल हैं क्योंकि फ्लाईओवर के ऊपर से 132 केवी की ट्रांसमिशन लाइन गुजर रही है। उधर, अधिकारियों ने बताया कि अब काम पूरी रफ्तार से चल रहा है। उम्मीद है कि यह फ्लाईओवर इस साल के अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा।
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मुआवजे के लिए तय की गई कुल 95 करोड़ की राशि में से 90 करोड़ रुपये यानी लगभग 95 प्रतिशत राशि प्रभावित जमीन मालिकों को पहले ही बांटी जा चुकी है। लगभग 200 परिवारों को मुआवजा मिला है। इनकी संपत्तियां इस परियोजना के रास्ते में आ रही थीं। इसमें लगभग 120 निर्माण शामिल हैं जैसे कि घर, दुकानें और चारदीवारी, साथ ही 27 पेड़ भी।
यह परियोजना, जो 2023 में शुरू हुई थी। 350 करोड़ रुपये लागत की नारबल-डेलिना सड़क चौड़ीकरण पहल का हिस्सा है (इसमें पट्टन बाईपास शामिल नहीं है)। जब परियोजना अपने शुरुआती लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाई तो इसकी समय सीमा बढ़ानी पड़ी।
इस साल की शुरुआत में बारामुला के सांसद इंजीनियर राशिद ने सड़क परिवहन और राजमार्ग केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सामने यह मुद्दा उठाया था जिसमें उन्होंने डेलिना-कनिस्पोरा फ्लाईओवर और पट्टन बाईपास, दोनों पर काम की धीमी गति को उजागर किया था। केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि इस मामले को सुलझाया जाएगा। यह फ्लाईओवर एनएच-01 के एक अहम हिस्से पर बनाया जा रहा है जो श्रीनगर को बारामूला से और आगे उड़ी, बोनियार, और कुपवाड़ा के करनाह, टीटवाल और माछिल जैसे सीमावर्ती इलाकों से जोड़ता है।
बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन के प्रोजेक्ट बीकन के तहत एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना, इस फ्लाईओवर का मकसद इस व्यस्त हाईवे पर ट्रैफिक की भीड़ को कम करना है। हालांकि, चल रहे निर्माण कार्य की वजह से लगातार रुकावटें आ रही हैं, जिसके चलते स्थानीय लोग और कारोबारी समुदाय इसके जल्द से जल्द पूरा होने की मांग कर रहे हैं।
बारिश से हालात और बदतर हो जाते हैं
डेलीना के रहने वाले गुलाम हसन ने कहा, हमें बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कनिस्पोरा से डेलीना तक का सफर तय करने में कम से कम 20 मिनट लगते हैं। एक अन्य निवासी ने बताया कि बारिश का मौसम हालात को और भी बदतर बना देता है, खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए। हम प्रशासन और बीकन के अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करें। संवाद
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साकिब नबी
बारामुला। उत्तरी कश्मीर के बारामुला में 1.7 किलोमीटर लंबा डेलिना-कनिस्पोरा फ्लाईओवर का काम बार-बार हो रही देरी के कारण रुका हुआ है। इससे हजारों यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में देरी के कारण अक्सर ट्रैफिक जाम लग जाता है। यात्रा का समय भी बढ़ गया है जिससे रोजमर्रा की आवाजाही में रुकावट आ रही है। इलाके के स्थानीय व्यवसायों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि पिछले दो सालों में कई चुनौतियों के कारण इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना का काम धीमा हो गया है।
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एक अधिकारी ने बताया, हमें कई कारणों से देरी का सामना करना पड़ा जिनमें पहलगाम हमले के बाद मजदूरों का घाटी छोड़कर चले जाना, कड़ाके की ठंड, जमीन मालिकों को मुआवजा देने में देरी और डीपीएस स्कूल के पास ऊंचाई में बदलाव शामिल हैं क्योंकि फ्लाईओवर के ऊपर से 132 केवी की ट्रांसमिशन लाइन गुजर रही है। उधर, अधिकारियों ने बताया कि अब काम पूरी रफ्तार से चल रहा है। उम्मीद है कि यह फ्लाईओवर इस साल के अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा।
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मुआवजे के लिए तय की गई कुल 95 करोड़ की राशि में से 90 करोड़ रुपये यानी लगभग 95 प्रतिशत राशि प्रभावित जमीन मालिकों को पहले ही बांटी जा चुकी है। लगभग 200 परिवारों को मुआवजा मिला है। इनकी संपत्तियां इस परियोजना के रास्ते में आ रही थीं। इसमें लगभग 120 निर्माण शामिल हैं जैसे कि घर, दुकानें और चारदीवारी, साथ ही 27 पेड़ भी।
यह परियोजना, जो 2023 में शुरू हुई थी। 350 करोड़ रुपये लागत की नारबल-डेलिना सड़क चौड़ीकरण पहल का हिस्सा है (इसमें पट्टन बाईपास शामिल नहीं है)। जब परियोजना अपने शुरुआती लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाई तो इसकी समय सीमा बढ़ानी पड़ी।
इस साल की शुरुआत में बारामुला के सांसद इंजीनियर राशिद ने सड़क परिवहन और राजमार्ग केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सामने यह मुद्दा उठाया था जिसमें उन्होंने डेलिना-कनिस्पोरा फ्लाईओवर और पट्टन बाईपास, दोनों पर काम की धीमी गति को उजागर किया था। केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि इस मामले को सुलझाया जाएगा। यह फ्लाईओवर एनएच-01 के एक अहम हिस्से पर बनाया जा रहा है जो श्रीनगर को बारामूला से और आगे उड़ी, बोनियार, और कुपवाड़ा के करनाह, टीटवाल और माछिल जैसे सीमावर्ती इलाकों से जोड़ता है।
बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन के प्रोजेक्ट बीकन के तहत एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना, इस फ्लाईओवर का मकसद इस व्यस्त हाईवे पर ट्रैफिक की भीड़ को कम करना है। हालांकि, चल रहे निर्माण कार्य की वजह से लगातार रुकावटें आ रही हैं, जिसके चलते स्थानीय लोग और कारोबारी समुदाय इसके जल्द से जल्द पूरा होने की मांग कर रहे हैं।
बारिश से हालात और बदतर हो जाते हैं
डेलीना के रहने वाले गुलाम हसन ने कहा, हमें बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कनिस्पोरा से डेलीना तक का सफर तय करने में कम से कम 20 मिनट लगते हैं। एक अन्य निवासी ने बताया कि बारिश का मौसम हालात को और भी बदतर बना देता है, खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए। हम प्रशासन और बीकन के अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करें। संवाद