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Srinagar News: सर्दी-जुकाम और सांस की नली में इन्फेक्शन के केस आ रहे सामने

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Srinagar, Cold Wave, Infection And Fever Case Increased in Hospitals
- डॉक्टरों ने सर्दी में होने वाली बीमारियों को कम करने के लिए समय पर वैक्सीनेशन और बचाव की दी सलाह
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर में लगातार तापमान गिरने के साथ डॉक्टर सर्दी-जुकाम और सांस की नली के ऊपरी हिस्से में इन्फेक्शन के मामलों में बढ़ोतरी बता रहे हैं। डॉक्टरों ने इन बीमारियों को कम करने के लिए समय पर वैक्सीनेशन और बचाव की सलाह दी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर समय पर सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाले हफ्तों में यह ट्रेंड और बढ़ सकता है खासकर बच्चों और बुज़ुर्गों में। श्रीनगर के चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. नवीद ने बताया कि ठंड का मौसम अलग-अलग सांस की नली के वायरस जैसे राइनोवायरस, इन्फ्लूएंजा वायरस और कुछ कोरोनावायरस के आसानी से फैलने के लिए अच्छी कंडीशन है।
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उन्होंने कहा कि ठंडी और सूखी हवा इन वायरस को माहौल में ज्यादा देर तक जिंदा रहने देती है। इससे इन्फेक्शन ज्यादा बार होते हैं और उन्हें कंट्रोल करना ज्यादा मुश्किल हो जाता है। उनके अनुसार छोटे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा, डायबिटीज या सीओपीडी जैसी पुरानी बीमारियों वाले लोगों को इन्फेक्शन होने पर कॉम्प्लिकेशंस का सबसे ज्यादा खतरा होता है। डॉक्टर ने इन्फ्लूएंजा वैक्सीनेशन के महत्व पर जोर दिया खासकर हाई-रिस्क वर्ग के लिए। उन्होंने आगे कहा कि फ्लू वैक्सीन बीमारी की गंभीरता को काफी कम करती हैं और कॉम्प्लिकेशंस को रोकती हैं।
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डॉ. साहिल मीर ने बताया कि वायरस ठंड के मौसम में लंबे समय तक स्थिर और संक्रामक रहते हैं। सर्दियों की हवा नाक के रास्ते को सुखा देती है जिससे इन्फेक्शन से बचाने वाला म्यूकस बैरियर कमजोर हो जाता है। लोग कम वेंटिलेशन के साथ ज्यादा समय घर के अंदर बिताते हैं जिससे ट्रांसमिशन की संभावना बढ़ जाती है। गर्मी के साधन बंद गर्म जगह बनाते हैं जो वायरल फैलने में मदद करते हैं।


डॉ. साहिल ने कहा कि सर्दियों के घरों में धूल, धुआं आदि जैसे एलर्जी कारक अधिक आम हो जाते हैं जिससे पहले से मौजूद श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं और लोग संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जनता को इस प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए जीवनशैली के उपायों, स्वच्छता प्रथाओं और चिकित्सीय सावधानियों के संयोजन का पालन करने की सलाह दी है। इन उपायों में उच्च जोखिम वाले समूहों के लिए इन्फ्लूएंजा वैक्सीन शामिल हैं।
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