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Srinagar News: कश्मीर के ब्रॉडकास्टर व कवि अब्दुल अहद फरहाद का जम्मू में निधन
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अब्दुल अहद फरहाद। फाइल फोटो
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर के ब्रॉडकास्टर और कवि अब्दुल अहद फरहाद का सोमवार को जम्मू में निधन हो गया। वह अपनी शानदार आवाज और कविताओं के लिए जाने जाते थे।
उनके जानने वाले लाेगों के अनुसार बहुत पहले जब जेबों में फोन नहीं बजते थे और टेलीविजन पर सुर्खियां नहीं चमकती थीं। तब कश्मीर में शाम का एक अलग ही माहौल होता था। परिवार और पड़ोसी रेडियो के चारों ओर इकट्ठा होते थे, एक जानी-पहचानी आवाज का इंतजार करते थे जो बाहर की अनिश्चितता को कम कर सके।
अब आप फरहाद से खबरें सुनिए, वह आवाज कहती थी। लोग रुककर सुनते थे। यह आवाज अब्दुल अहद फरहाद की थी जो कश्मीर के सबसे सम्मानित ब्रॉडकास्टर, कवि और लेखकों में से एक थे। वह श्रीनगर के सौरा में जन्मे। उन्होंने अपना ज्यादातर जीवन वहीं बिताया। शहर और उसके लोगों से गहराई से जुड़े रहे। उनके निधन से साहित्यिक, पत्रकारिता और सांस्कृतिक हलकों में गहरा शोक है। 1990 के दशक की हिंसा के दौरान कश्मीरियों ने फरहाद के प्रसारण को जीवन रेखा के रूप में इस्तेमाल किया।
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श्रीनगर। कश्मीर के ब्रॉडकास्टर और कवि अब्दुल अहद फरहाद का सोमवार को जम्मू में निधन हो गया। वह अपनी शानदार आवाज और कविताओं के लिए जाने जाते थे।
उनके जानने वाले लाेगों के अनुसार बहुत पहले जब जेबों में फोन नहीं बजते थे और टेलीविजन पर सुर्खियां नहीं चमकती थीं। तब कश्मीर में शाम का एक अलग ही माहौल होता था। परिवार और पड़ोसी रेडियो के चारों ओर इकट्ठा होते थे, एक जानी-पहचानी आवाज का इंतजार करते थे जो बाहर की अनिश्चितता को कम कर सके।
अब आप फरहाद से खबरें सुनिए, वह आवाज कहती थी। लोग रुककर सुनते थे। यह आवाज अब्दुल अहद फरहाद की थी जो कश्मीर के सबसे सम्मानित ब्रॉडकास्टर, कवि और लेखकों में से एक थे। वह श्रीनगर के सौरा में जन्मे। उन्होंने अपना ज्यादातर जीवन वहीं बिताया। शहर और उसके लोगों से गहराई से जुड़े रहे। उनके निधन से साहित्यिक, पत्रकारिता और सांस्कृतिक हलकों में गहरा शोक है। 1990 के दशक की हिंसा के दौरान कश्मीरियों ने फरहाद के प्रसारण को जीवन रेखा के रूप में इस्तेमाल किया।
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