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बीरवा एलटीसी धोखाधड़ी मामले में नहीं रद्द होगी एफआईआर : हाईकोर्ट
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- पूर्व स्वास्थ्य विभाग के लेखा अधिकारी पर चलेगा मुकदमा, याचिका खारिज की
अदालत से ... का लोगो लगाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट की श्रीनगर पीठ ने स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय कश्मीर के कार्यालय में पूर्व लेखा अधिकारी गुलाम रसूल बाबा की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी है। याचिका में पुलिस स्टेशन विजिलेंस ऑर्गनाइजेशन कश्मीर में दर्ज एफआईआर से उत्पन्न आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई थी।
जस्टिस संजय धर की एकल पीठ ने स्पेशल जज एंटी-करप्शन श्रीनगर के समक्ष लंबित मुकदमे की जारी रखने की अनुमति दी है। पीठ ने कहा कि इस चरण में याचिकाकर्ता के खिलाफ जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा रणबीर दंड संहिता के प्रावधानों के तहत अपराधों, जिसमें साजिश और जालसाजी से संबंधित धाराएं शामिल हैं, के लिए आगे बढ़ने हेतु पर्याप्त सामग्री मौजूद है।
अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार एफआईआर में कुछ ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर्स और अन्य अधिकारियों की तैनाती के दौरान बीरवा राज्य खजाने से बड़े पैमाने पर गबन और धोखाधड़ी से निकासी के आरोप लगाए गए थे। याचिकाकर्ता के संबंध में चार्जशीट में आरोप है कि उन्होंने रिकॉर्ड्स में हेरफेर कर और पद का दुरुपयोग कर कुछ डॉक्टरों के दावों को नियमों के उल्लंघन में समायोजित करने हेतु बिना अधिकार मंजूरी देकर 6,99,880 रुपये की लीव ट्रैवल कंसेशन (एलटीसी) की धोखाधड़ीपूर्ण निकासी सुगम की।
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कोर्ट ने नोट किया कि ट्रायल कोर्ट ने 31 जुलाई 2017 को आरोप तय किए थे और किया कि आरोप तय करने के साथ ही याचिकाकर्ता की डिस्चार्ज याचिका को अस्वीकार मान लिया जाएगा। अभियोजन के लिए मंजूरी के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ चार्जशीट उनके सेवानिवृत्ति के बाद दाखिल की गई थी इसलिए मंजूरी की आवश्यकता नहीं थी। शीघ्र मुकदमे के अधिकार के उल्लंघन के दावे को खारिज करते हुए कोर्ट ने दर्ज किया कि देरी अदालत या अभियोजन पक्ष की वजह से नहीं हुई बल्कि कुछ आरोपियों की अनुपस्थिति सहित परिस्थितियों के कारण हुई। यह भी नोट किया गया कि चालान लंबित रहने के दौरान दो आरोपी की मृत्यु हो गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट की श्रीनगर पीठ ने स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय कश्मीर के कार्यालय में पूर्व लेखा अधिकारी गुलाम रसूल बाबा की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी है। याचिका में पुलिस स्टेशन विजिलेंस ऑर्गनाइजेशन कश्मीर में दर्ज एफआईआर से उत्पन्न आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई थी।
जस्टिस संजय धर की एकल पीठ ने स्पेशल जज एंटी-करप्शन श्रीनगर के समक्ष लंबित मुकदमे की जारी रखने की अनुमति दी है। पीठ ने कहा कि इस चरण में याचिकाकर्ता के खिलाफ जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा रणबीर दंड संहिता के प्रावधानों के तहत अपराधों, जिसमें साजिश और जालसाजी से संबंधित धाराएं शामिल हैं, के लिए आगे बढ़ने हेतु पर्याप्त सामग्री मौजूद है।
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अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार एफआईआर में कुछ ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर्स और अन्य अधिकारियों की तैनाती के दौरान बीरवा राज्य खजाने से बड़े पैमाने पर गबन और धोखाधड़ी से निकासी के आरोप लगाए गए थे। याचिकाकर्ता के संबंध में चार्जशीट में आरोप है कि उन्होंने रिकॉर्ड्स में हेरफेर कर और पद का दुरुपयोग कर कुछ डॉक्टरों के दावों को नियमों के उल्लंघन में समायोजित करने हेतु बिना अधिकार मंजूरी देकर 6,99,880 रुपये की लीव ट्रैवल कंसेशन (एलटीसी) की धोखाधड़ीपूर्ण निकासी सुगम की।
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कोर्ट ने नोट किया कि ट्रायल कोर्ट ने 31 जुलाई 2017 को आरोप तय किए थे और किया कि आरोप तय करने के साथ ही याचिकाकर्ता की डिस्चार्ज याचिका को अस्वीकार मान लिया जाएगा। अभियोजन के लिए मंजूरी के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ चार्जशीट उनके सेवानिवृत्ति के बाद दाखिल की गई थी इसलिए मंजूरी की आवश्यकता नहीं थी। शीघ्र मुकदमे के अधिकार के उल्लंघन के दावे को खारिज करते हुए कोर्ट ने दर्ज किया कि देरी अदालत या अभियोजन पक्ष की वजह से नहीं हुई बल्कि कुछ आरोपियों की अनुपस्थिति सहित परिस्थितियों के कारण हुई। यह भी नोट किया गया कि चालान लंबित रहने के दौरान दो आरोपी की मृत्यु हो गई।