{"_id":"69c3023ce5db0b998001dbb1","slug":"srinagar-baramulla-charity-for-irans-people-srinagar-news-c-10-lko1027-867801-2026-03-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Srinagar News: बारामुला में भी लोग ईरान के लिए दान को हुए एकजुट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Srinagar News: बारामुला में भी लोग ईरान के लिए दान को हुए एकजुट
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले में शिया समुदाय के सदस्यों ने ईरान के लोगों की मदद के लिए एक मानवीय पहल के तहत सोना, नकदी और घर के बर्तन दान किए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपने गहने दान करके इस अभियान में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया जो उनकी गहरी करुणा और एकजुटता को दर्शाता है।
यह दान जिले के कई इलाकों से इकट्ठा किया गया जिनमें पट्टन, मीरगुंड, देलिना और सोपोर का सैदपोरा शामिल है जहां लोग स्वेच्छा से मदद के लिए आगे आए।
सांप्रदायिक सद्भाव का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए सुन्नी समुदाय के सदस्यों ने भी इस राहत कार्य में अहम योगदान दिया। उन्होंने गहने, बर्तन, नकदी के अलावा वाहन भी दान किए।
विज्ञापन
इस मौके पर फेरोज अली ने बताया कि ईरान एक मुस्लिम देश है। मैंने अपनी क्षमता के अनुसार जो कुछ भी हो सका दान किया है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो हम और भी मदद करने के लिए तैयार हैं। स्थानीय लोगों ने इस पहल को मानवीय मदद और एकता का प्रतीक बताया जो बारामुला के लोगों के बीच आपसी मेलजोल और सहानुभूति की भावना को उजागर करता है।
50 पैसे का सिक्का 17,000 में हुआ नीलाम
श्रीनगर। 50 पैसे का एक सिक्का श्रीनगर में 17,000 रुपये में नीलाम होने के बाद ईरान के लोगों के लिए कश्मीर में चलाए गए चंदा अभियान का सबसे ताकतवर प्रतीक बन गया।
यह सिक्का एक बच्चे ने दिया था जो ईरान में बमबारी से प्रभावित बच्चों की मदद के लिए अपना गुल्लक लेकर आया था। डल झील के अंदरूनी इलाके के मीर बेहरी के लाटी मोहल्ले की एक मस्जिद में जब आयोजक चंदे में मिली चीजों को छांट रहे थे तो उन्हें दान में मिले सामान के बीच यह छोटा सा सिक्का मिला।
हालांकि पैसों के हिसाब से यह सिक्का बहुत मामूली था लेकिन आयोजकों का कहना था कि इसके पीछे छिपे भाव ने इसकी कीमत को इसकी असल कीमत से कहीं ज्यादा बढ़ा दिया।
एक उद्घोषक ने वहां जमा लोगों से कहा कि यह सिक्का हमारे जमाने के इमाम के लिए दान किया गया है। यह देखने में भले ही छोटा लगे लेकिन यह अनमोल है।
इस बात ने लोगों के दिलों को छू लिया जिससे वहां मौजूद लोगों में जबरदस्त उत्साह भर गया और वे पूरे दिल से इस नीलामी में शामिल हो गए। काफी होड़-भरी बोली लगने के बाद जावेद अहमद सोफी ने 17,000 रुपये की आखिरी बोली लगाकर इस सिक्के को अपने नाम कर लिया।
विज्ञापन
श्रीनगर। उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले में शिया समुदाय के सदस्यों ने ईरान के लोगों की मदद के लिए एक मानवीय पहल के तहत सोना, नकदी और घर के बर्तन दान किए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपने गहने दान करके इस अभियान में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया जो उनकी गहरी करुणा और एकजुटता को दर्शाता है।
विज्ञापन
यह दान जिले के कई इलाकों से इकट्ठा किया गया जिनमें पट्टन, मीरगुंड, देलिना और सोपोर का सैदपोरा शामिल है जहां लोग स्वेच्छा से मदद के लिए आगे आए।
सांप्रदायिक सद्भाव का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए सुन्नी समुदाय के सदस्यों ने भी इस राहत कार्य में अहम योगदान दिया। उन्होंने गहने, बर्तन, नकदी के अलावा वाहन भी दान किए।
विज्ञापन
इस मौके पर फेरोज अली ने बताया कि ईरान एक मुस्लिम देश है। मैंने अपनी क्षमता के अनुसार जो कुछ भी हो सका दान किया है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो हम और भी मदद करने के लिए तैयार हैं। स्थानीय लोगों ने इस पहल को मानवीय मदद और एकता का प्रतीक बताया जो बारामुला के लोगों के बीच आपसी मेलजोल और सहानुभूति की भावना को उजागर करता है।
50 पैसे का सिक्का 17,000 में हुआ नीलाम
श्रीनगर। 50 पैसे का एक सिक्का श्रीनगर में 17,000 रुपये में नीलाम होने के बाद ईरान के लोगों के लिए कश्मीर में चलाए गए चंदा अभियान का सबसे ताकतवर प्रतीक बन गया।
यह सिक्का एक बच्चे ने दिया था जो ईरान में बमबारी से प्रभावित बच्चों की मदद के लिए अपना गुल्लक लेकर आया था। डल झील के अंदरूनी इलाके के मीर बेहरी के लाटी मोहल्ले की एक मस्जिद में जब आयोजक चंदे में मिली चीजों को छांट रहे थे तो उन्हें दान में मिले सामान के बीच यह छोटा सा सिक्का मिला।
हालांकि पैसों के हिसाब से यह सिक्का बहुत मामूली था लेकिन आयोजकों का कहना था कि इसके पीछे छिपे भाव ने इसकी कीमत को इसकी असल कीमत से कहीं ज्यादा बढ़ा दिया।
एक उद्घोषक ने वहां जमा लोगों से कहा कि यह सिक्का हमारे जमाने के इमाम के लिए दान किया गया है। यह देखने में भले ही छोटा लगे लेकिन यह अनमोल है।
इस बात ने लोगों के दिलों को छू लिया जिससे वहां मौजूद लोगों में जबरदस्त उत्साह भर गया और वे पूरे दिल से इस नीलामी में शामिल हो गए। काफी होड़-भरी बोली लगने के बाद जावेद अहमद सोफी ने 17,000 रुपये की आखिरी बोली लगाकर इस सिक्के को अपने नाम कर लिया।