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Srinagar News: आवासीय परिसर के साथ बन रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का लोगों ने जताया विरोध
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श्रीनगर के अलोचीबाग के रिहायशी इलाके में एसटीपी का विरोध करते लोग। संवाद
- आलोचीबाग में सिख समुदाय के घरों के पास बन रहे प्लांट को लोगों ने बताया खतरनाक
- दो दिन पहले काम रुकवाया, अधिकारियों के हाथों में घर की चाबियां थमाईं
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। शहर के आलोचीबाग इलाके में बनाए जा रहे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का मंगलवार को स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध जताया। आलोचीबाग सिख समुदाय के परिवारों का आवासीय इलाका है। यहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। लोगाें का कहना है कि आवासीय परिसर से सटाकर एसटीपी बनाना खतरनाक है, इससे आसपास के लोग बीमार होंगे।
दो दिन पहले एसटीपी के लिए की जा रही खोदाई भी लोगों ने रुकवा दी थी। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को यह कहते हुए घर की चाबियां थमा दीं कि रहने लायक माहौल ही नहीं बचेगा तो हम यहां क्या करेंगे। इसके बाद काम बंद करा दिया गया था। अलोचीबाग में रह रहे सिख परिवारों के सदस्यों में से एक अमरिंदर सिंह ने बताया कि यह प्लांट अर्बन एनवायरमेंट इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की ओर से बनाया जा रहा है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बिल्कुल घरों के साथ बनाया जा रहा है जबकि इस प्लांट के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनिवार्य मंजूरी नहीं ली गई है।
यह एसटीपी हमारे घरों से 8 मीटर से भी कम दूरी पर स्थित है जबकि न्यूनतम दूरी 100 मीटर होनी चाहिए। दो दिन पहले विरोध के तौर पर हमने अपने घरों की चाबियां अधिकारियों को सौंप दी थी जिसके बाद वह काम बंद कर चले गए थे। अब फिर से इसे शुरू करने के लिए कर्मी चक्कर लगा रहे हैं।
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वहीं इलाके के रविंदर पाल सिंह ने कहा कि यूईईडी की इस लापरवाही कार्रवाई से हमारे परिवार असहनीय बदबू, अस्वच्छ और असुरक्षित वातावरण में रहने पर मजबूर होना पड़ेगा जो कि हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। कई लोगों ने अपने पैतृक गांवों में जमीनें बेच कर इस क्षेत्र में अपनी 20 साल से अधिक की जीवनभर की बचत लगाकर मकान बनाए ताकि उन्हें सुरक्षा और सम्मान मिल सके। लेकिन इसके बजाय अब हमें गंदगी, अस्वस्थ और असुरक्षित वातावरण में रहना पड़ रहा है जबकि हमारी मेहनत की कमाई जोखिम में है।
स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से इस समस्या के समाधान के लिए न्याय की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक उचित पर्यावरणीय मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक एसटीपी पर आगे का कार्य रोकें, एसटीपी को ऐसे स्थान पर स्थानांतरित करें जो पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य मानदंडों का पालन करता हो। उन अधिकारियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराएं जिन्होंने नियमों का उल्लंघन किया और हमारे समुदाय को खतरे में डाला।
हम समाज से अपील समाज, मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से अपील करते हैं कि इस संघर्ष में हमारे साथ खड़े हों। यह केवल सिखों का मामला नहीं है, यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय न्याय और मानव गरिमा का मामला है। हम न्याय मिलने तक सामूहिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। अब चुप रहना कोई विकल्प नहीं है। इस संबंध में यूईईडी से बात करने की कोशिश की गई पर संपर्क नहीं हो पाया।
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- दो दिन पहले काम रुकवाया, अधिकारियों के हाथों में घर की चाबियां थमाईं
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। शहर के आलोचीबाग इलाके में बनाए जा रहे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का मंगलवार को स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध जताया। आलोचीबाग सिख समुदाय के परिवारों का आवासीय इलाका है। यहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। लोगाें का कहना है कि आवासीय परिसर से सटाकर एसटीपी बनाना खतरनाक है, इससे आसपास के लोग बीमार होंगे।
दो दिन पहले एसटीपी के लिए की जा रही खोदाई भी लोगों ने रुकवा दी थी। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को यह कहते हुए घर की चाबियां थमा दीं कि रहने लायक माहौल ही नहीं बचेगा तो हम यहां क्या करेंगे। इसके बाद काम बंद करा दिया गया था। अलोचीबाग में रह रहे सिख परिवारों के सदस्यों में से एक अमरिंदर सिंह ने बताया कि यह प्लांट अर्बन एनवायरमेंट इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की ओर से बनाया जा रहा है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बिल्कुल घरों के साथ बनाया जा रहा है जबकि इस प्लांट के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनिवार्य मंजूरी नहीं ली गई है।
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यह एसटीपी हमारे घरों से 8 मीटर से भी कम दूरी पर स्थित है जबकि न्यूनतम दूरी 100 मीटर होनी चाहिए। दो दिन पहले विरोध के तौर पर हमने अपने घरों की चाबियां अधिकारियों को सौंप दी थी जिसके बाद वह काम बंद कर चले गए थे। अब फिर से इसे शुरू करने के लिए कर्मी चक्कर लगा रहे हैं।
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वहीं इलाके के रविंदर पाल सिंह ने कहा कि यूईईडी की इस लापरवाही कार्रवाई से हमारे परिवार असहनीय बदबू, अस्वच्छ और असुरक्षित वातावरण में रहने पर मजबूर होना पड़ेगा जो कि हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। कई लोगों ने अपने पैतृक गांवों में जमीनें बेच कर इस क्षेत्र में अपनी 20 साल से अधिक की जीवनभर की बचत लगाकर मकान बनाए ताकि उन्हें सुरक्षा और सम्मान मिल सके। लेकिन इसके बजाय अब हमें गंदगी, अस्वस्थ और असुरक्षित वातावरण में रहना पड़ रहा है जबकि हमारी मेहनत की कमाई जोखिम में है।
स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से इस समस्या के समाधान के लिए न्याय की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक उचित पर्यावरणीय मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक एसटीपी पर आगे का कार्य रोकें, एसटीपी को ऐसे स्थान पर स्थानांतरित करें जो पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य मानदंडों का पालन करता हो। उन अधिकारियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराएं जिन्होंने नियमों का उल्लंघन किया और हमारे समुदाय को खतरे में डाला।
हम समाज से अपील समाज, मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से अपील करते हैं कि इस संघर्ष में हमारे साथ खड़े हों। यह केवल सिखों का मामला नहीं है, यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय न्याय और मानव गरिमा का मामला है। हम न्याय मिलने तक सामूहिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। अब चुप रहना कोई विकल्प नहीं है। इस संबंध में यूईईडी से बात करने की कोशिश की गई पर संपर्क नहीं हो पाया।