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गुपकार गठबंधन ने नए भूमि कानून को किया खारिज
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श्रीनगर। गुपकार घोषणापत्र गठबंधन (पीएजीडी) ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन के इस दावे को खारिज कर दिया कि कृषि भूमि के बड़े हिस्से को केंद्र शासित प्रदेश के बाहर के लोगों को बेचा नहीं जा सकेगा। गठबंधन की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि पीएजीडी 26 अक्तूबर को जारी गृह मंत्रालय के आदेश पर आधिकारिक प्रवक्ता के बयान को खारिज करता है क्योंकि इसमें तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने, झूठ फैलाने और लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है। कहा गया कि मूल भूमि कानूनों को निरस्त करने और अन्य कानूनों में बड़े पैमाने पर संशोधन करने का मकसद जनसांख्यिकीय परिवर्तन और जम्मू-कश्मीर के लोगों को कमजोर करना है। बता दें, पीएजीडी में नेकां, पीडीपी, सीपीआई (एम), पीपुल्स कांफ्रेंस, अवामी नेशनल कांफ्रेंस तथा पीपुल्स मूवमेंट शामिल हैं।
बयान में कहा गया कि जम्मू-कश्मीर पहला राज्य है जिसने काश्तकारों को जमीन देने का कानून लागू किया था। भूमि सुधार कानूनों की ही वजह से जम्मू-कश्मीर में भूख से किसी की मौत नहीं हुई। किसी भी किसान ने आत्महत्या नहीं की। रोटी, कपड़ा और मकान यहां के सभी निवासियों को उपलब्ध है। उन्होंने सवाल किया कि नया कानून कैसे बाहरी लोगों को जमीन स्थानांतरित करने से रोक सकता है। वहीं कानून में आईडीबीआई, इंडस्ट्रियल क्रेडिट, इंवेस्टमेंट कारपोरेशन को गिरवी आधार पर जमीन देने का प्रावधान किया गया है। नए कानून से जमीन के स्थानांतरण का सबसे महत्वपूर्ण अधिकार जम्मू-कश्मीर के लोगों से छिन गया है। बयान में कहा गया है कि नया कानून किसान विरोधी तथा अधिग्रहण में सीलिंग विरोधी है। नया कानून न केवल जम्मू कश्मीर के लोगों के विरोध में है, बल्कि यह असांविधानिक और अलोकतांत्रिक है।
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बयान में कहा गया कि जम्मू-कश्मीर पहला राज्य है जिसने काश्तकारों को जमीन देने का कानून लागू किया था। भूमि सुधार कानूनों की ही वजह से जम्मू-कश्मीर में भूख से किसी की मौत नहीं हुई। किसी भी किसान ने आत्महत्या नहीं की। रोटी, कपड़ा और मकान यहां के सभी निवासियों को उपलब्ध है। उन्होंने सवाल किया कि नया कानून कैसे बाहरी लोगों को जमीन स्थानांतरित करने से रोक सकता है। वहीं कानून में आईडीबीआई, इंडस्ट्रियल क्रेडिट, इंवेस्टमेंट कारपोरेशन को गिरवी आधार पर जमीन देने का प्रावधान किया गया है। नए कानून से जमीन के स्थानांतरण का सबसे महत्वपूर्ण अधिकार जम्मू-कश्मीर के लोगों से छिन गया है। बयान में कहा गया है कि नया कानून किसान विरोधी तथा अधिग्रहण में सीलिंग विरोधी है। नया कानून न केवल जम्मू कश्मीर के लोगों के विरोध में है, बल्कि यह असांविधानिक और अलोकतांत्रिक है।
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