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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   Kashmir: Kashmiri artisan Mir Arshid won first prize in Iranian Crafts Festival, dedicated his life to art.

Kashmir: कश्मीरी कारीगर मीर अर्शिद ने ईरानी शिल्प महोत्सव में जीता प्रथम पुरस्कार, कला को समर्पित किया जीवन

Thu, 27 Feb 2025 02:02 PM IST
निकिता गुप्ता अमृतपाल सिंह बाली अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: निकिता गुप्ता Updated Thu, 27 Feb 2025 02:02 PM IST
सार

कश्मीरी कारीगर मीर अर्शिद ने ईरानी शिल्प महोत्सव में पहला पुरस्कार जीतने पर खुशी जाहिर करते हुए पेपर माशी कला को संरक्षित करने और इसमें योगदान देने के लिए अपने आप को समर्पित किया।

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Kashmir: Kashmiri artisan Mir Arshid won first prize in Iranian Crafts Festival, dedicated his life to art.
मीर अर्शिद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कश्मीरी कारीगर मीर अर्शिद ने ईरानी शिल्प महोत्सव में प्रथम पुरस्कार जीतने पर ख़ुशी का इज़हार किया। उन्होंने कहा कि एक कारीगर के इससे बढ़कर क्या हो सकता कि उसको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले। उन्होंने कहा कि इस कला को संरक्षित करने तथा इसमें योगदान देने के लिए मैंने स्वयं को इसके लिए समर्पित कर दिया है।

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बता दें कि अर्शिद की पेपर माशी वॉल प्लेट ने पहला स्थान हासिल किया। अमर उजाला से ख़ास बातचीत में अर्शिद ने बताया, हमारी यह प्रदर्शनी तेहरान में हुई जिसमें करीब शुरू में करीब 7000 प्रतिभागियों ने भाग लिया था जिसमें से गुणवत्ता और शिल्प कौशल के आधार पर 300 को सेलेक्ट किया गया जिसके बाद में मेरे द्वारा बनाई गई पेपर माशी की प्लेट को प्रथम पुरस्कार के लिए चुना गया।

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हमारी यह दूसरी पीढ़ी है जो इस कला के साथ जुडी हुई है। मैंने अपने बचपन से अपने पिता को देख कर यह कला सीखी है और मई भी करीब 30 वर्षों से अधिक समय से पेपर पाशी कला के साथ जुड़ा हुआ हूं। अभी मेरे बच्चे छोटे हैं लेकिन वह भी इस ओर आकर्षित हैं। अपनी आईटी इंजीनियरिंग को संपन्न करने के बाद मैंने इस कला को पेशेवर तरीके से अपनाया है। मैंने इस कला के उतार-चढ़ाव देखे हैं और इस कला को संरक्षित करने तथा इसमें योगदान देने के लिए मैंने स्वयं को इसके लिए समर्पित कर दिया है।

बता दें कि अर्शिद ने श्रीनगर के इस्लामिया कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद इग्नू से बीआईटीएस बीटेक और फिर लंदन से एचएनडीएंडएचएनसी (हायर नेशनल डिप्लोमा एंड हायर नेशनल सर्टिफिकेशन) की पढाई की है। उन्होंने कहा कि मुझे आज काफी खुशी हो रही है कि उनके कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरहाहा गया है। यह एक कारीगर के लिए काफी खुशी का पल होता है। हमारा यहां जो हेंडीक्राफ्ट विभाग है - प्रदेश का या सेंट्रल, काफी सहयोग दे रहे हैं लेकिन नीतियों में अच्छे बदलाव होने चाहिए ताकि शिल्प को अगली पीढ़ी के लिए संरक्षित किया जा सके। क्योंकि अगर देखा जाए अगली पीढ़ियों में जॉब फैसिलिटी ऐसी नहीं होगी।

गौरतलब है कि कारीगरों द्वारा कला से दूरी बनाने को लेकर पूछे जाने पर अगर नया मार्किट ढूंढा जाए, एक ब्रांडिंग सिस्टम के द्वारा इस कला को अंतरराष्ट्रीय मार्किट तक ले जाया जाए तो ज़ाहिर तौर पर कारीगर वापिस इस कला की ओर आकर्षित होंगे। क्योंकि आखिर कार सब रोजी रोटी कमाने के लिए करते हैं और अगर सबको वो मिल पाएगा तो कोई इस कला से दूरी क्यों बनाएगा।

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