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Srinagar News: लेह में पांगोंग फ्रोजन लेक मैराथन का आगाज, 460 धावकों ने लिया हिस्सा

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लेह। पांगोंग झील पर आयोजित पांगोंग फ्रोजन लेक मैराथन 2026 का चौथा संस्करण उत्साहपूर्ण माहौल में शुरू हुआ। इसमें भारत के 21 राज्यों के धावकों के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात, नेपाल और ऑस्ट्रेलिया से अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवानों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। लद्दाख के मनमोहक लेकिन कठिन प्राकृतिक परिवेश के बीच आयोजित इस उच्च हिमालयी प्रतियोगिता ने एक बार फिर प्रतिभागियों की सहनशक्ति और मानसिक मजबूती की परीक्षा ली।
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दो दिवसीय मैराथन में कुल 460 धावक भाग ले रहे हैं, जिनमें 186 प्रतिभागियों ने 10 किलोमीटर श्रेणी में हिस्सा लिया, जबकि 46 धावकों ने जमी हुई झील पर आयोजित चुनौतीपूर्ण 42 किलोमीटर मैराथन में भाग लिया। महिला धावकों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही, जिसमें 10 किमी दौड़ में 16 और 42 किमी श्रेणी में 6 महिला प्रतिभागी शामिल रहीं।
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इस मैराथन का आयोजन थिन आइस एडवेंचर्स द्वारा केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और भारतीय सेना के सहयोग से किया जा रहा है, जबकि इंडियन ऑयल ने कार्यक्रम को समर्थन प्रदान किया। प्रतियोगिता को दुर्बुक के उप-मंडलाधिकारी मोहम्मद इस्माइल तथा 114 ब्रिगेड के कमांडर जगदीश एमआर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। दौड़ की शुरुआत सुबह 8:30 बजे पांगोंग क्षेत्र के मान गांव से हुई।
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मैराथन से पहले राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और यूटीडीआरएफ की टीमों ने जमी हुई झील की सतह का विस्तृत निरीक्षण किया। बर्फ की मोटाई की जांच की और इसे धावकों के लिए सुरक्षित घोषित किया। मौसम की अनिश्चितता और अत्यधिक ऊंचाई को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी गई।

पुरुषों की 42 किलोमीटर मैराथन श्रेणी में त्सेरिंग नुरबू ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि त्सेरिंग स्तोबगैस दूसरे स्थान पर रहे और खादिम हुसैन ने कठिन बर्फीले मार्ग को पार करते हुए तीसरा स्थान प्राप्त किया।

प्रतिभागियों ने बताया कि फ्रोजन मैराथन पारंपरिक सड़क दौड़ों की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यहां अत्यधिक ठंड, फिसलन भरी सतह और ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी धावकों की वास्तविक क्षमता की परीक्षा लेती है। कई धावकों ने पिछले वर्षों की तुलना में मौसम में बदलाव, कम बर्फबारी और अपेक्षाकृत गर्म परिस्थितियों का भी उल्लेख किया, जिससे फिसलन का खतरा बढ़ा है और क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।

धावकों ने बाहरी राज्यों और देशों से आने वाले प्रतिभागियों को सलाह दी कि वे बेहतर अनुकूलन (एक्लिमेटाइजेशन) के लिए कम से कम एक से दो सप्ताह पहले लद्दाख पहुंचें, ताकि ऊंचाई और मौसम के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें।

प्रतिभागियों ने बताया कि बर्फ पर दौड़ना सामान्य सड़क पर दौड़ने की तुलना में कहीं अधिक शारीरिक मेहनत मांगता है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद धावकों ने इस अनूठे अनुभव की सराहना की और भविष्य में फिर भाग लेने की इच्छा जताई। उन्होंने यह भी बताया कि पांगोंग का मार्ग अपेक्षाकृत समतल होने के बावजूद बर्फीली सतह संतुलन और सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा लेती है, विशेषकर लंबी दूरी की दौड़ों में।


10 किलोमीटर ओपन महिला वर्ग

1. येशी सांगडोल — 1:08:34


2. ताशी डोलकर — 1:14:34


3. रिनचेन डोलकर — 1:15:08



10 किलोमीटर ओपन पुरुष वर्ग

1. महबूब अली — 0:45:01


2. रिनचेन गुरमेत — 0:45:17


3. जिगमेत स्तोबदन — 0:45:22



मैराथन का समापन 25 फरवरी को 21 किलोमीटर और 5 किलोमीटर दौड़ के साथ होगा। रोमांच, सहनशक्ति और पर्यावरण जागरूकता का अनूठा संगम बनी यह पांगोंग फ्रोजन लेक मैराथन न केवल खिलाड़ियों के जज्बे को दर्शाती है, बल्कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है।

बसोहली में वीबी जी राम जी योजना पर आयोजित कार्यक्रम में विचार व्यक्त करती छात्रा। ंविज्ञप्ति

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